भ्रष्टाचार के आरोप में कुलपति के विरुद्ध थाना इन्दिरानगर लखनऊ में एफआईआर दर्ज, एसटीएफ कर रही जांच


छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) कानपुर के कुलपति डा. विनय पाठक के खिलाफ बिल का भुगतान कराने के नाम पर जबरन रुपये वसूलने, धमकी, गाली गलौज और भ्रष्टाचार अधिनियम की धारा में इंदिरानगर थाने में एफआइआर दर्ज की गई है। जानकीपुरम निवासी डिजिटेक्स टेक्नोलाजी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के प्रबंध निदेशक डेविड मारियो डेनिस ने विनय पाठक के अलावा एक्सएल आइसीटी कंपनी के मालिक अजय मिश्रा को भी नामजद किया है।
आरोप है कि डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा में कुलपति रहते हुए डा. पाठक ने कंपनी की ओर से किए गए करोड़ों के काम का बिल पास करने के लिए 15 प्रतिशत कमीशन वसूला था। मामले की विवेचना लखनऊ पुलिस से एसटीएफ को सौंप दी गई है।

एसटीएफ ने कुलपति के सहयोगी अजय मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया है।
अजय के पास से 10 लाख रुपये और बीएमडब्ल्यू कार भी बरामद की गई है। पीड़ित ने एक करोड़ 41 लाख रुपये कमीशन दिए जाने का आरोप लगाया है। यह भी कहा है कि उसकी जान को खतरा है और कुछ भी दुर्घटना होने पर डा. पाठक इसके जिम्मेदार होंगे। पीड़ित का कहना है कि रजनीगंधा अपार्टमेंट गोखले मार्ग पर उनकी कंपनी है। कंपनी सत्र 2014-15 से डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा का प्री एवं पोस्ट परीक्षा से संबंधित कार्य कर रही है।

कंपनी सत्र 2019-20 तक आगरा विश्वविद्यालय के परीक्षा से संबंधित अनुबंध के तहत कार्य कर रही थी। वहीं, सत्र 2020-21 में यूपीएलसी के माध्यम से प्री एवं पोस्ट परीक्षा से संबंधित कार्य कर रही है। कंपनी के बिल का भुगतान आगरा विश्वविद्यालय में लंबित था। तब प्रो. विनय पाठक कुलपति थे। उनसे संपर्क कर बिल का भुगतान करने को कहा तो उन्होंने पीड़ित को कानपुर विश्वविद्यालय स्थित आवास पर बुलाया।

कहा कि बिलों के भुगतान में 15 प्रतिशत कमीशन चाहिए। असमर्थता जताई तो अपशब्द कहे और आगरा विश्वविद्यालय से कंपनी का काम हटवा देने की धमकी दी। कमीशन देने के लिए हामी भरी तो डा. पाठक ने अपने करीबी अजय मिश्रा से फोन पर बात कराई और भुगतान होते ही कमीशन पहुंचाने को कहा। बिल पास होने पर अजय मिश्रा के खुर्रम नगर स्थित आवास पर जाकर कमीशन के 30 लाख रुपये दे दिए।

अजय ने तीन लाख रुपये कम होने की बात कही और घर में बंधक बना लिया। किसी तरह वहां से निकलकर पीड़ित ने तीन लाख रुपये की व्यवस्था कर अजय को दे दिए। आरोप है कि इसी तरह अलग-अलग बिलों को पास करने के नाम पर आरोपित रुपये वसूलते रहे। पीड़ित का कहना है कि अजय मिश्रा ने इंटरनेशनल बिजनेस फार्म्स अलवर राजस्थान के बैंक खाते में करीब 73 लाख रुपये स्थानांतरित करवाए थे।


एफआइआर के मुताबिक सत्र 2022-23 का काम देने के नाम पर पीड़ित से 10 लाख रुपये कमीशन मांगा गया। इन्कार करने पर डा. पाठक ने यूपीडेस्को के माध्यम से अजय मिश्रा की कंपनी को काम दिलवा दिया। डा. पाठक ने ऊंची पहुंच की धमकी दी और कहा कि मैं ही कुलपति बनवाता हूं और आठ विश्वविद्यालयों में मैंने ही कुलपति बनवाया है। मुझे ऊपर तक पैसा देना पड़ता है।उधर, एसटीएफ साक्ष्य संकलन कर रही है। माना जा रहा है कि जल्द ही एसटीएफ और लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई करेगी। 

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