कामयाबी के लिए चाहिए नया नजरिया और उम्दा क्रिएशन

अशोका इंस्टीट्यूट में ‘क्रिएटिव रीफ’ के संस्थापक सौरभ टिमोचिन का का व्याख्यान
वाराणसी। देश के जाने-माने उद्यमी एवं क्रिएटिव रीफ के संस्थापक सौरभ टिमोचिन ने कहा कि कामयाबी के लिए क्रिएशन व नया नजरिया जरूरी है और इसका कोई शार्टकट नहीं होता। किसी भी उद्यम की सफलता उसकी सृजनात्मकता (क्रिएटिविटी) पर निर्भर करती है। सृजन एक मानसिक प्रक्रिया है जिसमें नए विचार, उपाय अथवा कांसेप्ट का जन्म होता है। इसमें मौलिकता और सम्यकता, दोनों गुण मौजूद होते हैं। सृजन का महत्व तभी है जब उसमें मौलिकता का बोध हो।
श्री टिमोचिन शुक्रवार को अशोका इंस्टीट्यूट आफ टेक्नालाजी एंड मैनेजमेंट एवं अशोका स्कूल आफ बिजनेस के एमबीए, बीबीए और बीकाम के स्टूडेंट्स को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि उस सृजनात्मकता का कोई मतलब नहीं है जिसे तीन सेकेंड के अंदर न समझा सके। घंटों लेक्चर देने से अच्छा यह है कि हम अपनी बातों को कम शब्दों में, लेकिन प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करें। उन्होंने कहा कि हर चीज में हमें कुछ नए तरीके से सोचना और सीखना चाहिए, तभी आप भीड़ से अलग दिखेंगे। आप दूसरों पर तभी गहरा प्रभाव छोड़ पाएंगे जब आप अपनी बात को सरल और सामान्य ढंग से प्रस्तुत करेंगे। जीवन में मोटिवेशन का बहुत महत्व होता है। यह हमें प्रेरित करता है कि हम जीवन में कुछ अलग करें। भीड़ से हटकर अपनी पहचान बनाएं। आपके सृजनात्मकता का लोग तभी लोहा मानेंगे जब उसे आप आधुनिक और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करेंगे।
अशोका इंस्टीट्यूट के स्टूडेंट्स को प्रजेंटेशन देने का गुर सिखाते हुए सौरभ टिमोचिन ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बातों को सबसे पहले प्रस्तुत करें। उससे जुड़ी अन्य बातों को तभी प्रस्तुत करें, जब उसकी जरूरत हो। उन्होंने कहा कि प्रजेंटेशन में कलर और फांट का विशेष ध्यान रखना चाहिए। लंबा प्रजेंटेशन किसी काम का नहीं होता। किसी भी वक्ता का प्रजेंटेशन 50 मिनट से ज्यादा लंबा होने पर लोग ऊबने लगते हैं। मौजूदा दौर में हर कोई अपना काम निकालना चाहता है। बहुत से लोग मतलब निकल जाने के बाद बात करना ही बंद कर देते हैं, लेकिन जो लोग ऐसा करते हैं वो कामयाब नहीं हो पाते। किसी भी उपक्रम में रचनात्मकता और नवीनता दो सबसे मूल्यवान तत्व हैं। यह न केवल व्यवसाय शुरू करने में मदद करता है, बल्कि यह भी परिभाषित करता है कि व्यवसाय कैसे बढ़ता है और समय के साथ कैसे विकसित होता है? उच्च स्तर की सृजनात्मकता व्यक्ति की व्यावसायिक यात्रा के हर चरण में मदद करती है। सृजन और प्रबंधन कौशल का महत्व तभी है जब आपके अंदर जुनून होगा। क्रिएटिविटी का जुनून न केवल व्यवसाय शुरू करने में मदद करता है, बल्कि यह भी परिभाषित करता है कि किसी भी व्यवसाय कैसे बढ़ाया जा सकता है?
जटिल विचारों को बेहद सरल तरीके से व्यक्त करने का गुर सिखाते हुए श्री टिमोचिन ने कहा कि अपने आइडिया को नए तरीके से प्रस्तुत करें, तभी वह प्रभावशाली होगा। क्रिएटिविटी का हर क्षेत्र में महत्व होता है। कम्युनिकेशन, प्रजेंटेशन और मोटिवेशन की सार्थकता तभी है संयुक्त रूप से इसके लिए सार्थक प्रयास किया जाए। अत्यधिक प्रतिस्पर्धा और अर्थहीन सामग्री के युग में किसी संस्था अथवा प्रोडक्ट को ब्रांड बनाना आसान नहीं है। किसी भी लक्ष्य की कामयाबी के लिए चाहिए नया नजरिया, सकारात्मक सोच और दृढ़ विश्वास। जटिल विचारों को सरल तरीके से व्यक्त करने की इच्छा व्यक्ति को कामयाब बनाती है। हमेशा सपनों में विश्वास ढूंढने की कोशिश की जानी चाहिए। कला के माध्यम से कम्युनिकेशन ज्यादा प्रभावी रहता है। टीम भावना से काम करना और सफलता के लिए लचीना दृष्टिकोण रखना कामयाबी का सबसे बड़ा मंत्र है।
अशोका इंस्टीट्यूट की निदेशक डा.सारिका श्रीवास्तव ने सौरभ टिमोचिन को पुष्पगुच्छ और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। इससे पहले इंस्टीट्यूट पहुंचने पर एमबीए, बीबीए और बीकाम के विभागाध्यक्ष राजेंद्र तिवारी ने उनका स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन एमबीए की उप विभागाध्यक्ष शर्मिला सिंह ने और धन्यवाद ज्ञापन प्रीति राय ने किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में रचना सिंह,  पल्लवी सिंह, अमित सिंह, अशोक कुमार, सारस्वत  राय, आदित्य सिंह यादव, विशाल गुप्ता आदि ने सहयोग दिया।

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