बाल श्रम कानूनी और समाजिक तौर पर स्वीकार नहीं है पकड़े जाने पर होगी कारावास - श्रम परिवर्तन अधिकारी



जौनपुर। सरजू प्रसाद शैक्षिक सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था बाल कल्याण समिति कार्यालय पर आज रविवार को अंतर्राष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस पर बैठक आयोजित किया गया। जिसकी अध्यक्षता करते हुए श्रम प्रवर्तन अधिकारी मान सिंह ने कहा कि विकसित देशों में बाल श्रम पूरी तरह समाप्त है । अच्छा होता कि लोग बाल श्रमिक के बजाय बाल कलाकार होते। लेकिन बच्चों को कठिन परिस्थितियों में कार्य करना पड़ता है जिससे उनका शारीरिक मानसिक आर्थिक शोषण होता है जो कानूनी और सामाजिक तौर पर स्वीकार नहीं है।  2016 में एक ऐसा कानून में  सरकार ने संशोधन  कर दिया कि बाल श्रम प्रथा पर बड़ी चोट हुई। 2016 में सरकार ने निर्णय लिया कि 14 साल के नीचे का कोई बच्चा किसी भी कार्य में नियोजित नहीं होगा । पारिवारिक व्यवसाय में भी बच्चे को नहीं लगाया जा सकता है । किसी कारखाने में 14 साल से नीचे का बच्चा कार्य पर नहीं लगाया जा सकता है।

दंड प्रक्रिया संहिता के तहत 20,000 रूपए की पेनाल्टी और जेल की सजा का प्रावधान किया गया है । सरकार ने किशोर से कार्य करने के लिए 18 साल के नीचे के बच्चों को भी नियोजित नहीं किया जा सकता है। अनिवार्य शिक्षा अधिनियम मिड डे मील के कारण बाल श्रम में कमी आई है। सरकार ने मजबूर कामकाजी बच्चों को दैनिक जीवन निर्वाह के लिए कुछ ऐसी योजनाएं चलाई है कि उन्हें निर्धारित रकम माह में देगी। जौनपुर मड़ियाहूँ के 20 गांव को बाल श्रम मुक्त घोषित किया गया है । मुख्यमंत्री द्वारा ऐसे गाँवो के प्रधानो को सम्मानित किया जाएगा। जनपद में पूरे माह बाल श्रम उन्मूलन अभियान चलाया जाएगा। जो दोषी पाए जाएंगे उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बाल श्रम जहां है उसका विरोध करें वहां से कोई सामान न लें सामाजिक जागरूकता इसका बहुत बड़ा असर पड़ता है। संचालन करते हुए मध्यस्था अधिकारी डॉ दिलीप सिंह ने कहा कि घर के बच्चों से भी  घर में मजदूरी कराना भी पूर्णतया वर्जित है बाल श्रम कहीं पाया जाए तो उसका एक फोटो खींच कर विभाग को भेजें। यदि कोई व्यक्ति दोबारा बाल श्रम का  दोषी पाया गया तो कड़ी कार्यवाही की जाएगी और जेल जाना उसका तय है साथ में जुर्माना भी होगा।
मुख्य अतिथि जिला प्रोबेशन अधिकारी अभय कुमार ने कहा कि ऐसे आयोजनों के द्वारा बाल श्रम पर सामाजिक संदेश अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। धारा 23 और 24 संविधान में सभी बच्चों को मौलिक अधिकार प्राप्त है उसके शिक्षा स्वास्थ्य सुरक्षा और पुनर्वास प्रदान किया जाए। 6 से 14 वर्ष और 14 से 18 वर्ष के बच्चों को खतरनाक कार्य कठिन परिस्थितियों में पूर्णतया नियोजित है। बाल श्रम अब घटता हुआ दिखाई दे रहा है समाज का उत्तरोत्तर विकास हो रहा है 1 साल पहले सरकार ने मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना और मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (सामान्य )में 180 बच्चों को जिनके मां बाप कोविड-19 से निधन हो गया है उनको ₹4000 प्रति माह में देते हैं । चार अनाथ मां-बाप दोनों के निधन पश्चात बच्चों को पीएम के कार्यक्रम में 10 लाख रूपया का डिपाजिट प्रधानमंत्री द्वारा एनआईसी जौनपुर में  प्रमाण पत्र दिया गया है। उन्हें लैपटॉप भी दिया गया है । इन बच्चों में प्रतिभा है यह आगे चलकर आईएएस पीसीएस बनेंगे आज की महत्वपूर्ण बैठक से लेबर एक्ट आज आंखों में तैर रहा है संस्था द्वारा यह गोष्ठी आज बेहद सार्थक रही है हमें समझ कर समाज को समझाना है।  विभाग ऐसे बच्चों के प्रति बेहद संवेदनशील है। उक्त अवसर पर बाल कल्याण समिति के सदस्य रहे आनंद प्रेम धन बाल संरक्षण अधिकारी चंदन राय प्रमोद कुमार प्रजापति सुभाष सरोज साहित्यकार गिरीश श्रीवास्तव गिरीश, अमरेश पांडेय, अनिरुद्ध कुमार पंकज, चाइल्ड लाइन अनिल कुमार यादव अनुराग मणि ने अपने विचार रखा।
अंत में कार्यक्रम आयोजक संजय उपाध्याय संस्था सचिव/ पूर्व अध्यक्ष चाइल्ड वेलफेयर कमेटी द्वारा बाल श्रम के खिलाफ सभी को संकल्प - शपथ दिलाया गया। सभी का आभार व्यक्त किया गया।

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