गोमती के पावन तट स्थित रामघाट पर राजकीय सम्मान, मंत्रोच्चार के साथ सुखदेव राजभर पंचतत्व में हुए विलीन


जौनपुर। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्व सुखदेव राजभर का अन्तिम संस्कार आज जनपद जौनपुर में गोमती के तट पर स्थित रामघाट पर राजकीय सम्मान और पूरे विधि-विधान एवं मंत्रोच्चार के साथ जिला सहित प्रदेश स्तर के तमाम नेताओ और मंत्रियों की उपस्थिति में किया गया। स्व राजभर की चिता में उनके एक मात्र पुत्र कमला कान्त राजभर ने मुखाग्नि दिया।
बता दे पूर्वांचल के दिग्गज नेताओ में शुमार रहने वाले सुखदेव राजभर का निधन 18 अक्टूबर को देर रात्रि को लखनऊ स्थित एक अस्पताल में हो गया था। निधन के पश्चात दूसरे दिन 19 अक्टूबर को उनका पार्थिव शरीर लखनऊ से उनके पैतृक आवास जनपद आजमगढ़ स्थित ग्राम बड़गहन क्षेत्र की जनता के अन्तिम दर्शन के लिए लाया गया था। आज 20 अक्टूबर को उनके आवास बड़गहन से राजभर की शव यात्रा लगभग 10 बजे निकली और लगभग 12 बजे के आसपास जौनपुर स्थित रामघाट पर शवयात्रा पहुंची। यहां पर शासकीय प्रोटोकॉल के तहत पुलिस विभाग के लोंगो द्वारा उन्हे गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। 
इसके पश्चात उनकी चिता लगी और पूरे विधि-विधान से अन्तिम संस्कार किया गया। इस अवसर पर जनपद जौनपुर सहित जनपद आजमगढ़ से लगभग पांच हजार से अधिक लोंगो का जन सैलाब उमड़ा हुआ था। जो स्व राजभर की लोकप्रियता एवं सरलता सौम्यता की दास्तान खुद ब खुद बता रहा था। स्व सुखदेव राजभर की अन्त्येष्टि में शामिल होने के लिए जनपद एवं क्षेत्र की जनता के साथ प्रदेश सरकार के मंत्री एवं सभी राजनैतिक दलो के नेता गण उपस्थित रहे। 
दाह-संस्कार के समय घाट पर मौजूद रहने वाले नेताओ में प्रदेश सरकार के मंत्री दारा सिंह चौहान, गिरीश चन्द यादव, अनिल राजभर के अलांवा पूर्व मंत्री गण बलराम यादव एवं राम अचल राजभर, बसपा के प्रदेश अध्यक्ष भीम राजभर, विधायक गण शैलेंद्र यादव ललई, अरिदमन आजाद, पूर्व विधायक एवं मंत्री जगदीश नरायन राय, गुलाब चन्द सरोज, विरजू राम  एवं सपा के जिलाध्यक्ष लालबहादुर यादव बसपा नेता डा जेपी सिंह,जंग बहादुर सिंह,आदि बड़ी संख्या में नेता गण की उपस्थिति स्व राजभर की लोकप्रियता की कहानी बता रही थी। 
यहां बता दे कि स्व राजभर राजनैतिक जीवन की शुरुआत बसपा से किये और पांच बार विधायक चुने गये थे दो बार मंत्री और एक बार विधानसभा के अध्यक्ष भी रहे। जीवन की अन्तिम सांस भी बसपा के दीदारगंज विधायक के रूप लिया। हलांकि लम्बे समय से बीमार रहने के कारण जीवन के अंतिम समय में सक्रिय राजनीति से खुद को अलग जरूर किये थे लेकिन बसपा को छोड़ा नहीं था। रामघाट पर सुखदेव राजभर दूसरे राजनेता रहे है जिनका दाह संस्कार किया गया। सबसे पहले भारतीय राजनीति में अहम स्थान रखने वाले भाजपा नेता रहे स्व यादवेन्द्र दत्त दूबे का अन्तिम संस्कार इस घाट पर एक दशक पूर्व किया गया था।

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