प्रधानी की राजनीति के चलते गांवो में प्रवासी मजदूरों को क्वारंटाइन करने में शक्ति नहीं, गांव में खुले घूम रहे हैं बाहर से आये लोग




जौनपुर । एक तरफ तो शासन प्रशासन से लेकर  जिले की आवाम कोरोना संक्रमण से जूझ रही है और ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना पाजिटिव मरीजों की संख्या में तेजी से बृद्धि हो रही है। वहीं दूसरी ओर गांव के प्रधान गण चुनावी राजनीति करने मे जुट गये है । जिसके कारण बाहर महानगरों से आने वाले प्रवासी मजदूरों को गांव के बाहर किसी सार्वजनिक स्थान पर क्वारंटाइन करने से परहेज कर रहे हैं। इतना ही नहीं उनके साथ कड़ाई से होम क्वारंटाइन का पालन भी नहीं करा रहे है। जो अत्यंत ही चिंता जनक स्थित है।
यहाँ  बतादे कि बाहर प्रान्तो एवं महानगरों से आने वाले प्रवासी मजदूरों के चलते जनपद के ग्रामीण इलाकों में कोरोना पाजिटिव मरीजों की संख्या में तेजी से बृद्धि हो रही है आज 22 मई को कोरोना संक्रमितो की संख्या में इतना उछाल आया कि पूरा जनपद सहम गया। जिले में कोरोना पाजिटिवो की संख्या 78 पहुंच गयी है। गत 11 मई से अब तक जितने भी कोरोना संक्रमित मरीज मिले हैं  सभी ग्रामीण क्षेत्रों के निवासी हैं तथा इसमें 90 प्रति.मुम्बई (महाराष्ट्र ) से आये हुए हैं।  इसके अलावा शेष  सूरत दिल्ली  हैदराबाद अहमदाबाद आदि स्थानों से आये हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम संक्रमितो का उपचार तो कर रही है लेकिन ग्राम प्रधानो की राजनीति के चलते इस महामारी में जो बृद्धि दृष्टिगोचर है वह पूरे समाज के लिए घातक होगी। 
बतादे इसी वर्ष में ग्राम प्रधानो का चुनाव होना है और बाहर महानगरों से आने वाले प्रवासी मजदूर गांव के मतदाता है ऐसे में प्रधान किसी को नाराज नहीं करना चाहता है क्योंकि जल्द ही उसे उनके वोट की जरूरत पड़ेगी । तो वह चाहे जैसे रहे प्रधान न उसकी सूचना थाना अथवा सरकारी तंत्र को दे रहा है न ही आये हुए प्रवासी मजदूर की कोई जांच कराने का दबाव बना पा रहा है। सच खबरें की टीम ने जनपद के लगभग एक दर्जन गांवो का सर्वे कराया तो पता चला कि गांव में डेढ़ से दो सौ प्रवासी मजदूर की आमद है।
 प्राथमिक विद्यालय अथवा गांव के बाहर बगीचे में बनाये गये क्वारेंटाइन सेन्टरो पर पांच से दस प्रवासी मजदूर नजर आ रहे हैं शेष सभी अपने घरों पर गांव वालों से मिलते जुलते रह रहे है। ऐसे लोगों से संक्रमण बढ़ने का खतरा लगातार बना हुआ है। यही नहीं खबर तो यह भी है कि कुछ स्थानों पर क्वारंटाइन सेन्टर में रहने वाले प्रवासी मजदूर दिन में भले ही सेन्टर पर दिखें लेकिन रात्रि विश्राम तो अपने घरों पर करते है। 
जिला प्रशासन ने बाहर से आने वालों को क्वारंटाइन सेन्टर में रखने और उनकी देख रेख  करने का दायित्व सम्बंधित थाना और ग्राम प्रधान को दे रखा है तो प्रधान चुनाव में वोट की लालसा लिए किसी से पंगा नहीं लेना चाहता है चाहे कोरोना फैले या न फैले उसकी  बला से, थानेदार भी बहुत सक्रिय नहीं नजर आ रहे हैं वह भी गांवो का एकाध चक्कर लगाने के बाद अपने जिम्मेदारी की इतिश्री कर लिये हैं।  
प्रवासी मजदूरों को लेकर ग्रामीण इलाकों में बरती जा रही लापरवाहीयों के संदर्भ में जिले के जिम्मेदार अधिकारियों से बात करने पर वे भी कोई ठोस जबाब नहीं दे रहे हैं। इससे इतना तो पता चला कि हर स्तर पर अब कोरोना को लेकर खाना पूर्ति ही नजर आ रही है। ऐसे में दावे के साथ कहा जा सकता है कि जिले का ग्रामीण इलाके की आवाम मौत के साये में जीवन जीने को मजबूर हैं। 

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