नोडल अधिकारी को अस्पताल में मिली समस्यायें फिर भी आल इज वेल हो गया, अधिकारी मस्त मरीज त्रस्त


जौनपुर। सचिव चिकित्सा एवं शिक्षा विभाग उत्तर प्रदेश शासन एवं नोडल अधिकारी जनपद जौनपुर जी.एस. प्रियदर्शी के द्वारा जनपद आगमन पर आज जिला अस्पताल एवं महिला अस्पताल का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण में अधिकारी को मिली बड़ी खामियां एवं अस्पताल अधिकारी की लापरवाहियां नोडल अधिकारी ने पहले जतायी नाराजगी फिर आल इज ओके कर निकल गये। 
खबर है कि म राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सा केंद्र में मरीजों के बैठने की व्यवस्था न होने पर नाराजगी तो व्यक्त की फिर डॉक्टर संजीव कुमार का अटैचमेंट निरस्त करने के निर्देश दिए। अस्पताल परिसर की जर्जर पुरानी बिल्डिंग को निष्प्रयोज्य कराने के निर्देश सीएमएस डॉ. ए.के. शर्मा को दिया। नोडल अधिकारी ने अधूरे बिल्डिंग के संबंध में जानकारी प्राप्त की और निर्देशित किया कि जांच कर कार्य पूर्ण कराया जाए।
इसके बाद योग वैलनेस सेंटर का शौचालय गंदा मिला जिस पर नाराजगी व्यक्त करते हुए सही कराने का निर्देश दिए। नोडल अधिकारी के द्वारा आरटीपीसीआर लैब का निरीक्षण किया गया और तैनात कार्मिकों के संख्या के बारे में जानकारी प्राप्त की। लैब टेक्नीशियन द्वारा बताया गया कि प्रतिदिन 700 लोगो की जांच की जा रही है।
पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती शिशु सृष्टि के अभिभावक से अस्पताल द्वारा दी जा रही सुविधाओं के संबंध में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने पूछा कि इलाज से वे संतुष्ट हैं कि नहीं जिस पर मरीज के अभिभावक द्वारा समस्यायें बतायी गयी फिर भी कोई निर्देश नहीं, डेंगू वार्ड में बैठने हेतु कुर्सी की व्यवस्था नहीं मिली तो व्यवस्था कराए जाने हेतु निर्देश देकर चल दिये।
नोडल अधिकारी द्वारा भर्ती मरीज हरीश चंद्र उपाध्याय से अस्पताल के द्वारा किए जा रहे हैं इलाज के संबंध में जानकारी ली गयी। नोडल अधिकारी ने निर्देश दिया कि महिलाओं के लिए अलग से डेंगू वार्ड बनाया जाए। जिसके बाद नोडल अधिकारी ने ब्लड बैंक के निरीक्षण के दौरान ब्लड सेपरेटर मशीन की उपलब्धता के संबंध में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने पूंछा कि कितने दिनों के अंतराल में रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाता है। अस्पताल के अधिकारी कागजी बात किये, नोडल अधिकारी द्वारा निर्देशित किया गया कि ब्लड बैंक में रिक्त पदों की जगह भर ली जाए। इस दौरान ब्लड स्टोरेज कक्ष में मलेरिया किट, डेंगू किट की उपलब्धता के संबंध में जानकारी प्राप्त की।
दवा वितरण कक्ष के निरीक्षण के दौरान दवा लेने आए मोहम्मद अरशद और जय शंकर से पूछा कि डॉक्टर बाहर की दवा तो नहीं लिखते हैं जिस पर उनके द्वारा बताया गया कि अस्पताल से ही दवा दी जा रही है। लेकिन सच से दूर रहे कि बाहर मेडिकल स्टोर के लोग अस्पताल के चिकित्सकों बदौलत ही तो फल फूल रहे है। इसकी तह में जाने की जरूरत नहीं महसूस किये।
फीवर हेल्प डेस्क पर क्लीनिक स्टाफ रखे जाने हेतु निर्देश सीएमएस डॉक्टर ए.के. शर्मा को दिये और ओपीडी के निरीक्षण के दौरान पाया कि अस्पताल में भीड़ ज्यादा लग रही है, जिस पर सीएमएस को निर्देश दिया कि कुछ लोगों को ऊपर के तल पर बैठाने की व्यवस्था की जाए। नोडल अधिकारी द्वारा सीएमएस को निर्देशित किया गया कि जिला अस्पताल में बैठने वाले डॉक्टर इलाज से संबंधित सभी उपकरण के साथ ही बैठे। बन्द पड़ी लिफ्ट को देखकर उन्होंने सीएमएस को निर्देशित किया कि लिफ्ट तत्काल चालू किया जाए। लेकिन सच यह है कि मरीजो के लिए बनी लिफ्ट पर आज तक मरीज नहीं चढ़ सका है। 
आदेश दिया कि रेडियोलॉजिस्ट की कमी को पूर्ण करने की कार्यवाही की जाए। सेंट्रल लैब के निरीक्षण के दौरान कहा कि थायराइड की मशीन बिगड़ी मिली उसको एक सप्ताह में चलाएं जाना सुनिश्चित करने को कहा तथा महिला वार्ड में बेड पर पर्दा लगाया जाए। बच्चों का वजन नियमित रूप से नापा जाए। नोडल अधिकारी के द्वारा पीकू वार्ड का भी निरीक्षण किया गया।
इस तरह पूरा अस्पताल समस्याओ और अव्यवस्थाओ से युक्त मिला नोडल अधिकारी जिम्मेदारो पर कार्यवाई करने के बजाय मौखिक निर्देश देते हुए आल इज ओके कर निकल गया फिर व्यवस्था पूर्ववत हो गयी और अस्पताल के अधिकारी मस्त हो गये है। इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी जीएसबी लक्ष्मी, जिला अर्थ एवं संख्या अधिकारी आर डी यादव सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहें।

                                                         

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