राष्ट्रपति पद के लिए अब मुर्मू और सिन्हा आमने सामने, जानें क्या है मुर्मू का इतिहास


राष्ट्रपति का चुनाव अब द्रौपती मूर्मू बनाम यशवंत सिन्हा हो गया है। यशवंत सिन्हा संयुक्त विपक्ष के अधिकृत प्रत्याशी घोषित होने के बाद सत्ता पक्ष ने भी देर रात द्रौपती मूर्मू को अधिकृत प्रत्याशी घोषित कर दिया है।अब यह तय हो गया है कि देश के सर्वोच्च पद राष्ट्रपती के इस चुनाव में मूर्मू बनाम सिन्हा की टक्कर होने जा रही है। हलांकि सिन्हा भी कभी भाजपा के बड़े नेताओ में सुमार रहे है। इस दल की सियासी दांव पेंच से खासे वाकिफ भी है। 
गिरीश मुर्मू को भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) बनाने के बाद ओडिशा के मयूरभंज जिले से ही आने वाली द्रौपदी मुर्मू को एनडीए की तरफ से राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया गया है। यह इस जिले के लिए डबल गिफ्ट है। न्यूज एजेंसी एएनआई से फोन पर बात करते हुए मुर्मू ने कहा कि वह अपनी उम्मीदवारी के बारे में जानकर हैरान थीं और इस पर विश्वास करने में असमर्थ थीं। उन्होंने कहा कि वह संविधान में निहित राष्ट्रपति की शक्तियों के अनुसार काम करेंगी।
उन्होंने कहा कि वह निर्वाचक मंडल के सदस्यों से उनके समर्थन के लिए संपर्क करेंगी। झारखंड की पूर्व राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने कहा, "मैं हैरान हूं, मुझे इस पर विश्वास नहीं हो रहा था। मैं शुक्रगुजार हूं। मैं ज्यादा बोलना नहीं चाहती।" राष्ट्रपति के रूप में निर्वाचित होने पर अपनी प्राथमिकताओं के बारे में एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, "संविधान में राष्ट्रपति के पास जो भी शक्तियां हैं, मैं उसके अनुसार काम करूंगी।"
यशवंत सिन्हा की उम्मीदवारी पर क्या बोलीं?
पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा को राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में घोषित करने के लिए विपक्षी दलों के साथ प्रतिस्पर्धा के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि वह सांसदों और विधायकों का समर्थन मांगेंगी। उन्होंने कहा, "उम्मीदवार हैं। हमारा काम लोगों के पास जाना है। निर्वाचक मंडल के सदस्यों तक पहुंचना और उनका सहयोग लेना है। मैं सभी दलों और राज्यों से समर्थन का अनुरोध करूंगी।"
द्रौपदी मुर्मू को मंगलवार को भाजपा नीत राजग की ओर से राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया गया। वह ओडिशा की पूर्व मंत्री हैं।
राष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान 18 जुलाई को होगा। निर्वाचित होने पर वह भारत की पहली आदिवासी राष्ट्रपति और देश की दूसरी महिला राष्ट्रपति होंगी।
झारखंड की पहली महिला राज्यपाल का गौरव
द्रौपदी मुर्मू ओडिशा से किसी प्रमुख राजनीतिक दल या गठबंधन की पहली राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार हैं। उन्होंने बाधाओं को तोड़ना जारी रखा और झारखंड की पहली महिला राज्यपाल बनीं। उन्होंने 2015 से 2021 तक झारखंड की राज्यपाल के रूप में कार्य किया।
गरीब आदिवासी परिवार से रहा है नाता
ओडिशा के एक पिछड़े जिले मयूरभंज के एक गरीब आदिवासी परिवार से आने वाली द्रौपदी मुर्मू ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद अपनी पढ़ाई पूरी की। उन्होंने श्री अरबिंदो इंटीग्रल एजुकेशन सेंटर, रायरंगपुर में पढ़ाया। 20 जून 1958 को जन्मी मुर्मू ने रमादेवी महिला कॉलेज भुवनेश्वर से बीए किया।
2000 में पहली बार विधायक
उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत रायरंगपुर एनएसी के उपाध्यक्ष के रूप में की थी। द्रौपदी मुर्मू 2000 और 2004 के बीच रायरंगपुर से ओडिशा विधानसभा की सदस्य थीं। एक मंत्री के रूप में उन्होंने परिवहन और वाणिज्य, पशुपालन और मत्स्य पालन विभागों का कार्यभार संभाला। उन्होंने 2004 से 2009 तक ओडिशा विधानसभा में फिर से विधायक के रूप में कार्य किया।
2007 में सर्वश्रेष्ठ विधायक का सम्मान
2007 में ओडिशा विधानसभा ने उन्हें सर्वश्रेष्ठ विधायक के लिए 'नीलकंठ पुरस्कार' से सम्मानित किया। उन्होंने 1979 और 1983 के बीच सिंचाई और बिजली विभाग में एक कनिष्ठ सहायक के रूप में कार्य किया। उन्होंने भाजपा में कई संगठनात्मक पदों पर कार्य किया है और 1997 में राज्य एसटी मोर्चा की उपाध्यक्ष बनीं।
द्रौपदी मुर्मू 2013 से 2015 तक भाजपा के एसटी मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यकारी सदस्य थीं और 2010 और 2013 में मयूरभंज (पश्चिम) के भाजपा जिला प्रमुख के रूप में कार्य किया। 2006 और 2009 के बीच वह ओडिशा में भाजपा के एसटी मोर्चा की प्रमुख थीं। वह 2002 से 2009 तक भाजपा एसटी मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सदस्य रहीं।

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