राजभर के बयान पर सियासी हलचल, आखिर मुख्तार के कट्टर शत्रु बृजेश के पक्ष में क्यों?भाजपा की ओर से जानें क्या आयी प्रतिक्रिया,


लोकसभा चुनाव में सुभासपा के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर के द्वारा माफिया बृजेश सिंह को गाजीपुर लोकसभा सीट से प्रत्याशी बनाये जाने का बयान आने के तुरंत बाद ही भाजपा की ओर से प्रतिक्रिया भी जारी हो गई है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी ने बयान जारी करते हुए कहा कि भाजपा में किस सीट से कौन चुनाव लड़ेगा इसका निर्णय पार्टी का पार्लियामेंट्री बोर्ड तय करेगा। बोर्ड के निर्णय के बाद ही आगे की कार्यवाही होती है। भाजपा में किसी एक व्यक्ति के टिकट पर फैसला नहीं होता है। 
हलांकि राजभर ने सच खबरें से फोन पर बातचीत के दौरान कहा था कि बृजेश की भाजपा के नेताओं से टिकट को लेकर बात चल रही है। यदि सहमति बन गई तो बृजेश गाजीपुर से सुभासपा के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे। यहां यह भी बता दें सरकार की ओर से विगत दिनों माफियाओं की एक सूची की गई है जिसमें बृजेश का भी नाम दर्ज है।
ध्यान देने वाली बात यह भी है कि विगत विधानसभा चुनाव 2022 में सपा के साथ गठबंधन के बाद सुभासपा ने माफिया मुख्तार के बेटे अब्बास अंसारी को मऊ से चुनाव लड़ाया था। सपा से गठबंधन टूटने के बाद ओमप्रकाश राजभर ने कहा था कि सपा के कहने पर उन्होंने अब्बास को टिकट दिया।अब लोकसभा चुनाव में राजभर मुख्तार के सबसे बड़े दुश्मन बृजेश सिंह को गाजीपुर से चुनाव लड़ाने के लिए बयान बाजी कर रहे हैं। गाजीपुर से माफिया मुख्तार के भाई अफजाल अंसारी सांसद थे। 2019 लोकसभा चुनाव में उन्होंने बसपा के टिकट से चुनाव लड़कर भाजपा के मनोज सिन्हा को हराया था। लेकिन अफजाल को सजा होने से उनकी लोकसभा सदस्यता रद्द हो गई है। गाजीपुर में उप चुनाव नहीं हुआ है। इस सीट पर मुख्तार का गढ़ माना जाता है।
दरअसल, बृजेश सिंह सिकरारा नरसंहार कांड में हाल ही में इलाहाबाद उच्च न्यायालय से दोषमुक्त हुए हैं। बरी होने के बाद उनके चुनाव लड़ने की दावेदारी को बल मिला है। बृजेश की पत्नी अन्नपूर्णा सिंह विधान परिषद में स्थानीय निकाय क्षेत्र की वाराणसी- भदोही- चंदौली सीट से निर्दलीय सदस्य हैं।
यहां पर एक बात और भी बता दें कि  विगत 
विधानसभा के चुनाव में भाजपा की सहयोगी निषाद पार्टी ने जौनपुर से बाहुबली नेता धनंजय सिंह को प्रत्याशी बनाने का प्रस्ताव दिया था। लेकिन भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने सिरे से प्रस्ताव को खारिज करते हुए इसकी सहमति नहीं दी थी।

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