उर्वरक खादो से सरकारी गोदाम खाली आखिर किसान परेशान कैसे करे रबी फसलो की बुआई


जौनपुर।रबी की खेती का यह मुख्य समय है, लेकिन बुआई के लिए जरूरी डीएपी से साधन सहकारी समितियों के गोदाम खाली हैं। एक सप्ताह से इंतजार कर रहे किसानों का धैर्य जवाब दे रहा है। समितियों के कर्मचारियों का सिर्फ एक ही उत्तर है अभी रैक नहीं आई है। जिम्मेदार अधिकारी ही नहीं जनप्रतिनिधि भी किसानों की इस समस्या की ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। 
जिले में इस साल रबी फसलों की 2,27,804 हेक्टेयर खेती का लक्ष्य तय है। सरकार की ओर से किसानों की सुविधा के साथ ही आय दोगुनी करने के लिए तमाम दावे के साथ महत्वाकांक्षी योजनाएं चलाई जा रही हैं। व्यवस्था में खामी कहें या जिम्मेदारों की लापरवाही कि इसका अन्नदाताओं को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। जिले के 208 साधन सहकारी समितियों में जहां 43 में ताला लटका है, वहीं सक्रिय समितियों से नकद भुगतान पर खाद खरीदनी पड़ रही है। 
हाल यह है कि किसी भी समिति पर एक सप्ताह से डीएपी उपलब्ध नहीं है। इतना ही नहीं रिजर्व कोटे का भी स्टाक शून्य होने के कारण गोदाम खाली है। प्राइवेट दुकानों पर उपलब्धता नाममात्र की है। जिनके पास डीएपी उपलब्ध है वह संकट का फायदा उठाते हुए कालाबाजारी कर रहे हैं। घटतौली के साथ ही अधिक भुगतान करने से किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। 


बरसठी क्षेत्र के बरसठी, दताव, भदराव, बरेठी, बाजिदपुर, पल्टूपुर, परियत, हरद्वारी सहित कुल 12 समितियों पर इस समय उर्वरक नहीं है। 15 दिन पूर्व डीएपी केवल सीमित मात्रा में आई थी, लेकिन इस समय किसी भी समिति पर इसकी उपलब्धता नहीं है। किसानों को जवाब देते-देते परेशान सचिव समितियों पर ताला लगाकर गायब हैं। परियत साधन सहकारी समिति के सचिव दुर्गा प्रसाद ने कहा कि 250 बोरी डीएपी 20 दिन पूर्व आई थी, इस समय उपलब्ध नहीं है। 

किसानो का कथन है कि सरकार किसानों की आय दोगुनी करने का दावा भले कर रही है लेकिन इसका अमल सही तरीके से नहीं हो रहा है। संसाधनों की व्यवस्था न होने के कारण खेती में बाधा आ रही है। वर्तमान में बुआई का समय चल रहा है और हर साल की तरह इस साल भी डीएपी नहीं मिल रही है। 
जब समय से खाद-बीज ही नहीं मिल पाएगा तो कैसे किसानों की आय दोगुनी होगी। एक सप्ताह से समितियों पर डीएपी नहीं है। बीस दिन पूर्व जो आई थी वह शुरुआत में ही खत्म हो गई। प्राइवेट दुकानों पर महंगे दाम पर खरीदना मजबूरी है वहीं गुणवत्ता को लेकर भी संशय रहता है। 


हलांकि एआर कोआपरेटिव अमित पान्डेय का कथन है कि सहकारिता को दस हजार टन डीएपी का लक्ष्य तय किया गया है। जिले में एक रैक आई थी। उसमें से 2100 टन विभाग को आवंटित किया गया था। बफर में एक सप्ताह से स्टाक न होने से समितियों पर डीएपी नहीं है। संपर्क करने पर बताया जा रहा है कि रैक आने में अभी एक सप्ताह लगेगा। 

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