वनस्पतियों का मानव जीवन होता है अटूट संबंध - डा अनीता सिंह




जौनपुर। डाक्टर अनीता सिंह द्वारा बदलते जीवन शैली में पर्यावरण पर अपने विचार वक्त किये गए जिसके अंतर्गत उन्होंने कहा कि पर्यावरण हम सब के लिए ईश्वर द्वारा प्रदान किया गया अमूल्य उपहार है l जो हमारे समाज का एक महत्वपूर्ण और अभिन्न अंग है lप्रकृति के द्वारा प्रदान किए गए अमूल्य भौतिक तत्वों जैसे पृथ्वी, जल ,आकाश, वायु एवं अग्नि से मिलकर पर्यावरण का निर्माण हुआ हैl पर्यावरण संरक्षण से तात्पर्य है lपर्यावरण की सुरक्षा करनाl  वनस्पतियों का हमारे जीवन से बहुत अटूट संबंध होता हैl हम किसी न किसी रूप से इन पर आश्रित होते हैंl जिन पर हम आश्रित हैं उनकी सुरक्षा करना और उन्हें संरक्षण प्रदान करना हमारा परम कर्तव्य है।
 मानव जीवन और पर्यावरण एक दूसरे की पूरक कहे जा सकते हैं क्योंकि पर्यावरण में यदि कोई हलचल होती है तो इसका सीधा प्रभाव मनुष्य वह पेड़ पौधों पर पड़ता है अतः स्वच्छ पर्यावरण से ही हमारा स्वास्थ्य भी उत्तम रहता है लेकिन पर्यावरण को स्वच्छ बनाने का काम किसी एक व्यक्ति का नहीं है बल्कि इसमें संपूर्ण परिवार और आसपास के सभी लोगों को आपस में मिलकर योगदान देने की आवश्यकता हैl जैसा कि हम सभी जानते हैं कि हमारा जीवन जल पर निर्भर है इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है lप्राचीन काल से जल प्रभावों का निकट मानव बस्तियां विकसित हुआ करती थी परंतु औद्योगिकीकरण के कारण  कूड़ा कचरा के गलत निस्तारण के कारण  हमारी पवित्र नदियां प्रदूषित हो रही हैंl इन नदियों का प्रयोग करने पर लाखों लोग  व्याधियों का शिकार हो रहे हैं l इसी तरह हमारे गांव में प्रायः अज्ञानता के का जल प्रदूषित हो रहा है।  इन तालाबों का पानी घर में पीने के लिए या खाना बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है तो दस्त हैजा, पीलिया व कृमि रोग जैसी घातक बीमारियां फैलती है पानी की उचित निकासी का प्रबंध न होने के कारण बरसात में जगह-जगह पानी जमा हो जाता है इससे मच्छरों का जन्म होता है जिससे मलेरिया, फाइलेरिया, डेंगू आदि  बीमारियां। पनपती है। तो आप सभी छात्र छात्राएं इस समय एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में आगे आकर सहयोग प्रदान कर सकते हैं, जैसे गांव में मौजूद तालाबों की स्वच्छता के बारे में लोगों को ज्ञान प्रदान करके और पानी की उचित निकासी के लिए पक्की नालियों का प्रबंध करवाकर तथा वर्षा जल के संग्रहित करने के तरीके बता कर। यदि गांव में हैंडपंप उपलब्ध हो और कुएं के पानी को कैसे इस्तेमाल करें, उसके बारे में जागरूक कर सकती हैं क्योंकि ऐसा करने से लगभग 50% दूषित जल से होने वाली बीमारी का स्वता ही निस्तारण हो जाता है। वायु प्रदूषण को रोकने के लिए तथा वातावरण को शुद्ध बनाने के लिए आप सभी छात्र छात्राएं अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने के बारे में स्थानीय लोगों को जानकारी प्रदान कर सकते हैं वर्तमान समय में जब कोविड-19 की महामारी से पूरा विश्व परेशान है पिछले कुछ ही दिनों में हमारे देश में भी ऑक्सीजन की कमी के कारण कई लोगों को मौत ने गले लगा लिया है l जो अत्यंत दुखद रहा हैl इस ऑक्सीजन की कमी को हम सब मिलकर पूरा करने में अपना सहयोग प्रदान कर सकते हैं तथा आसपास पांच-पांच पौधे पीपल और नीम के लगाकर योगदान दे सकते l ये पौधे लगातार ऑक्सीजन प्रदान करते हैं जिससे वातावरण शुद्ध होता है और हम सभी सर्वश्रेष्ठ रहते हैं इस प्रकार पर्यावरण के संरक्षण से आप सभी छात्र छात्राएं अपना अमूल्य योगदान प्रदान कर सकते हैं।

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