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Showing posts from May 22, 2022

बेटे का दाह संस्कार करने गये पिता की भी नदी में डूबने से हो गई मौत, परिवार में कोहराम

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बेटे के अंतिम संस्कार में गए भदोही जिले के पूरेरजई निवासी पिता की गंगा में डूबने से मौत हो गई। रविवार को 24 घंटे बाद शव अवगढ़नाथ घाट पर उतराया मिला। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। दो दिनों में परिवार में दो लोगों की मौत से परिवार मे कोहराम मचा हुआ है।  गोपीगंज नगर के पूरेरजई निवासी अमरजीत बिंद (40) मंडुआडीह अपने ससुराल में रहता था। शनिवार को तबियत खराब होने से उसकी मौत हो गई। उसका अंतिम संस्कार करने के लिए परिवार के सदस्य रामपुर गंगा घाट लेकर गए। दाह संस्कार हो रहा था उसी समय अमरजीत के पिता कृष्णा बिंद (70) रामपुर के पीपा पुल पर टहलते समय गंगा में गिर गए। उस दौरान किसी को पता नहीं चला, लेकिन जब लोग घर लौटकर आए तो खोजबीन करने लगे। कुछ लोगों ने गंगा में डूबने की आशंका भी जताई, लेकिन स्पष्ट नहीं हो सका। देर रात तक पता न चलने पर पुलिस को सूचना दी। रविवार सुबह अवघड़नाथ घाट पर कृष्णा बिंद का शव उतराया मिला। परिवार में पिता-पुत्र की मौत से कोहराम मच गया है। परिवार वालों का रो-रोकर बुरा हाल है।

आरोपः प्रधान का शिक्षक पति शिक्षण कार्य के बजाय करता है गांव की परधानी

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जौनपुर। जनपद के विकास खण्ड सिरकोनी स्थित ग्राम पंचायत सादी पुर के निवासी राजकुमार नामक व्यक्ति ने अपने ग्राम सभा के ग्राम प्रधान पर आरोप लगाया है कि वह खुद ग्राम प्रधान का कार्य नहीं कर रही है उनके शिक्षक पति विद्यालय जा कर शासनादेश के तहत शिक्षण कार्य करने के बजाय ग्राम प्रधान का काम कर रहे है।  शिकायत कर्ता ने मुख्यमंत्री सहित जिला स्तरीय अधिकारियों को शिकायत भेजने की बात करते हुए कहा कि गांव की प्रधान सुनीता यादव है और उनके पति अखिलेश यादव विकास खण्ड मुफ्तीगंज के प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक है और अपने विद्यालयी कार्य को न करते हुए ग्राम प्रधान के कार्य को दिन रात करते है। आरोपी ने मांग किया है कि ग्राम प्रधान पति के खिलाफ विधिक कार्यवाई किया जाना चाहिए। आरोपी का यह भी आरोप है कि उनके भाई नरेंद्र कुमार यादव द्वारा ग्राम सभा का संपूर्ण कार्य अपने द्वारा कराते है चाहे वह मनरेगा का कार्य हो, चकमार्ग का कार्य हो ,या नाली बनवाने का कार्य हो l उनके द्वारा  अपने 10 दबंग साथियों को लेकर गांव सभा के प्रत्येक कार्य में हस्तक्षेप करके गांव में हमेशा मार झगड़ा की स्थिति उत्पन्न करते

मुख्यमंत्री का आदेश जारी होते ही प्रशासन ने जौनपुर को जाम मुक्त कराने की बनायी यह योजना,अमल शुरू

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जौनपुर। यूपी सरकार के मुखिया मुख्यमंत्री का फरमान जारी होने के बाद से जौनपुर प्रशासन ने शहर को सुंदर बनाने और जाम की समस्या से मुक्त करने का खाका तैयार कर लेने का दावा किया जा रहा है। इस दौरान शहर में पार्किगिं स्थल बनाने, दुकानों के सामने वाहन खड़ा न करने, प्राइवेट बस और टैक्सी स्टैंड को शहर से बाहर स्थापित करने पर चर्चा हुई। इसके अलावा, ठेले-खमोचे वालों को स्थान उपलब्ध कराने सहित कई समस्याओं का निस्तारण करने का प्लान तैयार किया गया है। यह निर्णय प्रशासन ने व्यापारियों के साथ बैठक कर ले लिया। बता दें सवा तीन लाख आबादी वाले शहर में पार्किगिं की सुविधा नहीं है।दुकानों के सामने सड़क की पटरियों पर बेतरतीब खड़ा करने को लोग मजबूर हैं। अपने जीविकोपार्जन के लिए ठेले-खमोचे वाले भी शहर के प्रमुख चौराहों और तिराहों सहित सड़क की पटरियों पर दुकान लगाते हैं। जिसके परिणामस्वरूप शहर हर समय जाम की जद में रहता है। इस जाम में फंसने से लोगों को दिक्कत का सामना करना पड़ता है। इतना ही नहीं कई बार तो बीमार मरीजों की जाम के चलते उपचार के अभाव में दम ही टूट जाता है। सीएम का आदेश आने के बाद इस समस्

