टीईटी अनिवार्यता पर भड़के शिक्षक, जयंत चौधरी का पुतला फूंका
आरटीई लागू होने से पूर्व कार्यरत शिक्षकों को टीईटी से मुक्त करे सरकार: अरविंद शुक्ला
शिक्षकों का कहना है कि संसद द्वारा 1993 में पारित एनसीटीई अधिनियम के तहत देशभर में भर्ती और कार्यरत लगभग 20 लाख शिक्षकों की सेवा पर सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्णय के बाद संकट गहरा गया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि बीते छह माह से केंद्र सरकार इस मुद्दे पर कोई ठोस पहल नहीं कर रही है, जिससे शिक्षकों में असमंजस और रोष व्याप्त है।
विरोध सभा को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष अरविंद शुक्ला ने कहा कि आरटीई एक्ट लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से मुक्त किया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि एनसीटीई के वर्ष 2017 के संशोधन ने शिक्षकों के भविष्य पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। यदि सरकार इस संशोधन को निरस्त कर पूर्व कार्यरत शिक्षकों को राहत नहीं देती है तो शिक्षक आर-पार की लड़ाई लड़ने को बाध्य होंगे और आवश्यकता पड़ी तो दिल्ली में धरना देंगे।
प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने “काला कानून में संशोधन करो” और “नोटेट बिफोर आरटीई एक्ट” जैसे नारे लगाए। इस अवसर पर लाल साहब यादव, रविचंद यादव, शिवेंद्र सिंह रानू, लक्ष्मीकांत सिंह, राजेश बहादुर सिंह, वीरेंद्र प्रताप सिंह, मनोज यादव, धर्मेंद्र यादव, विक्रम प्रकाश, सुनील, श्यामलाल मौर्य, संजय यादव, उषा सिंह, निरुपमा सिंह, छाया सिंह, भारती सिंह, प्रियंका सिंह, नीतू सिंह, गीता यादव, सुषमा सिंह, अखिलेश त्रिपाठी, उमेश चंद्र चतुर्वेदी, विष्णु तिवारी, संतोष सिंह, पवन सिंह, रेनू सिंह, मालविका सिंह, दीपक सिंह, अरुण सिंह, अनुराग तिवारी, सरोज सिंह, देशबंधु यादव, अनिल दीप चौधरी, ओंकार पाल, विमल यादव समेत हजारों शिक्षक मौजूद रहे।
शिक्षकों ने चेतावनी दी कि मांगें न माने जाने पर आंदोलन को प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर तक तेज किया जाएगा।
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