जिला अस्पताल में लगायी गयी ट्रूनेट मशीन की जांच रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर खड़े हो रहे हैं सवाल




जौनपुर । जनपद में जहां कोरोना मरीजों की संख्या में तेजी से बृद्धि हो रही है वहीं पर जिला अस्पताल में लगायी गयी ट्रूनेट मशीन की जांच रिपोर्ट सवालों के घेरे में आती जा रही है। हलांकि मशीन के बिषयक किसी भी तरह का जबाब देने से जिला अस्पताल के जिम्मेदार अधिकारी परहेज कर रहे हैं लेकिन लाखों रुपये से सरकार द्वारा खरीदी गई इस मशीन की जांच रिपोर्ट विश्वसनीय नहीं मानी जा रही है। 
यहाँ बतादे कि जिला अस्पताल में लगायी गयी ट्रूनेट मशीन को प्रदेश की सरकार ने क्रय कर यहाँ पर सीधे भेजा है ऐसा इसलिए किया गया कि जिला स्तर पर गड़बड़ी की संभावना शासन ने महसूस किया था। लेकिन खुद ही गड़बड़ी कर दिया है। यहां पर जिला अस्पताल में सेवा रत चिकित्सक डा डी एस यादव की जांच इस ट्रूनेट मशीन से किया गया इस मशीन ने जांच रिपोर्ट कोरोना पाजिटिव बताया तो अस्पताल में हड़कंप मच गया अस्पताल को हाट स्पांट घोषित कर सेनेटराईज किया जाने लगा मरीजों को अस्पताल जाने से रोक दिया गया था। लेकिन इसके बाद डा यादव का सैम्पल पुन: लेकर एस पी जी आई लखनऊ भेजा गया वहां से जांच रिपोर्ट निगेटिव आ गयी । हलांकि जौनपुर जिला अस्पताल में लगी मशीन से जांच के बाद भी डा यादव खुद को आइशोलेसन में रखें थे लेकिन उन्हें कोई परेशानी नहीं थी। 
इतना ही नहीं शहर के भन्डारी चौकी पर तैनात एक सिपाही जिसकी ड्यूटी जिला अस्पताल में होती थी की जांच में इसी मशीन ने कोरोना पाजिटिव बता दिया इस सिपाही की सैम्पल भी लखनऊ एस पी जी आई भेजा गया तो वहां से जांच रिपोर्ट निगेटिव आ गयी है। सिपाही की रिपोर्ट इस मशीन ने जैसे ही पाजिटिव बताया विभाग में हड़कंप मच गया लेकिन लखनऊ से रिपोर्ट आने पर राहत की सांस ली है। 
जिला अस्पताल में लगायी गयी ट्रूनेट मशीन की जांच रिपोर्ट के बाबत सी एम एस  डा अनिल शर्मा से बात करने पर उनका जबाब था मशीन है कभी कभी रिपोर्ट गलत भी आ सकती है। मशीन की तकनीक खराबी के बाबत कुछ भी नहीं बता रहे है। वहीं पर टेक्नीशियन सतीश चन्द्र पटेल कहते हैं कि इस मशीन से कोविड 19 के मरीजों की जांच की जा रही है। जिला अस्पताल के ही एक सूत्र ने नाम गोपनीय रखने की शर्त पर जानकारी दिया कि यह मशीन खराब है इसके क्रय में उच्च स्तर पर खासी कमीशन खोरी करके रद्दी मशीन जिलों में भेजी गयी है। 
अब यहाँ पर सवाल यह खड़ा होता है कि कोरोना जैसे गम्भीर संक्रमण की महामारी से निपटने के लिए लगायी जाने वाली मशीन जब कमीशन खोरी की भेंट चढ़ेगी तो इस महामारी से कैसे निपटा जा सकता है। बतादे जबसे जिला अस्पताल में लगी ट्रूनेट मशीन पर सैम्पलो की जांच हो रही है तब से जिले में कोरोना संक्रमितो की संख्या में बेतहाशा वृद्धि होना भी इस मशीन की जांच रिपोर्ट पर प्रश्न चिन्ह लगा रहा है। एक बात और है कि यदि इसी मशीन के भरोसे स्वास्थ्य विभाग रहा तो जिले में मरीजों की संख्या हजार के पार हो सकती है। प्रशासन सहित शासन को इसे गम्भीरता से लेना चाहिए। 

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