बढ़ते कोरोना संक्रमण को देख हाई कोर्ट की गाइड लाइन के अनुसार चलेगी कोर्ट- जिला जज



जौनपुर। जनपद न्यायाधीश जौनपुर ने बताया है कि माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद के निर्देशानुसार जनपद में कोविड-19 संक्रमण में वृद्धि के दृष्टिगत अधीनस्थ जनपद न्यायालय में कार्यशैली/ क्रियाविधि अंगीकृत किए जाने हेतु दिशा निर्देश दिए गए है । जनपद न्यायाधीश जौनपुर, विशेष अधिकारिता प्राप्त न्यायालय यथा विशेष न्यायाधीश एस.सी/ एसटी एक्ट विशेष न्यायाधीश इ0सी एक्ट, विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट विशेष न्यायाधीश एनडीपीएस एक्ट/औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम/ दिव्यांगजन अधिनियम के मामलों को भौतिक रीति/ वीडियो कांफ्रेंसिंग रीति से पैतृक न्यायालय तथा विशेष अधिकारिता प्राप्त न्यायालय मामले सुनवाई हेतु नियत किए गए है।
ं विशेष न्यायाधीश पास्को एक्ट, मा. उच्च न्यायालय द्वारा निर्गत सूचना के अनुसार काशी प्रसाद सिंह यादव, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वारा विशेष न्यायाधीश के प्रभार ग्रहण करने तक की अवधि के लिए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/ विशेष न्यायाधीश पास्को एक्ट/रेप -तृतीय के पीठासीन अधिकारी को इस न्यायालय के कार्य निष्पादन हेतु आदेशित किया है।  जनपद न्यायाधीश के न्यायालय पर संचित भार नियोजन हेतु अत्यावश्यक प्रकरणों के निस्तारण के लिए संख्या के दृष्टिगत संचित बाहर के नियोजन हेतु आवश्यकतानुसार अपर जिला जज संवर्ग में न्यायिक कार्य निष्पादन हेतु समानुदेशित किया जाएगा।  मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी जौनपुर द्वारा आवश्यकतानुसार विचार करते हुए मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी को विवेकानुसार किसी अन्य मजिस्टीरियल न्यायालय को न्यायिक कार्य हेतु समानुदेशित किया जा सकता है।
 क्रियाशील न्यायालयों के पीठासीन अधिकारी की अनुपस्थिति में आवश्यक कार्य क्रियाशील न्यायालयों के प्रभारी अधिकारीगण द्वारा निष्पादित की जाएगी।
 न्यायिक अधिकारीगण द्वारा इस अवधि में लंबित नवीन जमानत प्रार्थना पत्र, लंबित नवीन अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र, अत्यावश्यक प्रकीर्ण दांडिक प्रार्थना पत्र, अत्यावश्यक प्रकीर्ण सिविल (यथा स्थगन से सम्बन्धित)प्रार्थना पत्र, विचाराधीन बंदियों के परिपेक्ष में रिमांड/ न्यायिक कार्यप्रकृति के प्रकरण न्यायिक अधिकारी कार्य द्वारा, ऐसे समस्त वाद/प्रकरण जिनमें माननीय न्यायालय द्वारा एक समय पद्धति से त्वरित निस्तारण के निर्देश निर्गत है निस्तारित किए जाएंगे। किसी अन्य प्रकृति का प्रकरण जिसका निस्तारण अत्यावश्यक एवं उपयुक्त पाया जाए।
