धनंजय सिंह के नामांकन को लेकर मृतक अजीत सिंह के पत्नी की शिकायत पर नोटिस जारी जांच शुरू



जौनपुर। जनपद के मल्हनी विधान सभा क्षेत्र से जद यू के टिकट पर चुनाव लड़ रहे बाहुबली नेता एवं पूर्व सांसद धनंजय सिंह की मुश्किले लगातार बढ़ती ही जा रही है। लखनऊ के विभूतिखंड थाना क्षेत्र में गोलियों से भून कर मौत के घाट उतारे गये मऊ के उप ब्लाक प्रमुख रहे माफिया अजीत सिंह की पत्नी रानू सिंह ने धनंजय सिंह पर गलत जानकारी देकर नामांकन दाखिल करने का आरोप लगाते हुए जिला निर्वाचन अधिकारी को आज पत्र भेजा है। रानू सिंह का दावा है कि धनंजय सिंह अब भी 25 हजार के इनामी और फरार घोषित अपराधी हैं। इस मामले में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट हिमांशु नागपाल का कहना है कि आज हलफनामा के साथ शिकायत मिली है। जिसके आधार पर दूसरे पक्ष को नोटिस जारी किया गया है उनके द्वारा जो जवाब मिलेगा उससे शिकायतकर्ता को भी अवगत करा दिया जायेगा।  
बतादे मऊ के मोहम्मदाबाद से ब्लाक प्रमुख रानू सिंह ने जौनपुर के जिला निर्वाचन अधिकारी को हलफनामे के साथ भेजे पत्र में लिखा है कि मेरे पति अजीत सिंह की हत्या में धनंजय सिंह ने लखनऊ के विभूति खंड थाने में धारा 302, 307, 120बी,34, 201,212 भादवि के तहत
वांछित हैं। इनके खिलाफ लखनऊ की कोर्ट ने गैर जमानती वारंट जारी किया है। इसमें धारा 82 की कार्रवाई भी हो चुकी है। रानू सिंह ने कहा कि धनंजय 25 हजार के इनामी भी हैं। इन सभी मामलों में धनंजय ने लखनऊ की स्पेशल जज सीबीआई-3 के यहां एंटीसेपटरी बेल के लिए अर्जी भी दाखिल की है। इसकी सुनवाई 18 फरवरी को तय थी। इस मामले में धनंजय के पक्ष में किसी भी कोर्ट ने अभी तक जमानत या स्टे आदेश नहीं दिया है। रानू ने पत्र में लिखा है कि जो अभी तक भगोड़ा घोषित है, उसे कानूनन और संवैधानिक रूप से चुनाव लड़ने का हक नहीं है। धनंजय ने अपने शपथपत्र में झूठी जानकारियां दी हैं। उनका नामांकन रद किया जाए और उनके खिलाफ कार्यवाही की जाए।
रानू सिंह के प्रतिनिधि मोहर सिंह ने बताया कि धनंजय के नामांकन के बारे में पता चलते ही उनके खिलाफ पत्र जौनपुर के निर्वाचन अधिकारी को दिया गया था। वहां से यह कहा गया कि शिकायत हलफनामे के साथ किया जाए। इसके बाद हलफनामा बनाकर पत्र को मेल से भेजा गया है।
इस मामले में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट हिमांशु नागपाल ने बताया कि हलफनामा के साथ आज शिकायत मिली है। दूसरे पक्ष को नोटिस जारी किया गया है उनके द्वारा जो जवाब मिलेगा उससे शिकायतकर्ता को भी अवगत करा दिया जायेगा। आयोग की गाइडलाइन के तहत कार्रवाई भी संभव है।


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