जेल से धनन्जय सिंह की रिहाई: पुलिस पर उठे सवाल, जाने अब अधिकारीयों की क्या है रणनीति

 
फतेहगढ़ की सेन्ट्रल जेल जमानत पर पूर्व सांसद धनन्जय सिंह को रिहा होने के बाद से अब पुलिस पर सवाल उठने लगा है। मऊ के जेष्ठ उप ब्लॉक प्रमुख अजीत सिंह हत्याकांड में साजिश रचने के आरोपित पूर्व सांसद धनंजय सिंह को फतेहगढ़ सेन्ट्रल जेल से  जमानत पर रिहा होने  के बाद चर्चाओं का बाजार गर्म है। जिस धनंजय सिंह की तलाश में लखनऊ पुलिस छापेमारी कर रही थी, उसके प्रयागराज की कोर्ट में आत्मसमर्पण करने के बाद भी पुलिस ने वारंट बी दाखिल क्यों नहीं किया। खास बात यह है कि पुलिस ने धनंजय के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट और 25 हजार का इनाम भी घोषित किया था।
अजीत सिंह हत्याकांड में गिरफ्तारी और छिपे हुए रहस्यों से पर्दा उठाने के लिए पुलिस की टीमों ने पूर्व सांसद के संभावित स्थानों पर लगातार दबिश दी थी। इस सबके बावजूद पुलिस ने वारंट बी दाखिल कर आरोपित को पुलिस कस्टडी रिमांड पर लेने का प्रयास नहीं किया। पुलिस की इस कार्यशैली पर कई सवाल उठ रहे हैं। धनंजय ने पांच मार्च को एमपीएमएलए कोर्ट प्रयागराज में समर्पण किया था और 31 मार्च को जमानत पर रिहा हुए। पुलिस अगर प्रयास करती तो इस अवधि में आगे की कार्यवाही कर सकती थी, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। उधर, पूर्व सांसद धनंजय सिंह की ओर से 19 मार्च को अदालत में एक अर्जी दाखिल की गई थी। इस अर्जी में पुलिस की ओर से इस हत्याकांड में उनसे पूछताछ नहीं करने का मसला उठाया गया था।
सीजेएम सुशील कुमारी ने इस अर्जी पर रिपोर्ट तलब करने का आदेश दिया था। पुलिस की ओर से बीते बुधवार को कोर्ट में जवाब दाखिल किया गया। हालांकि जवाब में पुलिस की ओर से इस बात का उल्लेख नहीं किया गया है कि धनंजय से पूंछताछ क्यों नहीं की गई। सूत्रों का कहना है कि इस प्रकरण में पुलिस अधिकारी नई रणनीति बना रहे हैं। माना जा रहा है कि पुलिस अजीत सिंह हत्याकांड में धनंजय को गिरफ्तार कर सकती है। गौरतलब है कि विभूतिखंड में कठौता चौराहे के पास गैंगवार में अजीत सिंह की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पुलिस ने धनंजय सिंह को साजिश रचने का आरोपित बनाया था। अब पुलिस सवालों के कटघरे में खड़ी नजर आ रही है। सूत्र की माने तो अब अधिकारी पूरे मामले की जांच कराने की बात कर रहे हैं।  

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