गठबंधन दलों की असली परीक्षा पूर्वांचल के अन्तिम समय मे होने वाले मतदान में जाने कैसे होगी


पूर्वांचल की माटी से राजनीति में पहचान बनाने वाले अद (सोनेलाल), निषाद पार्टी, अद (कमेरावादी) और सुभासपा की जनता में पकड़ और दावों  की असल परीक्षा पांचवें, छठवें व सातवें चरण में होगी। इनके प्रदर्शन के आधार पर लाभ हान सीधे तौर पर भाजपा व सपा पर मिलेगा। जिसके सहयोगी बेहतर प्रदर्शन करेंगे उस दल का पलड़ा पूर्वांचल व अवध के कुछ जिलों में भारी रहने की उम्मीद की जा रही है। ये छोटे दल पांचवें, छठवें व सातवें चरण की 45 सीटों पर प्रत्याशियों को मैदान में उतारकर पूर्वांचल की राजनीति में अपने दखल का अहसास कराने की जद्दोजहद में जुट गए हैं। 
सपा और भाजपा के सहयोगी इन चार दलों के खाते में गठबंधन के तहत 57 विधानसभा सीटें हैं। जिनमें से 45 सीटें ऐसी हैं, जहां पर मतदान पांचवें, छठवें और सातवें चरण में होनी हैं। ये सीटें बस्ती, गोरखपुर, आजमगढ़, वाराणसी, मिर्जापुर, प्रयागराज, अयोध्या, देवीपाटन मंडल में हैं। इन सहयोगी छोटे दलों को पूर्व के चुनावों में जो सफलताएं मिलीं वह पूर्वांचल व अवध की इन्हीं क्षेत्रों में मिली हैं। लिहाजा इन दलों के राजनीतिक भविष्य की दिशा व दशा भी इस चरण में ही निर्धारित होगी।
पिछले चुनाव में भाजपा के साथ रहते हुए चार सीटों पर जीत हासिल करने वाली सुभासपा इस चुनाव में सपा के साथ है। सुभासपा ने अभी तक 18 सीटों से प्रत्याशियों की घोषणा की है। बड़े दावों के साथ सपा से गठबंधन करने वाले सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर की राजनीतिक पकड़ की कड़ी परीक्षा इन्हीं तीन चरणों में होगी। 
सपा की दूसरी सहयोगी अद (कमेरावादी) ने जिन छह सीटों से प्रत्याशियों की घोषणा की है वे सभी सीटें पांचवें से लेकर सातवें चरण की हैं। अद (कमेरावादी) के सामने खुद को साबित करने की बड़ी चुनौती है। अद कमेरावादी की अध्यक्ष कृष्णा पटेल पांचवे चरण की सीट प्रतापगढ़ सदर से मैदान में हैं। शेष सभी सीटें सातवें चरण की हैं।   
भाजपा गठबंधन में शामिल अद (एस) के लिए भी ये तीनों चरण अग्निपरीक्षा वाले होंगे। अपना दल (सोनेलाल) ने 17 प्रत्याशी घोषित किए हैं। अद (एस) के पास सबसे अधिक पांचवें चरण में सात सीटें हैं। छठवें और सातवें चरण में  कुल चार सीटें हैं। यह दल 2014 से ही भाजपा के साथ है। पिछले विधानसभा चुनाव में इस दल के 11 में से नौ प्रत्याशी चुनाव जीते थे। करीब 90 फीसदी प्रत्याशी सफल रहे थे। अवध व पूर्वांचल में अद (एस) को अपनी सीटों के साथ ही भाजपा व निषाद पार्टी के प्रत्याशियों के जीत की राह आसान करने की चुनौती का सामना करना है।  
भाजपा की दूसरी सहयोगी निषाद पार्टी ने 16 प्रत्याशी घोषित किए हैं। काल्पी को छोड़ निषाद पार्टी की शेष 15 सीटें पांचवें से लेकर सातवें चरण की हैं। निषाद पार्टी को गठबंधन के तहत पहले ही चुनाव में भाजपा ने पूर्वांचल में बड़ी भूमिका से नवाजा है। भाजपा के विश्वास पर खरे उतरने की बड़ी चुनौती निषाद पार्टी के सामने है। निषाद पार्टी के छह प्रत्याशी भाजपा के सिंबल से चुनाव मैदान में हैं, वहीं 10 प्रत्याशी पार्टी के अपने चुनाव चिन्ह पर मैदान में हैं। 

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