जौनपुर पुजारी हत्याकांड: हाईकोर्ट ने सीबीआई को लगायी कड़ी फटकार, अभी तक आरोपी की गिरफ्तारी क्यों नहीं


जौनपुर। थाना बक्शा में पुलिस की अभिरक्षा में कृष्णा यादव उर्फ पुजारी की मौत के मामले में लगातार सीबीआई जांच की मानीटरिंग कर रही हाईकोर्ट ने आरोपी पुलिस अधिकारियों की गिरफ्तारी के मामले को लेकर घटना की जांच कर रही सीबीआई को कड़ी फटकार लगाई है। सीबीआई टीम पर आरोप है कि हत्या के आरोपी पुलिस अधिकारियों की गिरफ्तारी हेतु ठोस प्रयास नहीं किया गया है।इस मुद्दे को गम्भीरता से लेते हुए हाईकोर्ट टिप्पणी करते हुए कहा है कि सीबीआइ जांच का तरीका कोर्ट को सीबीआई अधिकारी को तलब कर कड़े आदेश देने को विवश करने वाला है। फिर भी कोर्ट उन्हें सही जांच कर सीजेएम द्वारा दो माह पहले जारी गैर जमानती वारंट को अमल में लाने का एक मौका दे रही है।

हाईकोर्ट ने कहा कि सीबीआई आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कुर्की जब्ती आदि कार्यवाही सहित सभी कानूनी उपाय अभी तक क्यों नहीं किया। हाईकोर्ट ने सीबीआई से इस कथन का स्पष्टीकरण मांगा है कि क्या जांच पूरी होने के बाद ही गिरफ्तारी की जायेगी। साथ ही 29 नवंबर 21 को सील बंद लिफाफे में विवेचना की प्रगति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति एसपी केसरवानी तथा न्यायमूर्ति विकास की खंडपीठ ने अजय कुमार यादव की याचिका पर दिया है। इस मामले में उल्लेखनीय है कि सीजेएम जौनपुर ने आरोपी पुलिस अधिकारियों की गिरफ्तारी के लिए 6 सितम्बर 21 को गैर जमानती वारंट जारी किया है। राज्य सरकार का कहना है कि आरोपी फरार है। सीबीआइ ने कहा जांच पूरी हो जाए फिर गिरफ्तार करेंगे।

गैर जमानती वारंट जारी किये जाने के दो माह बीत चुके हैं लेकिन आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया गया। कोर्ट ने सीबीआइ के हलफनामे पर असंतोष जाहिर किया। हलफनामे में आरोपी पुलिस अधिकारियों व संदिग्धों का पूरा ब्यौरा दिया गया है। हलफनामे में कहा गया है कि गिरफ्तारी के प्रयास किये जा रहे हैं। दबिश डाली जा रही है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि एक तरफ तो जांच पूरी होने पर गिरफ्तार करने की बात की जा रही है। वहीं पर दूसरी तरफ गिरफ्तारी के लिए दबिश डालने  की बात कही  जा रही है। जो कार्यप्रणाली पर शक पैदा करता है। स्थिति साफ होनी चाहिए। सीबीआइ के गिरफ्तारी के प्रयास केवल कागजी है। ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। इस मामले में अगली सुनवाई 29 नवंबर को होगी। नीयत तिथि पर सीबीआई विस्तृत जानकारी कोर्ट को उपलब्ध कराये। 

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