आखिर एसडीएम ने लेखपाल को किया निलंबित, जानें क्या है कारण

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जौनपुर। केराकत उपजिलाधिकारी राजेश कुमार चौरसिया ने लेखपाल अश्विनी कुमार श्रीवास्तव को निलंबित कर दिया है। उन पर अवैध कब्जे में सहयोग करने और ग्रामसभा की भूमि की रखवाली करने के बजाय इसकी सौदेबाजी करने का आरोप लगा है। उपजिलाधिकारी ने इस संबंध में आदेश जारी किया है। इसके मुताबिक, एसडीएम ने कहा कि पुरेव गांव में शिकायत मिली थी कि कुछ लोग ग्रामसभा की भूमि पर कब्जा किए हैं। प्रकरण की जांच में शिकायत सही पाई गई और लेखपाल को निर्देशित किया गया कि वह कब्जाधारकों के खिलाफ तहसीलदार न्यायालय में राजस्व संहिता की धारा के तहत कार्यवाही करें। इसके बाद भी समय बीतने के साथ ही अतिक्रमणकारियों पर न तो कोई कार्यवाही हुई और न ही कोई रिपोर्ट न्यायालय में प्रेषित की गई। इस कार्य में लेखपाल अश्विनी कुमार श्रीवास्तव की भूमिका संदिग्ध देख तहसीलदार राम सुधार ने जांच कर रिपोर्ट सौंपी। इसमें यह पता चला कि कुछ स्थानों पर कब्जा किया गया है। ऐसे में लेखपाल को इस कार्य में संलिप्त मानकर तत्काल प्रभाव से निलंबित कर रजिस्ट्रार कार्यालय से संबद्ध कर दिया।

दुकान के बाहर नहीं रख सकेंगे सामान, अवैध वाहन स्टैंड होने पर लगेगा गैंगेस्टर

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  सीएम के आदेश आते ही पुलिस हुई सक्रिय सात दिन में अतिक्रमण मुक्त करने का एलान  जौनपुर। मुख्यमंत्री की सख्ती का असर जनपद जौनपुर में साफ दिखने लगा है। कल तक संसाधन और स्थान की कमी का हवाला देकर चुपचाप बैठने वाले जिम्मेदार अब सक्रिय हो गए हैं। स्थिति यह है कि पुलिस ने जनपद के सभी बाजारों को सात दिन के अंदर अतिक्रमण मुक्त कराकर जाम की समस्या को दूर करने का निर्णय लिया है। इसके लिए पूरा अमला सड़क पर उतर गया है। पैदल मार्च कर संबंधित दुकानदारों को बताया जा रहा है कि वे अपने सामान को दुकान के अंदर ही रखकर बेंचे। यदि बाहर रखेंगे तो मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। साथ ही अवैध वाहन स्टैंड के संचालन होने पर गैंगेस्टर के तहत कार्रवाई करने की चेतावनी दी जा रही है। अपर पुलिस अधीक्षक नगर डा. संजय कुमार भारी फोर्स के साथ नगर में पैदल मार्च करते हुए  वह कोतवाली से चांद मेडिकल के आगे तक, कोतवाली से चहारसू तक इसके बाद नगर की कई गलियों में पैदल मार्च कर व्यापारियों से संवाद किए। उन्हें मुख्यमंत्री के आदेश का हवाला देते हुए बताया कि वे अपने दुकानों के सामान को अंदर ही रखकर बेचेंगे। ऐसा न

आखिर इन तीन जजो को हाईकोर्ट ने बर्खास्त क्यों किया, जाने कारण

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार के आरोप में तीन अतिरिक्त जिला जजों को बर्खास्त कर दिया है। बार और बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, निम्नलिखित उत्तर प्रदेश न्यायिक अधिकारियों को भ्रष्टाचार के आरोपों में न्यायिक कदाचार का दोषी पाया गया है: 1. अशोक कुमार सिंह VI, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश; 2. हिमांशु भटनागर, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश; 3. डॉ. राकेश कुमार नैन, विशेष न्यायाधीश, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम। 28 मार्च 2001 को अशोक कुमार सिंह को अतिरिक्त सिविल जज (जूनियर डिवीजन), गाजीपुर के रूप में नियुक्त किया गया और 4 जुलाई 2015 को उन्हें अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश बदायूं के रूप में नियुक्त किया गया। 11 जुलाई 2015 को उन्हें निलंबित कर दिया गया था। हिमांशु भटनागर को 19 मार्च, 1996 को अतिरिक्त सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के रूप में नियुक्त किया गया और 16 अप्रैल, 2021 को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, बलिया के रूप में नियुक्त किया गया। डॉ राकेश कुमार नैन ने 11 अगस्त, 1999 को सेवाओं में प्रवेश किया। अप्रैल से 15, 2021, वह विशेष न्