जौनपुर में तैनात दरोगा को कमिश्नरेट पुलिस वाराणसी द्वारा जानें क्यों किया गया बर्खास्त


जौनपुर। जनपद में तैनात दरोगा महेश सिंह को तीन साल पूर्व वाराणसी के सिगरा थाना के सोनिया चौकी प्रभारी रहने के समय एक व्यापारी से पांच हजार रुपये घूस लेने के मामले में पद से बर्खास्त कर दिया गया। वाराणसी कमिश्नरेट पुलिस की हफ्ते भर के अंदर यह दूसरी कार्रवाई है। इसके पहले महिला थाने में  उप निरीक्षक रही गीता देवी को 20 हजार घूस लेने के मामले में बर्खास्त किया जा चुका है।
खबर है कि कूरियर कंपनी की फ्रेंचाइजी चलाने वाले कबीरचौरा स्थित जालपा देवी रोड निवासी राजकुमार गुप्ता ने धोखाधड़ी मामले में सिगरा थाना अंतर्गत सोनिया चौकी इंचार्ज महेश सिंह के पास गए तो पैसे की मांग की गई। कई बार पैसे की मांग होने से त्रस्त राजकुमार गुप्ता ने इसकी शिकायत भ्रष्टाचार निवारण वाराणसी इकाई से की।शिकायत के आधार पर एंटी करप्शन टीम ने पांच हजार रुपये  देकर राजकुमार को चौकी पर भेजा। जहां नोटों की गड्डी थामते ही चौकी इंचार्ज महेश  सिंह को एंटी करप्शन टीम ने रंगेहाथ गिरफ्तार किया था। कैंट थाने में एसआई महेश सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था।
इस मामले की जांच  रिपोर्ट पर अपर पुलिस आयुक्त अपराध व मुख्यालय सुभाष चंद्र दुबे ने बर्खास्त का आदेश जारी किया। आदेश की प्रति जौनपुर पुलिस अधीक्षक को भी भेज दी गई है। सुभाष चंद्र दुबे के अनुसार पुलिस जैसे अनुशासित बल का हिस्सा होने के बावजूद अपचारी उप निरीक्षक का यह कृत्य  पुलिस विभाग की छवि धूमिल करने और भ्रष्ट आचरण से पुलिस बल की आम जनता में  विश्वसनीयता कम करने का परिचायक है।
दरोगा  द्वारा आमजन का रक्षक होते हुए भक्षक का कार्य किया गया है, जो एक अति गंभीर कदाचार है।  यदि ऐसे दरोगा  को पुलिस बल में बनाए रखा जाता है  तो इसका कुप्रभाव अन्य पुलिसकर्मियों पर पडे़गा। साथ ही समाज में गलत  संदेश जाएगा। वहीं उप निरीक्षक द्वारा प्रस्तुत स्पष्टीकरण आधारहीन, बलहीन, असत्य, निराधार होने के कारण स्वीकार योग्य नहीं है।

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