आखिर जिम्मेदार सरकारी तंत्र का शहीद स्तम्भ के प्रति उपेक्षात्मक रवैया क्यों है ?



जौनपुर। शहीदों के सम्मान के प्रति राजनैतिको से लेकर प्रशासनिक लोंगो द्वारा चाहे जितने दावे किये जाते रहें है लेकिन जमीनी हकीकत से रूबरू होने पर सच की पोल खुल ही जाती है। ऐसा ही एक शहीद स्तम्भ का मामला प्रकाश में आया है जहां कूड़ो का अम्बार लगा हुआ है। ग्रामीण जनों द्वारा लगातार प्रशासन के जिम्मेदार लोंगो का ध्यानाकर्षण किये जानें के बाद भी जब सरकारी अमला नहीं ध्यान दिया तब गांव के ग्रामीणों को शहीद स्थली की साफ सफाई का दायित्व संभालना पड़ा है। 
जी हां जनपद मुख्यालय से लगभग 20 किमी दूर मुफ्तीगंज बाजार में शहीद जंग बहादुर पाठक का एक स्तम्भ बना हुआ है जहां कूड़े का अम्बार लगा हुआ है। जिसका लोकार्पण पूर्व प्रधानमंत्री स्व लालबहादुर शास्ती ने किया था। स्व जंग बहादुर पाठक के बिषय में बताया जाता है कि स्वतंत्रता आन्दोलन के दौरान इनके द्वारा जनपद मुख्यालय पर 44 अंग्रेजो की मार गिराया गया था अंग्रेजी सेना तलाश करते हुए केराकत क्षेत्र स्थित पसेवां के पास से जंग बहादुर पाठक गिरफ्तार हो गये और कारावास में डाल दिया अंग्रेजी हुकूमत की असह्य प्रताड़ना से वे शहीद हो गये। इसके बाद पूर्व प्रधानमंत्री स्व लालबहादुर शास्त्री जी प्रेरणा से मुफ्तीगंज बाजार में शहीद स्तम्भ बनवाया गया। जो आज कूड़ा घर के रूप में तब्दील हो चुका है। 
शहीद जंग बहादुर पाठक के परिजन स्थानीय प्रशासन सहित जिला प्रशासन और इलाके के राजनैतिको से शहीद स्तम्भ स्थल पर साफ सफाई के लिए कई बार आग्रह किया लेकिन किसी भी स्तर से कोई सहयोग न मिलने पर ग्रामीण जन खुद की इस शहीद स्थल को साफ सुथरा बनाने का संकल्प लिया और सफाई कराया। यहां सवाल इस बात का है कि आखिर शहीदों के सम्मान का दावा करने वाले इस शहीद के प्रति उपेक्षात्मक रवैया क्यो अख्तियार किये है। अंग्रेजों का मार कर हमें आजद भारत में सांस लेने के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वालों के प्रति क्या जिम्मेदार लोंगो की कोई जिम्मेदारी नहीं है ?



 

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