एसीपी ने दी जानकारियां: आईये जानते है साइबर अपराध से खुद को कैसे बचाया जा सकता है

             एसीपी विवेक रंजन राय 

समय के साथ जैसे-जैसे तकनीक आगे बढ़ती जा रही है और हम आधुनिक होते जा रहे हैं क्राइम भी वैसे वैसे इस आधुनिक जगत में अपने पैर पसारता जा रहा है। आज के दौर में हम जहां एक तरफ इंटरनेट की दुनियां में घुलमिल से गए हैं वहीं क्रिमिनल और क्राइम दोनों ही इस आधुनिकता की दौड़ में आगे बढ़ने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं। बीते कुछ समय से साइबर क्राइम हमारे समाज में लगातार बढ़ता जा रहा है जिन पर शिकंजा कसने के लिए पुलिस भी लगातार नई-नई तकनीकों का इस्तेमाल कर रही है। वहीं देखा गया है कि साइबर क्राइम में ठगी करने के कुछ नए तरीके भी साइबर अपराधियों ने इजात किए हैं, जिनमें सबसे ज्यादा इस्तेमाल साइबर अपराधी आजकल हनीट्रैप के जरिए करते हैं। 
साइबर क्राइम एसीपी विवेक रंजन राय के अनुसार हमें साइबर क्राइम से बचने के लिए जागरूक होना होगा। अगर कोई व्यक्ति किसी को सोशल मीडिया पर अपनी आकर्षक तस्वीर लगाकर या आकर्षक प्रोफाइल बनाकर फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज रहा है और उससे बातें करने की कोशिश कर रहा है तो हमें सबसे पहले उस व्यक्ति के बारे में अच्छी तरीके से जांच पड़ताल उसकी प्रोफाइल के जरिए कर लेनी चाहिए और किसी भी तरह के झांसे में नहीं आना चाहिए। 
एसीपी ने बताया कि साइबर अपराधियों ने ठगी का शिकार करने के कई अलग अलग तरीके अपनाएं हैं या तो वह कोई फेक कंपनी अथवा आपके बैंक मैनेजर बन के फोन कर आपको ठगी का शिकार बनाते हैं या फिर आजकल साइबर अपराधी हनी ट्रैप का सहारा लेकर आपको ब्लैक मेलिंग के जरिए एक्सटॉर्शन मनी की डिमांड करते हैं। बहुत से ऐसे लोग हैं जो हनी ट्रैप में फसने के बाद अपनी और अपने परिवार की इज्जत बचाने के लिए अपराधियों को पैसे दे देते हैं और अपनी शिकायत साइबर सेल में दर्ज नहीं कर पाते। एसीपी ने बताया कि साइबर अपराध की दुनियां में सबसे ज्यादा शिकार कम उम्र के लड़के और लड़कियां (टीनएजर) ही होते हैं। वहीं इसके बाद महिलाओं को साइबर क्राइम के अपराधी अपना शिकार बहुत ही आसानी से बनाते हैं। एसीपी ने बताया कि अगर साइबर अपराध से हमें खुद को बचाना है तो इंटरनेट की दुनियां पर बहुत ही संभल कर रहना होगा साथ कि अगर इंटरनेट बैंकिंग या ऑनलाइन ट्रांसफर करते हैं तो उसमें भी हमें खुद को संभाल कर चलना होगा। एसीपी ने बताया कि साइबर क्राइम सेल के द्वारा लगातार लोगों को जागरूक करने का कार्यक्रम चलाया जाता है साथ ही हम स्कूल और कॉलेज में भी यह अभियान वृहद स्तर पर चला रहे हैं। सावधानी हटी कि दुर्घटना घटी। 

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