माता अन्नपूर्णा की मूर्ति प्राण-प्रतिष्ठित के साथ बाबा भोले के धाम में हुई पुनर्स्थापित सीएम रहे मौजूद


कार्तिक मास का सोमवार और देवोत्थानी एकादशी 2021 शिव की नगरी काशी के लिए खास दिन बन गया। श्रीकाशी विश्वनाथ धाम में मां अन्नपूर्णा की मूर्ति प्राण-प्रतिष्ठित हो गई। 108 साल पहले पहले काशी से चुराकर कनाडा ले जाई गई यह मूर्ति अन्नपूर्णा दरबार का हिस्सा बन गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रीकाशी विश्वनाथ दरबार के मंदिर में मूर्ति की पुनर्स्थापना की। इसके लिए मुख्यमंत्री रविवार रात वाराणसी आ गए थे।
उनकी मौजूदगी में सोमवार सुबह मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा की गई। इसका विधान श्रीकाशी विद्वत परिषद के निर्देशन में काशी विश्वनाथ मंदिर का 11 सदस्यीय अर्चक दल ने सुबह छह बजे शुरू कर दिया था। मुख्य अनुष्ठान में सुबह साढ़े नौ बजे खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यजमान बने। कनाडा से काशी पहुंची माता अन्नपूर्णा की प्राचीन मूर्ति को बाबा विश्वनाथ के विशेष रजत सिंहासन पर विश्वनाथ धाम में प्रवेश कराया गया।  
मां अन्नपूर्णा की रजत पालकी को सीएम योगी ने कंधा देकर मंदिर परिसर में प्रवेश कराया। प्राण-प्रतिष्ठा के बाद महाभोग अर्पित कर महाआरती की गई। मूर्ति स्थापना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाबा दरबार में हाजिरी लगाई। जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक कर बाबा से आशीर्वाद मांगा। जनकल्याण के भावों से बाबा का पूजन अर्चन कर वहां से रवाना हुए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि मां अन्नपूर्णा की प्रतिमा 108 साल बाद एक बार फिर से काशी में स्थापित हुई है। वाराणसी के सांसद और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों के कारण यह संभव हो पाया। सीएम योगी ने काशीवासियों की ओर से पीएम मोदी को धन्यवाद अर्पित किया। 
काशी विश्वनाथ धाम में माता अन्नपूर्णा की प्रतिमा को स्थापित करने के लिए मुख्य यजमान के रूप में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मौजूद थे। इसके पहले मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने पूजा-पाठ की कमान संभाली थी।  जानकारी के मुताबिक, राजोपचार विधि के साथ माता अन्नपूर्णा की इस प्रतिमा की स्थापना की गई है।
पूजन और अनुष्ठान के दौरान कई नेताओं के अलावा काशी के संतों और महंतों की भी मौजूदगी परिसर में बनी रही। पूजन और अनुष्ठान के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संतों से बातचीत कर उनका कुशलक्षेम भी पूछा।  
काशी विश्वनाथ मंदिर में मंगला आरती के बाद शुरू हुए अनुष्ठान में गणेश-अंबिका पूजन के साथ ही कलश स्थापना इत्यादि पूरी करने के बाद माता अन्नपूर्णा की प्रतिमा को अपने स्थान पर स्थापित किया गया। देवाधिदेव महादेव की नगरी में माता अन्नपूर्णा का आना और माता अन्नपूर्णा की स्थापना होना अपने आप में अद्भुत है।
बहुप्रतीक्षित मां अन्नपूर्णा की मूर्ति सोमवार सुबह दुर्गाकुंड स्थित माता कुष्मांडा मंदिर पहुंची। यहां से साज-श्रृंगार करके आगे बाबा दरबार के लिए रवाना किया गया। इसके बाद प्रतिमा सोनारपुरा, मदनपुरा, जंगम बाड़ी तक हर-हर महादेव और मां के जयकारे के बीच अपने गंतव्य बाबा काशी विश्वनाथ धाम पहुंची। जगह-जगह लोगों ने आरती उतारी और पुष्पवर्षा की। 
इस शुभ मौके पर बाबा दरबार में मुख्यमंत्री के अतिरिक्त वीआइपी और वीवीआइपी लोग भी मौजूद रहे। बाबा दरबार में अन्नपूर्णां के आगमन की खुशियां चहुंओर नजर आईं। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच माता की तय स्थान ईशान कोण में स्थापना हुई तो माहौल दिव्य नजर आया। 
कनाडा से लाई गयी मां अन्नपूर्णा की मूर्ति 108 साल बाद रविवार देर रात काशी लौटी। जौनपुर से वाराणसी जिले में प्रवेश करते हुए पिंडरा में मां का स्वागत किया गया। देर रात के साथ सर्दी का असर बढ़ा लेकिन मां के स्वागत के लिए भक्तों में गर्मजोशी बनी रही। तय समय से घंटों विलंब से पहुंचते ही कोई गुलाब की पंखुड़ियां तो कोई माला लेकर पहुंचा।
मान्यता है कि बाबा विश्वनाथ ने काशी समेत पूरी दुनिया का पेट भरने के लिए बाबा ने मां अन्नपूर्णा से ही भिक्षा मांगी थी। मां अन्नपूर्णा को अन्न-धन की देवी कहा जाता है। माता का स्वरुप भक्तों को भरपेट भोजन और अन्न से परिपूर्ण रहने के आशीष का प्रतीक है।
पिछले साल 29 नवंबर को प्रधानमंत्री मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में बताया था कि लगभग एक सदी पहले भारत से चुराई गई देवी अन्नपूर्णा की एक प्राचीन मूर्ति को कनाडा से वापस लाया जा रहा है।
काशी विश्वनाथ धाम परिसर का निर्माण भी अब लगभग पूरा होने की ओर है। 80 फीसदी से ज्यादा काम हो चुका है। वाराणसी दौरे पर  पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार देर रात काशी विश्वनाथ धाम में जारी निर्माण कार्यों का जायजा लिया। उन्होंने तय समय में काम पूरा करने का निर्देश दिया। 

 

 

 

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