जल संरक्षण को लेकर बैठक में डीएम मनीष कुमार वर्मा ने सभी को दिया यह शख्त निर्देश


जौनपुर।जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने भूगर्भ जल सप्ताह कार्यक्रम के तहत आयोजित बैठक में कहा कि किसान भाई पानी की बचत करें, फसलों की सिंचाई क्यारी बनाकर करें, सिंचाई की नालियों को पक्का करें या कैनवास/पी0वी0सी0 पाइप का प्रयोग करें, बागवानी की सिंचाई हेतु ड्रिप विधि व फसलों हेतु स्प्रिंकलर विधि अपनाएं, पेड़ पौधों की फसलों की सिंचाई आदि में आवश्यकतानुसार ही पानी का प्रयोग करें, बगीचे में पानी सुबह ही दे ताकि वाष्पीकरण से होने वाला नुकसान कम किया जा सके। जल की कमी वाले क्षेत्रों में ऐसी फसलें बोयें जिसमें कम पानी की आवश्यकता हो, अत्याधिक भूजल गिरावट वाले क्षेत्रों में फसल चक्र में परिवर्तन कर अधिक जल खपत वाली फसलें न उगाई जाए। खेतों की मेड़ों को मजबूत व ऊॅचा करके खेत का पानी खेत में रिचार्ज होने दे।  
इसी क्रम में उन्होने कहा कि उद्योगों/व्यवसायिक क्षेत्रों में भी जल की बचत करें, जिसमें औद्योगिक प्रयोग में लाए गए जल का शोधन करके उसका पुनः उपयोग करें, मोटर गैराज में गाड़ियों की धुलाई से निकले जल की सफाई करके पुनः प्रयोग में लाएं। वाटर पार्क तथा होटल में प्रयुक्त होने वाले जल का उपचार करके बार बार प्रयोग में लाएं। होटल, निजी अस्पताल, नर्सिंग होम व उद्योग आदि वर्षा जल का संग्रहण कर टॉयलेट व गार्डेनिंग में उस पानी का प्रयोग करें तथा उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के लिए वर्षा जल संचय की उपयुक्त तकनीकें जैसे - तालाब, जलाशय, नए तालाबों का निर्माण, पुराने तालाबों का जीर्णोद्धार, गली/नाला, प्लगिंग, रिचार्ज कूप, फालतू जल हेतु रिचार्ज पिट आदि उपयोग जल संचय हेतु करें।
जिलाधिकारी ने कहा कि  जलसंरक्षण के कार्यों का ही परिणाम है कि आज जनपद में मात्र दो विकास खंड ही क्रिटिकल श्रेणी में रह गए हैं परंतु हम सभी को अभी भी लगातार उत्साह पूर्वक कार्य करने की आवश्यकता है।  अतः हम सभी को  जनमानस में जागृत  करते हुए दुगनी लगन से कार्य  करने की आवश्यकता है।
उन्होने निर्देशित किया गया कि रोजमर्रा के घरेलू कार्यों में जल की बचत करें, दंत मंजन करते, दाढ़ी बनाते समय नलो/टोटी को कम से कम खोलें और जग का इस्तेमाल करें, बर्तनों को माजते समय नल बंद रखें, जब धुलाई करनी हो तब यह नल को खोलें, जल की धार हमेशा धीमी रखें और टपकते नलों को तुरंत ठीक कराएं। गाड़ी की धुलाई पाइप लगाकर न करें, बल्कि बाल्टी में पानी लेकर गाड़ी साफ करें, घर के आगे की सड़कों को अनावश्यक पानी से न धोए। सार्वजनिक नलों में लीकेज देखें तो उसकी शिकायत जल संस्थान को करें। कम पानी की खपत वाली फ्लश सिस्टम का प्रयोग करें, इससे 10 लीटर पानी बचेगा, रसोई में ताजा पानी भरने की प्रवृत्ति छोड़ संग्रहित पानी का पूरा इस्तेमाल करें, पानी की टंकी में वाल्व अवश्य लगाएं और पानी को ओवरफ्लो न कराएं, घर के सदस्यों को पानी बचाने की शिक्षा जरूर दें। ध्यान रखें कि अनावश्यक जल की बर्बादी अथवा टपकना एवं ऋणात्मक ऊर्जा उत्पन्न करता है, जो आपके मन में मस्तिष्क को भी प्रभावित करता है, जल, उर्जा एवं धन की बचत का आशय है कि उसे दूसरों के हित में साधन में लगाना चाहिए।
जिलाधिकारी द्वारा यह निर्देश दिए गए कि जनपद में जिला स्तर, तहसील स्तर, नगर निकाय, खंड स्तर पर संबंधित विभाग शासन द्वारा नियत कार्य योजना के तहत जन सम्मान की अधिकाधिक भागीदारी सुनिश्चित कराते हुए भूजल सप्ताह का सफल आयोजन करें। 
गोष्ठी में मुख्य विकास अधिकारी सीलम साई तेजा ने बताया कि प्रदेश में गिरते भूजल स्तर को दृष्टिगत रखते हुए भूगर्भ जल सप्ताह के महत्व के प्रति जन जागरूकता सृजित करने के उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी 16 जुलाई से 22 जुलाई 2022 के मध्य भूजल सप्ताह मनाया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि जल संरक्षण के साथ-साथ जल के अपव्यय को रोककर हम सभी इस दिशा में एक महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
अधिशासी अभियंता लघु सिंचाई संदीप कुमार द्वारा भूजल सप्ताह की आवश्यकता एवं प्रासंगिकता बताएं गये। उन्होंने जल संरक्षण की दिशा में जनपद में कराए जा रहे कार्यों से प्राप्त सकारात्मक परिणाम के बारे में भी बताया। इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा0 लक्ष्मी सिंह, जिला पंचायत राज अधिकारी, बेसिक शिक्षा अधिकारी सहित अन्य अधिकारी/कर्मचारी उपस्थित रहे।

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