261 करोड़ की बिक्री करके 6 दवा तस्करों ने बनाई करोड़ो की संपत्ति
दवा माफिया अमित सिंह टाटा के बाद उभर रहा है 6 और नशीले दवा माफियाओं के नाम
कोडिंन युक्त कफ सिरप तस्करी में पदुमपुर गांव का नाम सबसे ऊपर
जौनपुर। शासन की सख्ती के बावजूद कोडिंग युक्त प्रतिबंधित कफ सिरप की तस्करी करके करोड़ों रुपए की संपत्ति बनाने वाले जिले के नए दवा माफियाओं का नाम आते हैं पूरे पूर्वांचल में जबरदस्त हड़कम्प मचा है। एसटीएफ के हाथों दो दिन पहले गिरफ्तार अंतरराष्ट्रीय तस्कर अमित सिंह टाटा के बाद जौनपुर में अगर तस्करी के बड़े धंधे का नाम सबसे ऊपर उभर रहा है तो वह है सरायख्वाजा थाना अंतर्गत पदुमपुर और चितरसारी गांव।इस गांव के रहने वाले आधा दर्जन दवा कारोबारी ने अपनी विभिन्न फर्मो और कुछ बिना कागजात के ही फर्जी तरीके से 261 करोड रुपए के नशीले कफ सिरप की बिक्री खुले बाजार में कर दी है।
जिला औषधि निरीक्षक रजत कुमार पांडेय ने ऐसे ही कुछ चिन्हित दवा कारोबारी के खिलाफ नगर कोतवाली में मुकदमा दर्ज करने की तहरीर दे दिया है।
इस संबंध में जिला औषधि निरीक्षक श्री पांडेय ने बताया कि उक्त चिन्हित फर्म ने विभाग द्वारा दिए गए लाइसेंस और विक्रय अनुज्ञप्ति का दुरुपयोग करते हुए कोडिंग युक्त 1,86, 475 सौ एमएल की बोतल को अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में 261 करोड़ रुपए का अवैध कारोबार खुले बाजार में नशे के प्रयोगार्थ
किया है।
विभागीय सूत्र बताते हैं कि सरायख्वाजा थाना अंतर्गत पदमपुर और चितरसारी गांव के आधा दर्जन दवा कारोबारी कोडिंग कफ सिरप के मामले में लंबे समय से लिप्त चल रहे हैं। इन दवा माफियाओं के खिलाफ आज तक न तो कभी कानून का फंदा कसा गया। न ही तस्करी से बनाए गए इनकी करोड़ों की संपत्तियों की जांच हुई ।
शासन सत्ता और समाज की आड़ लेकर यह दवा माफिया लंबे समय से फलते फूलते रहे हैं।
फिलहाल यहां के सभी बड़े कारोबारी इस समय प्रदेश एसटीएफ के निशाने पर आ गए हैं।
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