प्रदेश सरकार के समक्ष एक बड़ा सवाल आखिर आईएएस अफसर क्यों ले रहे है वीआरएस,एक माह में चार ने किया अप्लाई



प्रदेश में आईएएस अफसरों के वीआरएस लेने का सिलसिला खत्म नहीं होने का नाम नहीं ले रहा है। आखिर इसके लिए जिम्मेदार कौन है अब यह एक बड़ा सवाल प्रदेश की सरकार के समक्ष खड़ा होने लगा है।अभी 2008 बैच के आईएएस विद्या भूषण ने भी वीआरएस अप्लाई किया है। हलांकि विद्या भूषण ने अपने वीआरएस पत्र में स्वास्थ्य के कारणों का हवाला दिया है। एक महीने में विद्या भूषण चौथे आईएएस अफसर हैं, जिन्होंने वीआरएस के लिए अप्लाई किया है।
विद्या भूषण मौजूदा समय में पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम में तैनात हैं। उनकी पत्नी आईपीएस अलंकृता सिंह हैं। कुछ दिन पहले ही बगैर सूचना दिए विदेश जाने के मामले में योगी सरकार ने अलंकृता सिंह को सस्पेंड किया था।
आईएएस विद्या भूषण प्रतापगढ़, इटावा व अमेठी में डीएम रह चुके हैं। उन्हें 27 अप्रैल 2021 को पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम वाराणसी का एमडी बनाया गया था। इसके अलावा गाजियाबाद विकास प्राधिकरण में ओएसडी पद पर भी उनकी तैनाती रही है। 2015 से 2017 के बीच विद्या भूषण गौतमबुद्धनगर में अडिश्नल कमिश्नर, वाणिज्यकर के पद पर तैनात रहे हैं।
विद्या भूषण से पहले तीन और आईएएस अफसर हैं, जिन्होंने वीआरएस के लिए अप्लाई किया है। इसमें दो अफसर मौजूदा समय में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर तैनात हैं। 1987 बैच की आईएएस रेणुका कुमार, 1988 बैच की आईएएस जूथिका पाटणकर और 2003 बैच के आईएएस विकास गोठलवाल ने भी स्वास्थ्य के कारणों का हवाला देते हुए वीआरएस के लिए अप्लाई किया था।
यहां बता दें कि नियुक्ति विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक वीआरएस अप्लाई करने के बाद स्वीकृति में तीन से चार महीने का समय लगता है। वीआरएस देने से पहले कई विभागों से एनओसी मांगी जाती है। इसके बाद अफसर को वीआरएस दिया जाता है।

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