बरेली सेंट्रल जेल से बाहर निकलने पर जौनपुर के लिए रवाना हुए धनंजय सिंह


मुझे फर्जी मुकदमें फंसा कर सजा कराई गयी  - धनंजय सिंह 

जौनपुर। जिले के पूर्व सांसद व बाहुबली नेता धनंजय सिंह आखिरकार बुधवार की सुबह आठ बजे बरेली सेंट्रल जेल से रिहा हो गये। बीते शनिवार को सुबह आठ बजे उन्हें जौनपुर के जिला कारागार से बरेली जेल शिफ्ट किया गया था। उसी दिन प्रयागराज हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत भी दी थी। 
धनंजय सिंह को नामामि गंगे प्रोजेक्ट के मैनेजर के अपहरण व रंगदारी के मामले में जौनपुर दीवानी न्यायालय की एमपी-एमएलए कोर्ट के तत्कालीन जज शरद चन्द त्रिपाठी ने छह मार्च को सात साल की सजा सुनाई थी। उस मामले में वादी अभिनव सिंघल ने 10 मई 2020 को लाइन बाजार थाने में पूर्व सांसद धनंजय सिंह समेत दो के खिलाफ अपहरण व रंगदारी की प्राथमिकी दर्ज कराई थी। 
पुलिस ने विवेचना करके तीन माह के अंदर कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। कोर्ट ने दो अप्रैल 2022 को धनंजय व सहयोगी पर आरोप तय किया था। इसके बाद 130 तारीखों की सुनवाई के बाद पांच मार्च 2023 को धनंजय सिंह सहित दो को दोषी पाया। इसके बाद छह मार्च 2024 को सजा सुनाई गई। 
बीते शनिवार को शासन के आदेश के क्रम में जौनपुर पुलिस ने धनंजय सिंह को बरेली सेंट्रल जेल शिफ्ट किया। इस मामले में सोमवार को कोर्ट की सभी औपचारिकताएं पूरी कर मंगलवार को जौनपुर जिला जेल के अधीक्षक एसके पांडेय द्वारा रिहाई का परवाना रेडियो मैसेंजर के जरिए बरेली सेंट्रल जेल को भेज दिया गया था। 
बुधवार को सुबह ही आठ बजे पूर्व संसद धनंजय सिंह को बरेली सेंट्रल जेल से रिहा किया गया। देर शाम तक वे जौनपुर पहुंचेंगे। जौनपुर आकर अपनी पत्नी जो कि बसपा के टिकट पर जौनपुर लोकसभा सीट से प्रत्याशी हैं, उनके लिए प्रचार करेंगे। चार मई को श्रीकला सिंह अपने पति धनंजय सिंह के साथ नामांकन करेंगी।
जेल से बाहर निकलते हो धनंजय सिंह मीडिया से रूबरू होते हुए कहा कि वर्ष 2020 में मुझे फर्जी मुकदमे फंसाया गया और उसी फर्जी मुकदमे में मुझे चुनाव से रोकने के लिए छह मार्च 2024 को मेरी सजा करा दी गई और जेल में कैद करा दिया गया था लेकिन उच्च न्यायालय हाईकोर्ट ने रिहाई का आदेश दे दिया है। पत्नी बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ रही है अब जौनपुर पहुंच कर पत्नी के चुनाव प्रचार की कमान संभालेंगे। 

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