जांच का बिषय है आखिर बच्चो में क्यों और कैसे बढ़ रहा है कैंसर का रोग


जौनपुर। बीमारी में जब कैंसर का नाम आता है तो मरीज ही नहीं सुनने वाले लोगों को भी पसीने छूट जाते हैं। शायद इसके पीछे यह कारण है कि कैंसर का कोई इलाज नहीं है। विगत कुछ वर्षो से बच्चों में भी यह बीमारी तेजी से बढ़ रही है। जिला अस्पताल में हर साल 5 से 6 बच्चे कैंसर से पीड़ित मिल रहे हैं। जांच के बाद कैंसर की पुष्टि होती है तो उन्हें इलाज के लिए किसी बड़े सेंटर पर भेज दिया जाता है।
जागरूक करने के उद्देश्य से हर वर्ष 15 फरवरी को अंतराष्ट्रीय बाल कैंसर दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिवस का उद्देश्य बच्चों में होने वाले कैंसर के प्रति जागरूकता फैलाना तथा कैंसर का उपचार कराना। चिकित्सकों का कहना है कि कैंसर लाइफ स्टाइल से जुड़ी बीमारी है। अनियमित रहन-सहन और गलत खानपान की वजह से बढ़ रही है। ल्यूकेमिया एक तरह के ब्लड कैंसर की शुरुआती स्टेज है। इसका इलाज आसानी से हो सकता, लेकिन जब इस रोग का शुरुआत में ही पता चल जाए। बच्चों में ल्यूकीमिया यानि ब्लड कैंसर के लक्षणों को पहचानना थोड़ा मुश्किल है। लेकिन इन लक्षणों पर ध्यान देकर अगर आप तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें तो शायद इस खतरनाक रोग से आप अपने बच्चों को बचा पाएंगे।
जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डा. संदीप सिंह का कहना है कि बच्चों में भी कैंसर की समस्या बढ़ रही है। ब्लड कैंसर के साथ ही प्लास्टिक एनीमिया और ब्रेन कैंसर की शिकायत मिल रही है। हालांकि ऐसे बच्चों की संख्या काफी कम है। देखा जाए तो 3000 पर एक अथवा 10 हजार पर इनकी संख्या 2 से 3 हो सकती है। एक साल में 5 से 6 मरीज मिल चुके हैं।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप सिंह बताते हैं कि कैंसर की शुरूआत बुखार से होती है। जब पहली बार इलाज के लिए आते हैं तो तीन दिन की दवा देकर छोड़ दिया है। इसके बाद भी यदि 6 से 7 दिन तक बुखार आता रहता है तो एंबायोटिक दवाएं शुरू की जाती है। इसके बाद भी यदि बुखार नहीं बंद होता है तो मान लिया जाता है कि बच्चे में कोई बड़ी बीमारी है। जांच कराने पर पता चलता है कि कुछ बच्चों में डब्ल्यूबीसी काफी बढ़ गया है। स्प्लीन के लीवर का आकार भी बढ़ जाता है। यह स्थिति कैंसर का संकेत। जबकि कुछ बच्चों में सिर के पीछे वाले भाग में दर्द शुरू होता है। जो बात में ब्रेन ट्यूमर का रूप ले लेता है। प्लास्टिक एनीमिया कहते हैं। थकान और कमजोरी महसूस होना, सिर में दर्द होना, शरीर के जोड़ों में दर्द होना, हड्डियों में दर्द की शिकायत होना आदि होती है। 

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