पुलिस ने किया खुलासा: आखिर छात्रो ने क्यों किया डकैती, जानें पूरी कहांनी


फाफामऊ में गद्दोपुर निवासी रामकुमार पांडेय के परिवार को बंधक बनाकर डकैती डालने वाले पेशेवर अपराधी नहीं बल्कि छात्र निकले। हालांकि उनका तरीका अपराधियों जैसा ही था। इन छात्रों ने कर्ज चुकाने के लिए डकैती की वारदात को अंजाम दिया था। पुलिस ने योजना बनाने वाले सचिन कुमार सहित छह अभियुक्तों को गिरफ्तार हुए घटना का राजफाश किया है। वारदात में शामिल बलिया का प्रियम और होलागढ़ का दीपक अभी फरार है। गिरफ्तार अभियुक्तों के कब्जे से लूटी गई कार, बाइक, जेवरात, नकदी और तमंचा व कारतूस बरामद किया गया है।
पुलिस लाइन सभागार में गुरुवार शाम अभियुक्तों को मीडिया के सामने पेश किया गया। आइजी डा. आरके सिंह, एसएसपी शैलेश कुमार पांडेय ने बताया कि घटना में शामिल अभियुक्त छात्र एक ग्राम विकास अधिकारी के लाज व दूसरे मकान में किराए पर रहते थे। छात्रों के साथी निशांत ने एक फल विक्रेता से दो लाख 80 हजार रुपये कर्ज लिया था। बिचौलिया सचिन कुमार रहा, जो फल विक्रेता की दुकान पर काम भी करता था।


कर्ज के बाद 50 हजार रुपये ब्याज भी हो गया था, जिसके बाद निशांत बिना पैसा चुकता किए अपने घर बिहार चला गया। तब फल विक्रेता सचिन व छात्रों पर पैसे का दबाव डालने लगा। इस पर सचिन ने छात्र सुशील, शिवा, अनुपम, हर्ष, देवेंद्र के साथ डकैती की योजना बनाई। ताकि कर्ज चुकाया जा सके। उसी ने रामकुमार पांडेय के मकान की रेकी की और फिर नौ नवंबर की रात डकैती की गई। वारदात के बाद दो अभियुक्त कार लेकर बस्ती भाग गए थे, जबकि कुछ दूसरे स्थान पर छिप गए थे। मुखबिरों के जरिए फाफामऊ पुलिस और एसओजी, सर्विलांस की टीम ने अभियुक्तों का पता लगाते हुए गिरफ्तारी की। पूछताछ में पता चला कि डकैती से दो दिन पहले अभियुक्तों ने मिठाई दुकानदार की भी बाइक लूटी थी।
एसएसपी ने बताया कि देवेंद्र कुमार मिश्रा ने ही साथियों को चार तमंचा मुहैया करवाया था। वारदात में कुल चार असलहे का प्रयाेग हुआ था, जिसमें से तीन की बरामदगी हुई है। हालांकि देवेंद्र ने किससे तमंचा कब और कितने में खरीदा था, यह पुलिस नहीं बता सकी। अलबत्ता यह कहा गया कि तमंचा सप्लायर करने वालों का पता लगाकर गिरफ्तारी की जाएगी।


चौंकाने वाली बात यह है कि गिरफ्तार युवक छात्र हैं। यह सभी अलग-अलग जिले से आकर यहां पढ़ाई करते थे। मगर शौक और जरूरतों को पूरा करने के लिए अपराध की दुनिया में दाखिल हो गए। आइजी ने कहा कि छात्रों का अपराध करने का तरीका पेेशेवर अपराधियों जैसा रहा। सभी का आपराधिक इतिहास नहीं है लेकिन जिस ढंग से घटना को अंजाम दिया उससे साफ है कि गिरफ्तारी न होने पर भविष्य में गैंग बनाकर संगीन वारदात को अंजाम दे सकते थे। उन्होंने किराए पर रहने वाले छात्रों की भी जांच करने का निर्देश दिया।
आइजी ने डकैती का पर्दाफाश करने पर एएसपी चिराग जैन, फाफामऊ थानाध्यक्ष आशीष सिंह, एसओजी गंगापार प्रभारी इंद्र प्रताप सिंह, एसओजी जनपदीय शाखा प्रभारी राजेश उपाध्याय, विशेष टीम के प्रभारी महावीर सिंह और सर्विलांस प्रभारी शांतनु चतुर्वेदी की टीम को 50 हजार रुपये का इनाम दिया है।
- सचिन कुमार (बीएड), निवासी अंगुरियन पूरब नारा होलागढ़, प्रयागराज
- सुशील उपाध्याय (आइटीआइ), निवासी गौरा दुबौलिया, बस्ती
- शिवा उर्फ तरुण उपाध्याय (इंटरमीडिएट), निवासी गौसपुर कलवारी, बस्ती
- अनुपम राय (स्नातक) निवासी कठैडा सिकंदरपुर, बलिया
- हर्ष सिंह (इंटरमीडिएट), निवासी सराय कंधई, प्रतापगढ़
- देवेंद्र मिश्रा (आइटीआइ), निवासी अंगुरियन पूरब नारा होलागढ़, प्रयागराज

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