आइए जानते है यूपी विधान सभा के इस चुनाव में भाजपा का प्लान बी क्या है


यूपी में पिछड़ी जाति के नेताओ स्वामी प्रसाद मौर्य समेत कुछ विधायकों के भारतीय जनता पार्टी छोड़ने और समाजवादी पार्टी ज्वाइन करने के बाद भाजपा को पिछड़ी जातियों खासकर गैर यादव ओबीसी वोट बैंक के खिसकने का डर लगने लगा है। भाजपा में अभी तक योगी आदित्यनाथ के चेहरे और विकास कार्यों को आगे लाकर चुनाव लड़ने की बात हो रही थी, लेकिन पिछले सप्ताह घटनाक्रम जिस तेजी से बदला है, उसके बाद कहा जा रहा है कि पार्टी ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है और पार्टी का प्लान बी तैयार किया है।
इसका सबसे बड़ा उदाहरण यह है कि योगी को अयोध्या के बजाए गोरखपुर से चुनाव लड़ने के लिए भेजा गया है। कई मामलों में केशव प्रसाद मौर्य को आगे रखा जा रहा है। सहारनपुर जनपद के बेहट से कांग्रेस विधायक नरेश सैनी, फिरोजाबाद के सिरसागंज सीट से समाजवादी पार्टी के विधायक हरिओम यादव और सपा के पूर्व विधायक धर्मपाल यादव ने जब कुछ दिनों पहले भाजपा में शामिल हुए तो उस कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और दिनेश शर्मा मौजूद थे। इसी तरह स्वामी प्रसाद मौर्य के पार्टी छोड़ने के बाद पहली प्रतिक्रिया डिप्टी सीएम की तरफ से ही आई। राजनैतिक समीक्षक मानते है कि अब भाजपा प्लान बी के तहत केशव प्रसाद मौर्य को आगे करके पिछड़ी जाति के वोटो को दरकने से रोकने का पूरा प्रयास करेगी। यहां पर सवाल इस बात का है कि क्या इस बार भी पिछड़ो के बीच केशव प्रसाद मौर्य का कार्ड असर कारी बन सकेगा ? 

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