नदी से मिली मछुआरों को मां दुर्गा की मूर्ति, मन्दिर में स्थापित होने बजाय उलझी कानूनी जाल में



जौनपुर । जनपद के केराकत तहसील स्थित गोमती नदी के महादेवा घाट के पास मछली पकड़ने नदी में उतरे मछुआरे की जाल में मां दुर्गा की मूर्ति फंसी मिली। जाल में मां दुर्गा की मूर्ति मिलने की सूचना से पूरे गांव में हर्ष का माहौल हो गया। बड़ी संख्या में ग्रामीण मूर्ति दर्शन के लिए इकट्ठा हो गए हो जयकारे लगाने लगे। 
माना जा रहा है कि मूर्ति अष्टधातु की बनी है। 
मछुआरों और आसपास के लोगों ने मूर्ति को घाट के पास नदी के किनारे रखकर पूजा-पाठ शुरू कर दिया। साथ ही मां दुर्गा का मंदिर बनाने की भी तैयारी शुरू हो गई। अब केराकत थाने की पुलिस गांव पहुंच कर मूर्ति को अपने कब्जे में ले लिया। जबकि ग्रामीण नदी के किनारे ही मां दुर्गा का मन्दिर बनाकर मूर्ति को स्थापित करना चाहते है। लेकिन पुलिस और प्रशासन के संज्ञान में आते ही मां दुर्गा जी मूर्ति कानून के मकड़जाल में उलझ गयी है। 
खबर है कि मूर्ति कब्जे के लिए पुलिस को काफी मशक्कत का सामना भी करना पड़ा। पुलिस मूर्ति लेकर थाना पहुंची तो पूरा गांव पीछे पीछे चला आया, लेकिन पुलिस ने सबको समझा बुझाकर वापस कर दिया। थाने में मूर्ति आने के बाद दूर-दराज से दर्शन के लिए लोग आने लगे।
मिली जानकारी के अनुसार ग्राम सरोज बड़ेवर निवासी सहादुर निषाद, शशिकांत निषाद, चंदुकल निषाद, बजरंगी निषाद, पंचदेव निषाद, डब्लू निषाद एवं कलेक्टर निषाद गोमती नदी के महादेवा घाट पर मछली पकड़ने के लिए जाल डाला था। शाम करीब सात बजे वे जाल लेकर कुसरना गांव के महादेवा गोमती घाट पहुंचे और जाल खींचने लगे। 
जाल भारी होने पर मछुआरों को लगा कि शायद कोई बड़ी मछली जाल में फंस गई है। जब जाल ऊपर आई तो एक फीट ऊंची मां दुर्गा की प्रतिमा दिखी। मछुआरों ने मां दुर्गा का जयकारा लगाते हुए मूर्ति को बाहर निकाला। सूचना पर आसपास के कई गांव की लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। प्रतिमा का दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं का तांता लग गया। सहादुर निषाद ने बताया कि गांव के छट्ठू यादव भगत समेत कई लोगों ने बताया कि यह प्रतिमा अष्टधातु से बनी है। केराकत कोतवाली क्षेत्र के ग्राम महादेवा घाट पर मछली की जाल में फंसी अष्टधातु की प्रतिमा को केराकत पुलिस ने अपने कब्जे में लिया। गांव वालों ने पहले तो विरोध किया मगर समझाने पर मान गए। 
कोतवाल ने बताया कि सुरक्षा की दृष्टि कोण से प्रतिमा को कब्जे में  लिया गया है। प्रतिमा अष्टुधातु की है या नहीं इसकी जांच विशेषज्ञ से कराई जायेगी। साथ ही इस बात की भी पड़ताल होगी कि यह प्रतिमा कहीं चोरी की तो नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि किसी राजा का सैकड़ों वर्ष पुराना एक किला था। कालांतर में किला  ढह गया। हो सकता है तभी दुर्गा की प्रतिमा दब गयी हो जो अब जाकर प्रकट हुईं। 
ग्राम महादेवा के गोमती घाट के पास मछुआरों  के जाल में फंसी मिली अष्टधातु की मां दुर्गा की प्रतिमा को लेकर जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा गंभीर हैं। उन्होंने कहा कि पुरातत्व विभाग आकर इसकी जांच करेगा कि प्रतिमा किस धातु की है और कितनी पुरानी है। पुरातत्व विभाग के जांच के बाद ही  कोई निर्णय लिया जायेगा।

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