75वां स्वतंत्रता दिवस पर भाजपा कार्यालय पर फहराया गया तिरंगा



जौनपुर। देश के 75वें स्वाधीनता दिवस पर जिलाध्यक्ष पुष्पराज सिंह के नेतृत्व मे जिला कार्यालय पर भाजपा कार्यकर्ताओ ने आयोजित समारोह में झण्डारोहण किया। उन्होंने समस्त जिला वासियों को हृदय से बधाई दी। इस अवसर पर उन्होंने सभी अमर सेनानियों को कोटि-कोटि नमन करते हुए अपनी श्रद्धांजलि भी अर्पित की। उन्होंने कहा कि देश की बाह्य व आंतरिक सुरक्षा को सुदृढ़ बनाए रखने व भारत के नागरिकों को एक सुरक्षित माहौल प्रदान करने हेतु अपने प्राणों की आहुति देने वाले देश के वीर जवानों को मैं विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।

उन्होने वहा उपस्थित कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि यह हम सभी का सौभाग्य है कि देश की स्वाधीनता के ‘अमृत’ महोत्सव वर्ष का हम सब को साक्षी बनने का अवसर प्राप्त हुआ है। स्वाधीनता के अमृत महोत्सव वर्ष में प्रवेश के साथ ही हम प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में 'नए भारत, श्रेष्ठ भारत' की परिकल्पना को साकार होते हुए देख रहे हैं। 
 
पूर्व विधायक सुरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि पराधीनता के खिलाफ एक लंबी लड़ाई व अनगिनत बलिदानों के कारण 1947 में देश स्वतंत्र हुआ। उन्होंने कहा कि देश के अंदर अलग-अलग स्थानों पर बने स्वाधीनता आंदोलन से जुड़े शहीद स्मारक स्वाधीनता की कीमत के जीवंत गवाह हैं। कहीं झांसी में रानी लक्ष्मीबाई जी का नेतृत्व तो कहीं बलिया में मंगल पांडेय जी का नेतृत्व। देश के अलग-अलग हिस्सों में स्वाधीनता की सामूहिक लड़ाई का प्रतिफल है कि विदेशी हुकूमत को भारत छोड़ना पड़ा।
 
उन्होंने कहा कि वर्ष 1916 में लखनऊ में ही लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जी ने 'स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है, हम इसे लेकर ही रहेंगे' का उद्घोष किया था। यह उद्घोष देश के स्वाधीनता आंदोलन का एक मंत्र बन गया था। नेताजी सुभाषचंद्र बोस, सरदार वल्लभभाई पटेल, वीर सावरकर, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे स्वाधीनता संग्राम के अमर सेनानियों ने देश की इस लड़ाई को एक नई ऊंचाई प्रदान की। उत्तर प्रदेश इस निर्णायक लड़ाई का एक केंद्र बिंदु बना। 

उन्होंने कहा कि स्वाधीनता के अमृत महोत्सव वर्ष में प्रवेश करने के साथ ही यह वर्ष चौरी चौरा की ऐतिहासिक घटना का शताब्दी वर्ष भी है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1922 में गोरखपुर के चौरी चौरा के नागरिकों ने विदेशी हुकूमत के खिलाफ एक निर्णायक लड़ाई को आगे बढ़ाया था। बलिया ने तो 1942 में ही स्वयं को स्वाधीन घोषित कर दिया था। उन्होंने कहा कि काकोरी की घटना कभी विस्मृत नहीं हो सकती।
 
एमएलसी बृजेश सिंह प्रिंशु ने कहा कि लखनऊ से क्रांतिकारियों ने विदेशी हुकूमत के खिलाफ क्रांति का जो बिगुल बजाया था, उसकी परिणीति 15 अगस्त 1947 के रूप में देखने को मिली। हमारे पूर्वजों ने 75 वर्ष पूर्व 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की परिकल्पना को साकार करने हेतु अपनी आहुति दी थी। अपने सम्बोधन को समाप्त करते हुए उन्होंने कहा कि देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले महान क्रांतिकारियों के सपनों को साकार करने हेतु हम सब पूरी ईमानदारी के साथ कार्य कर सकें, इस विश्वास के साथ मैं 'अमृत महोत्सव' वर्ष पर सबका अभिनंदन करते हुए आपको बधाई व शुभकामनाएं देता हूं।

कार्यक्रम का संचालन जिला महामंत्री सुशील मिश्रा ने की। उक्त अवसर पर अमित श्रीवास्तव, सुनील तिवारी, जिला उपाध्यक्ष सुरेंद्र कुमार सिंघानिया, संतोष सिंह, राकेश वर्मा, संदीप सरोज, जिला मंत्री रविंद्र सिंह राजू दादा, अभय राय, अवधेश यादव, उमाशंकर सिंह, प्रमोद यादव, विपिन द्विवेदी, ओमप्रकाश सिंह, धनंजय सिंह, ब्लाक प्रमुख संजय सिंह, धीरु सिंह, प्रबुद्ध दुबे, आमोद सिंह, सिद्धार्थ राय, रोहन सिंह, नरेन्द्र उपाध्याय, रागिनी सिंह, अनिल गुप्ता, अजय सरोज, मेराज हैदर, विनीत शुक्ला, इन्द्रसेन सिंह, प्रमोद प्रजापति, हर्ष मोदनवाल, निखिल सोनकर, अवधेश सोनकर, अर्जुन पासवान आदि उपस्थित रहें।

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