राजनैतिक दल के नेताओं की आखिर इस जनपद पर खास नजर क्यों ? चुनाव में क्या होगा असर


समाजवादी पार्टी का गढ़ माने जाने वाले आजमगढ़ का सियासी कद बढ़ा है। शीर्षस्थ नेताओं की विशेष निगाहें होने से पूर्वांचल में जनपद की पहचान पावर सेंटर के रूप में उभरी है। विधानसभा चुनाव में किसी को जीत की एंट्री मात्र की चाहत है, तो कोई विरोधियों का सूफड़ा साफ करने को ताकत झोंके हुए है। केंद्रीय मंत्री अमित शाह एवं प्रसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल यादव का दौरा 13 नवंबर को लगने के साथ ही सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव 16 को पहुंच रहे, तो कांग्रेस की उत्तर प्रदेश प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी आने का संकेत दे दिए हैं।

आजमगढ़ 10 विधानसभा एवं दो संसदीय क्षेत्र समेटे पूर्वांचल का सबसे बड़ा जिला है। उसी अनुरूप यहां के लोगों की सियासी दखलंदाजी भी रहती है। यहां के फागू चौहान बिहार के गवर्नर तो दारा सिंह चौहान वनमंत्री हैं। अबकी भाजपा विकास के पानी में कमल सभी सीटों पर खिलाने की फिराक में है।रणनीति साधने को केंद्रीय मंत्री अमित शाह 13 नवंबर को आ रहे हैं। युवाओं की वर्षों पुरानी मुराद की नींव रखकर बड़ी आबादी को साधेंगे। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे, सौ शैय्या के तीन नए अस्पताल, आधा दर्जन आक्सीजन प्लांट इत्यादि बताने को उनके पास होंगे। हालांकि, भाजपा के लिए यह जिला एक तरह से ऊसर रहा है। सपा पर भी जनपदवासियों का भरोसा यूं ही नहीं है। विकास के लिए मुलायम सिंह यादव को याद करते हैं। एक समय में सपा के सिपहसलार रहे शिवपाल यादव को भी

अपनी प्रसपा के लिए आजमगढ़ से उम्मीदें हैं। केंद्रीय गृहमंत्री के साथ ही जिले के दूसरे इलाके में मतदाताओं काे साधेंगे। गढ़ में सेंध न लगे, इसके लिए सपा के अखिलेश 16 नवंबर को पहुंचेंगे। चुनावी चाणक्यों से रात में गुफ्तगू करेंगे। ऐसे में पावर सेंटर से करंट लेने को कांग्रेस की यूपी प्रभारी प्रियंका गांधी कहां पीछे रहतीं। यूपी की जिम्मेदारी मिलते ही विपक्षियों को घेरने आजमगढ़ में पहुंच अाई थीं। उनका जनपद के लोगों से लगातार जुड़ाव बना हुआ है। उनके आने का कांग्रेसियों को संदेश मिल चुका है। वाराणसी की तरह एक वृहद कार्यक्रम कराने की तैयारी चल रही है। जिलाध्यक्ष प्रवीण सिंह ने इसकी पुष्टि की है।

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