गठबंधन के प्रत्याशियों को भारी पड़ सकती है अपने दल के कार्यकर्ताओं की उपेक्षा

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जौनपुर। सत्रहवीं लोकसभा के लिए हो रहे इस चुनाव में जनपद के दोनों लोकसभा सीट जौनपुर एवं मछली शहर सु. सीट चुनाव लड़ रहे सपा बसपा गठबंधन के प्रत्याशीयों की कार्यशैली एवं उनके अति अहंकार से बसपा के कार्यकर्ताओं में खासा निराशा देखने एवं सुनने को मिल रही है। जो गठबंधन प्रत्याशीयों के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। इसका खामियाजा गठबंधन दल को उठाना पड़ सकता है।
जौनपुर संसदीय सीट से चुनाव लड़ रहे गठबंधन के प्रत्याशी श्याम सिंह यादव एवं मछली शहर सु. सीट से टी राम को प्रत्याशी बनाया गया है। बसपा के अधिकांश पदाधिकारियों सहित कार्यकर्ताओं में पहला गुस्सा इस बात का है कि उनकी नेता ने लगातार पार्टी के दिन रात मेहनत करने वाले कार्यकर्ताओं को तरजीह नहीं दिया बल्कि बसपा के मतदाताओं की कीमत वसूलते हुए अति भ्रष्ट अवकाश प्राप्त सरकारी नौकरों को जनता का खून चूसने के लिए टिकट पकड़ा दिया है।
दूसरा गुस्सा यह है कि गठबंधन में बसपा से टिकट खरीद कर चुनाव लड़ रहे दोनों प्रत्याशियो द्वारा बसपा के मूल कार्यकर्ताओं को पूछा तक नहीं जा रहा है। मजबूरी में एकाध पदाधिकारी को साथ ले लिया गया है। बसपा के कार्यकर्ताओं ने नाम गोपनीय रखने की शर्त पर जानकारी दिया है कि दोनों प्रत्याशी सपाईयों के हाथ का खिलौना बनें हुए है। जौनपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ रहे प्रत्याशी के बिषय में कहा कि सपा के एक नेता प्रत्याशी के रिश्तेदार है उनके इसारे पर सपाई बन कर चुनाव लड़ रहे है। इनके केन्द्रीय कार्यालय पर सपाईयों के अलावा बसपा के लोगों को पूछा तक नहीं जा रहा है।
बसपा के कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि बहन जी पार्टी के कार्यकर्ता को चुनाव लड़ाती तो निश्चित रूप से कार्यकर्ता अपना सम्मान महसूस करता और पूरे जोश एवं जी जान से लग कर चुनाव जीतने का प्रयास करता। एक पदाधिकारी ने बताया कि मछली शहर सु. चुनाव लड़ रहे टी राम तो इस गर्मी में जनता के बीच में रहने से ही परहेज करते है चुनाव जीतने के बाद कहां रहेंगे ईश्वर ही जाने। यही हाल श्याम सिंह यादव का भी है चुनाव जीतने के बाद जनता को इन दोनों को तलाश करना पड़ेगा।
यहां पर जनता भी इनसे सवाल करती है कि एक एडीएम स्तर के अधिकारी से अवकाश ग्रहण किए हैं तो दूसरे एक इंजीनियर पद से अवकाश ग्रहण किए हैं टिकट खरीदने के लिए करोड़ों रुपए क्या इमानदारी से इकठ्ठा किये है। इससे सहज अनुमान लगाया जा सकता है कि गठबंधन के दोनों प्रत्याशी अपने क्षेत्रों के विकास के प्रति कितने संजीदा एवं इमानदार होगे। जो भी हो बसपा कार्यकर्ताओं की नाराज़गी का खामियाजा पार्टी को भी भुगतना पड़ सकता है।

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