शीत कालीन सत्र में जातीय जनगणना के मुद्दे पर सरकार पर सीधा होगा हमला,जानें सपा के साथ कौन दल इस मुद्दे पर रहेंगे साथ



विधानमंडल के शीतकालीन सत्र के लिए विपक्षी दल जब कमर कस रहे होंगे तो सदन में सरकार पर तीखा हमला करने के लिए उनके तरकश में जातिवार जनगणना का तीर सबसे पैना होगा। मंगलवार 28 नवम्बर से शुरू होने वाले शीतकालीन सत्र के दौरान विपक्षी दल सरकार को जातिवार जनगणना के मुद्दे पर घेरने की भरपूर कोशिश करेंगे।
जातिवार जनगणना के मुद्दे पर मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी पहले भी मुखर रही है लेकिन बीते अक्टूबर में बिहार सरकार की ओर से जाति आधारित सर्वेक्षण के नतीजे सार्वजनिक किए जाने के बाद सपा इस मुद्दे को लेकर आक्रामक हो गई है। शीतकालीन सत्र बिहार में हुए जाति आधारित सर्वे के नतीजे सामने आने के बाद उप्र विधानमंडल का पहला सत्र होगा।
लिहाजा विपक्ष सदन के अंदर इस मद्दे को लेकर सरकार की घेराबंदी की पुरजोर कोशिश करेगा। उसकी कोशिश होगी कि वह सदन के भीतर सरकार पर दबाव बनाकर प्रदेश में जातिवार जनगणना के लिए माहौल बनाए। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभाने वाले सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव बिहार के जाति सर्वेक्षण आंकड़ों को सामाजिक न्याय का गणितीय आधार बताकर पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक (पीडीए) की लामबंदी का राग छेड़ चुके हैं।

कांग्रेस भी जातीय जनगणना के मुद्दे को हवा दे रही है। कांग्रेस कार्यसमिति पार्टी के सत्ता में आने पर जातिवार जनगणना कराने के साथ ही आरक्षण की 50 प्रतिशत की सीमा को हटाने के लिए कानून लाकर पिछड़ा वर्ग तथा अनुसूचित जाति/जनजाति को जनसंख्या के आधार पर भागीदारी देने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित कर चुकी है।

पार्टी ने कांग्रेस शासित राज्यों में जातिवार जनगणना कराने के साथ इसके लिए भाजपा पर दबाव बनाने का भी इरादा जताया है। ऐसे में शीतकालीन सत्र के दौरान पार्टी सदन में इस मुद्दे के बहाने सरकार को घेरने का मौका नहीं गंवाना चाहेगी। वहीं बसपा सुप्रीमो मायावती भी बिहार की तर्ज पर उप्र में जातिवार जनगणना की मांग करने के साथ यह कह चुकी हैं कि पिछड़ों और दलितों को उनका वाजिब हक तभी मिलेगा जब केंद्र सरकार राष्ट्रीय स्तर पर यह जनगणना कराएगी।
गौरतलब है कि अगस्त में हुए विधानमंडल के मानसून सत्र में भी विपक्ष ने दोनों सदनों में यह मुद्दा उठाया था लेकिन तब सरकार की ओर से विधानसभा में लिखित जवाब दिया गया था कि जातिवार जनगणना कराने का उसका कोई इरादा नहीं है और यह केंद्र सरकार का अधिकार क्षेत्र है।

हालांकि इस बीच जातिवार जनगणना के मुद्दे पर भाजपा ने भी अपने रुख में नरमी लाई है।
बीते दिनों छत्तीसगढ़ में चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि भाजपा जातिवार जनगणना की विरोधी नहीं है लेकिन इस पर व्यापक चर्चा की पक्षधर है। इन परिस्थितियों में विपक्ष सरकार को घेरने के लिए जोर लगाएगा। भाजपा के सहयोगी अपना दल (एस) और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी भी जातिवार जनगणना की लगातार हिमायत करते रहे हैं।

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