 सिस्टम ऑफिसर जनपद न्यायालय जौनपुर को जनपद न्यायालय की वेबसाइट पर ई-मेल सृजित करने एवं उसका विस्तृत विवरण जनपद न्यायालय उक्त अधिकृत वेबसाइट पर प्रकाशनार्थ निर्देशित किया गया है। उपरोक्त ई-मेल आईडी जमानत/अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्रों अथवा अत्यावश्यक प्रार्थना पत्र की प्राप्ति हेतु प्रयुक्त किया जाएगा।
 विद्वान अधिवक्तागण के द्वारा ई-मेल के माध्यम से उपरोक्तनुसार प्रार्थना पत्रों में एडवोकेट/वादकारी के मोबाइल नंबर,ई-मेल आईडी का विवरण उल्लिखित किया जाना आवश्यक है। नोडल आफिसर कंप्यूटर अनुभाग को निर्देशित किया है कि अनुभाग में कार्यरत कार्मिक को ई-मेल के माध्यम से इस प्रकार के प्राप्त प्रार्थनापत्र को डाउनलोड करने एवं आवश्यक सूची निर्मित किए जाने हेतु अधिकृत किया जाना सुनिश्चित करें । अधिवक्तागण /वादकारीगण/ अन्य हितबद्व पक्षकार की ओर से प्रश्नगत अवधि में प्रस्तुत नवीन वादों/प्रार्थना पत्रों (सिविल व दाण्डिक ) प्राप्ति के लिए कंप्यूटर सर्वर रूम को सेंट्रलाइज फाइलिंग काउंटर के रूप उपयोग हेतु अधिकृत किया गया है। इस प्रकार से प्रस्तुत समस्त वाद/ प्रार्थना पत्र सी आई एस में पंजीकृत किए जाएंगे। ऐसे समस्त वादों /प्रार्थना पत्रों में संबंधित अधिवक्ता/ वादकारी का मोबाइल नंबर अंकित किया जाना अपरिहार्य है। यदि प्रपत्रों में किसी त्रुटि के पाए जाने की स्थिति में संबंधित अधिवक्ता को सूचित किया जाए।  उपरोक्त के परिपालनार्थ नोडल ऑफिसर कंप्यूटर को कंप्यूटर अनुभाग में कार्यरत कर्मचारीगण को अधिकृत किए जाने हेतु निर्देशित किया गया है। कंप्यूटर अनुभाग में कार्यरत कार्मिकों को जुडिशल सर्विस सेंटर से संपर्क करने वाले समस्त विद्वान अधिवक्तागण को इ-कोर्टस की क्रिया विधि के विषय में अवगत कराने हेतु निर्देशित किया गया है। जिससे संपर्क करने वाले विद्वान अधिवक्तागण उक्त एप के माध्यम से काज लिस्ट/सूचीबद्ध प्रकरणों की अध्ययन अद्यतन स्थिति से अवगत हो सकें। न्यायालय कक्षों में अधिवक्तागण के प्रयोग हेतु उचित दूरी के साथ केवल 04 कुर्सियों की व्यवस्था हेतु निर्देशित किया गया है। प्रत्येक व्यक्ति जो न्यायालय कक्ष में प्रवेश करेगा उसके द्वारा उचित तरीके से मास्क का धारण किया जाना अनिवार्य है।  न्यायालय कक्ष के प्रवेश द्वार पर सेनेटाइजर की व्यवस्था की जाने के निदे्रश दिये है। रीडर, न्यायालय लिपिक आदि को शारिरीक दूरी दिशा-निर्देश का अनुपालन किये जाने हेतु निर्देशित किया गया है।
    प्रभारी अधिकारी नजारत/नोडल ऑफिसर सैनिटाइजेशन को उपरोक्तानुसार आवश्यकता पूर्ति हेतु निर्देशित किया गया है । वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से न्यायालय प्रक्रिया के क्रियान्वयन हेतु तथा सी आई एस सॉफ्टवेयर में वादों के अद्यतन किए जाने हेतु सिस्टम ऑफिसर/ सिस्टम असिस्टेंट/डीएसए एवं टीएमपी को निर्देशित किया गया है। जमानत /अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्रों पर सुनवाई हेतु न्यायालय के सत्र लिपिक द्वारा आवेदन की प्रति अभियोजन अधिकारी/ जिला शासकीय अधिवक्ता को प्राप्त कराए जाने हेतु निर्देशित किया गया है।  
