जानिए आखिर कुलाधिपति सहित कुलपति और परीक्षा नियंत्रक के खिलाफ परिवाद दाखिल क्यों हुआ, जिम्मेदार कौन?

जौनपुर। दीवानी न्यायालय परिसर में स्थित स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष बुधराम यादव व सदस्य विजय शंकर श्रीवास्तव ने सोमवार को कालेज के अंकपत्र व प्रमाणपत्र के नाम में गड़बड़ी को लेकर तीन परिवादियों की शिकायत पर कुलाधिपति, पूर्वांचल विश्वविद्यालय के कुलपति व परीक्षा नियंत्रक के खिलाफ परिवाद दर्ज कर नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने विपक्षीगण को अपना पक्ष रखने के लिए 17 अप्रैल की तिथि नियत की है। मिर्जापुर के कमासिन निवासी पवन कुमार सिंह ने पूर्वांचल विश्वविद्यालय के कुलाधिपति, कुलपति व परीक्षा नियंत्रक के खिलाफ परिवाद दायर किया है। जिसमें कहा कि परिवादी ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग द्वारा आयोजित स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक प्रतियोगिता 2016 उत्तीर्ण की और सहायक अध्यापक के पद पर चयनित हुआ। आयोग ने आपत्ति में दर्शाया कि अभ्यर्थी के पिता का नाम आवेदन में अंकित नाम के अनुरूप नहीं है उसे दुरुस्त कराएं। परिवादी ने पूर्वांचल विश्वविद्यालय से संबद्ध कन्हैयालाल बसंतलाल स्नातकोत्तर महाविद्यालय मिर्जापुर से बीए उत्तीर्ण किया। उस मार्कशीट में पिता का नाम घनश्याम सिंह की जगह घनश्याम लिखा है। इसी प्रकार बलिया के खड़सड़ा अजीजपुर निवासी अरविंद कुमार गिरी ने परिवाद दायर किया कि उसने मुरली मनोहर टाउन पीजी कॉलेज बलिया से बीए की परीक्षा 2002 में उत्तीर्ण की थी। पूर्वांचल विश्वविद्यालय द्वारा मार्कशीट व सनद प्रदान कराए गए, उसमें परिवादी व पिता का नाम सही है परंतु विश्वविद्यालय के अभिलेख अनुभाग परीक्षा नियंत्रक में जो चार्ट है उसमें अरविंद कुमार गिरी के स्थान पर अरविंद कुमार लिखा गया है। परिवादी की नियुक्ति फतेहपुर संस्कृत महाविद्यालय में सहायक प्रवक्ता के पद पर 10 जनवरी 2023 को हुई। अंकपत्र प्रमाण पत्र के सत्यापन के समय स्थिति की जानकारी हुई। इसी प्रकार बदलापुर के दुधौड़ा निवासी संतोष कुमार ने परिवाद दायर किया कि परिवादी झारखंड कर्मचारी चयन आयोग द्वारा आयोजित परीक्षा उत्तीर्ण कर अध्यापक के पद पर चयनित हुआ। नियुक्ति पर आपत्ति दर्शाई गई थी अभ्यर्थी का नाम, पिता के नाम आवेदन में अंकित नाम के अनुरूप नहीं है। परीक्षा नियंत्रक से मिलने पर उन्होंने संशोधन के लिए रुपये की मांग किया। आज तक संशोधन नहीं हुआ। तीनों परिवादियों ने अदालत से गुहार लगाई है विपक्षीगण को आदेश दिया जाए कि अपेक्षित संशोधन करें तथा मानसिक व शारीरिक पीड़ा के लिए क्षतिपूर्ति प्रदान करें।

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