अभियोजन अधिकारी /जिला शासकीय अधिवक्ता द्वारा ऐसे प्रार्थना पत्रों के संबंध में अपना पक्ष विहित अवधि नियमानुसार प्रस्तुत किया जाये। अधिवक्तागण/ वादकारी गण के सहायतार्थ नोडल ऑफिसर कंप्यूटर/सिस्टम ऑफिसर, कंप्यूटर अनुभाग को डिस्ट्रिक्ट कोर्ट वेबसाइट पर समर्पित हेल्पलाइन लैंडलाइन नंबर 0452 220060 एवं मोबाइल नंबर 63888 04685, 8858768282 प्रकाशित किए जाने और वाद सूची तथा टाइम स्लाट में वादों की लिस्टिंग की क्रियाविधि के संबंध में सूचना प्रशारित किये जाने हेतु अधिकृत एवं निर्देशित किया है।  सिस्टम आफिसर एवं कंप्यूटर कक्ष में कार्यरत अन्य कार्मिकों की वाद की सूची/अद्यतन स्थिति के निमित्त इ-कोर्टस एप के क्रियाशीलता के विषय में सूचित करने हेतु निर्देशित किया है जिससे उक्त सुविधा की जागरूकता में वृद्धि हो । संबंधित हितबद्ध पक्षकार एवं न्यायालय कर्मी के मध्य वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से सम्पर्क साझा करने के लिए सिस्टम आफिसर को क्रिया विधि/तंत्र विकसित किए जाने हेतु निर्देशित किया है।  न्यायालयों की क्रियाशीलता के संबंध में कार्यशैली/क्रिया विधि के परिप्रेक्ष्य में दीवानी न्यायालय अधिवक्ता संघ के पदाधिकारीगण के साथ विचार विमर्श किया जा चुका है।
 न्यायालय प्रक्रिया संचालानार्थ जेआइटीएसआइ वीडियो कांफ्रेंसिंग सॉफ्टवेयर का प्रयोग पूर्व दिनांक 06 अप्रैल 2021 से प्रभावी नोडल ऑफिसर कंप्यूटर को न्यायालयी कार्यवाही के संचालन हेतु संबंधित न्यायिक अधिकारी द्वारा विद्वान अधिवक्तागण/ अभियोजन से संपर्क हेतु वीडियो कांफ्रेंसिंग लिंक उपलब्ध कराये जाने हेतु न्यायालय निर्देशित किया गया है।
 इस प्रकार लिंक का उपयोग करते हुए विद्वान अधिवक्ता गण एवं अभियोजन पक्ष वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से संबंधित न्यायिक अधिकारीगण़ से जुड़ सकते है। नोडल ऑफिसर कंप्यूटर को प्रार्थना पत्रों के निस्तारण आदेशों के पारण/ अपलोडिंग, बन्धपत्रों की स्वीकृति तथा अवमुक्ति आदेश आदि के संबंध में स्थानीय क्रियाविधि/ तंत्र विकसित किए जाने हेतु कंप्यूटर अनुभाग के सक्षम कार्मिक को अधिकृत किए जाने हेतु निर्देशित किया गया है। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी /जौनपुर को न्यायिक कार्य के संपादनार्थ कारागार प्राधिकारीगण और अभियोजन के साथ आवश्यक समन्वय स्थापित करने हेतु निर्देशित किया गया है।  
अक्रियाशील सत्र न्यायालयों/विशेष न्यायालयों द्वारा परीक्षणीय मामलों से संबंधित विचाराधीन बंदियों के परिपेक्ष में वांछित न्यायिक कार्य/रिमांड कार्य बन्ध पत्रों के सत्यापन व रिहाई  परवाना प्रेषण आदि के कार्यों का क्रियान्वयन अपर जिलाधिकारी एवं सत्र न्यायाधीश द्वारा संपादित की जाएगी। आज 16 अप्रैल 2021 से 25 अप्रैल 2021 तक अशोक कुमार यादव,  26 अप्रैल 2021 से 02 मई 2021 तक रजनेश कुमार,  03 मई 2021 से 09 मई 2021  तक अंजनी कुमार सिंह, 10 मई 2021 से 16 मई 2021 तक अशोक कुमार सिंह अष्टम द्वारा निष्पादित की जायेगी।  17 मई 2021 से अग्रिम आदेश तक उपरोक्त के क्रम में 01-01 सप्ताह के लिए उपरोक्त न्यायिकधिकारीगण द्वारा उक्त न्यायिक कार्य निष्पादित किया जाता रहेगा। 
इस न्यायिक अधिकारीगण के अवकाश पर रहने की दशा में उनके प्रभारी अधिकारी द्वारा उपरोक्त कार्यो का निष्पादन किया जाएगा।
 मजिस्ट्रेट न्यायालयों द्वारा परीक्षणीय मामलों से संबंधित विचाराधीन बंदियों के परिपेक्ष में वांछित न्यायिक कार्य/ रिमांड कार्य, बद्व पत्रों के सत्यापन व रिहाई, परवाना प्रेषण आदि के कार्यों के क्रियान्वयन हेतु मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी को न्यायालय पर संचित भार के नियोजन एवं अत्यावश्यक विचाराधीन प्रकरणों की संख्या के दृष्टिगत स्वविवेकानुसार न्यायिक अधिकारी के मनोनयन/ अधिकृत किए जाने हेतु निर्देशित किया गया है । सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ,जौनपुर को हितबद्व पक्षकारों को न्यायालय की क्रियाविधि के संबंध में इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से , पैम्फलेटस्, मीडिया कवरेज तथा अन्य रीति से प्रचार प्रसार करते हुए जागरूकता उत्पन्न करने के लिए आवश्यक सहायता प्रदान किए जाने हेतु निर्देशित किया गया है। 
सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा प्रिंट मीडिया में अपील के माध्यम से न्यायालय कार्यवाही की संपूर्ण स्थानीय क्रिया-विधि के मुद्रण हेतु भी निर्देशित किया गया है। इस परिपेक्ष्य में सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा पैरालीगल वालेन्टियर से आवश्यक सहयोग लिया जा सकता है। सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जौनपुर द्वारा इस परिपेक्ष्य मेें आवश्यक उपक्रम सुनिश्चित करने के उददेश्य से सदस्य सचिव, उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को सूचित किया जा सकता है। अध्यक्ष/मंत्री, दीवानी न्यायालय अधिवक्ता संघ, जौनपुर से अपेक्षा की है कि इस महामारी के काल में न्यायालय परिसर में मात्र ऐसे विद्वान अधिकवक्तागण और वादकारीगण का न्यायालयिक कार्य में सम्मिलित होने की क्रियाविधि विकसीत करने का प्रयास करें, जिनका वाद अथवा मामलों उक्त तिथि को सुनवाई हेतु नियत हो ।
 न्यायालयी कार्य पूर्ण हो जाने की स्थिति में महामारी के दृष्टिगत विद्वान अधिवक्तागण से न्यायालय परिसर सें वापसी की अपेक्षा की जाती है। पीठासीन अधिकारी गण यह सुनिश्चित करें कि न्यायालय/ कार्यालय में 50 प्रतिशत से अनाअधिक न्यायालय कर्मचारीगण एक समय में कार्य निष्पादन हेतु प्रवेश ना करें। नोडल ऑफिसर कंप्यूटर को दैनिक आधार पर दैनिक आख्या सीपीसी कार्यालय माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद को प्रेषित किए जाने हेतु अधिकृत एवं निर्देशित किया है ।

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