मासूम कक्षा तीन की छात्रा के साथ दुष्कर्म की घटना से नाराज अभिभावक और अधिवक्ताओ ने किया प्रदर्शन


स्कूल में मासूम के साथ हुए दुष्कर्म को लेकर लोगों में आक्रोश है। दरिंदगी से नाराज अधिवक्ताओबड़ा गुस्सा कचहरी परिसर में फूटा । सैकड़ों की संख्या में अधिवक्ताओं ने कोर्ट परिसर में धरना प्रदर्शन किया। तो दूसरी ओर आज सोमवार को बड़ी संख्या में अभिभावक गण स्कूल पहुँच कर जबरदस्त हंगामा किया है। घटना से अन्य छात्राओं के अभिभावक भी दहशत में हैं। आक्रोशित अभिभावक स्कूल की शाखा के सामने बड़ी संख्या में जुटे अभिभावकों ने प्रिंसिपल के इस्तीफे की मांग की और जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के लिए भी आवाज़ उठाई।
हंगामा बढ़ने पर स्कूल प्रबंधन ने अभिभावकों को अंदर बुलाकर उनसे बातचीत की। स्कूल ग्रुप के चेयरमैन दीपक मधोक ने खुद अभिभावकों से बातचीत की और भविष्य में ऐसी किसी तरह की घटना न हो इसे लेकर आश्वस्त करने की कोशिश की।
अभिवावकों ने सात सूत्रीय एजेंडे में स्कूल के 50 वर्ष पूरे होने पर आयोजित गोल्डन जुबली कार्यक्रम को तुरंत स्थगित करने की भी मांग की है। अभिवावकों एजेंडा के बारे में बताया कि प्रिंसिपल नैतिकता के आधार पर अपना इस्तीफा दें। सपोर्टिंग स्टाफ और सभी स्वीपर्स का बैकग्राउंड चेक किया जाए और बिना वेरिफिकेशन किसी को न रखा जाए। 
अभिभावकों ने सीसीटीवी मॉनिटरिंग पर भी सवाल उठाए। कहा कि मॉनिटरिंग के लिए अलग स्टाफ रखा जाए। स्कूल प्रबंधन ने पहले आनाकानी के बाद अभिभावकों से वार्ता की और उनकी सभी मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया।
अभिभावकों ने चेयरमैन दीपक मधोक से कई तीखे सवाल किए। जिसका उन्होंने एक-एक कर जवाब दिया। बताया कि बच्ची के साथ गलत काम हुआ, मगर इसका पता घर जाने के बाद चला। हमने इस तरह की स्थिति से निपटने के लिए एक टीम बना दी है। हालांकि उन्होंने माता-पिता की मांगों को पूरा करने का सीधा आश्वासन नहीं दिया। लोगों ने आरोप लगाया कि वह केवल गोल-गोल घुमाते रहे।
अभिभावकों का गुस्सा पुलिस पर भी दिखाई दे रहा है। उनका कहना है कि इस मामले की जांच एसआईटी के हवाले है। डीसीपी वरुणा जोन विक्रांत वीर इस मामले की जांच कर रहे हैं। मगर आज चौथा दिन है अभी तक स्कूल के जिम्मेदारों को नोटिस देकर छोड़ दिया गया है। लड़कियों के टॉयलेट में पुरुष स्वीपर क्या कर रहा था। स्कूल में कितने महिला-पुरुष स्टाफ हैं और उनका बैकग्राउंड क्या है, इसका जवाब स्कूल मैंनेजमेंट से क्यों नहीं लिया जा रहा है।
स्कूल के बाहर मौजूद लोगों ने कहा कि भले ही जांच कर रिपोर्ट सात दिन में सौंपें, मगर प्रबंधन के दोषियों को सलाखों के पीछे अब तक क्यों नहीं लाया गया। किसी के घर में एक छोटा सा कांड हो जाए तो पुलिस वाले पूरे खानदान को साल-साल भर प्रताड़ित करते हैं। मगर, इस मामले को वीआईपी समझकर पुलिस उस तरह से काम नहीं कर रही है। पुलिस क्यों नहीं पूछती कि आखिरकार स्कूल एक साल में कितना रेवेन्यू बनाता है और उसका कितना खर्च सुविधाओं, स्टाफ की सैलरी और प्रबंधन में जाता है।

स्कूल के प्रिंसिपल से तत्काल इस्तीफा लिया जाए।

घटना के दिन स्कूल की दूसरी शाखा में गोल्डेन जुबली मनाए जाने जैसी कृत्य पर माफी मांगी जाए।

सभी स्टाफ के कार्ड और आईडी फिर से चेक किए जाएं

स्कूल में CCTV सर्विलांस बनाई जाए। वहीं एक अलग स्टाफ नियुक्त करके अंदर चल रही गतिविधियों की इससे पूरे स्कूल टाइमिंग में मॉनिटरिंग हो।

गर्ल्स वाशरूम में केवल महिला स्वीपर ही काम करे।

कोई भी स्वीपर या चपरासी गर्ल्स वाशरूम के आसपास न जाए।

वाशरूम में जब साफ-सफाई चल रही हो तो बाहर नोटिस बोर्ड लगाया जाए कि वाशरूम में साफ-सफाई चल रही है कोई स्टूडेंट अंदर न आए।

अधिवक्ताओं का फूटा गुस्सा, कचहरी परिसर में प्रदर्शन

स्कूल में मासूम के साथ हुए दुष्कर्म को लेकर लोगों में आक्रोश है।  दरिंदगी से नाराज अधिवक्ताओं को गुस्सा फूट पड़ा। सैकड़ों की संख्या में अधिवक्ताओं ने कोर्ट परिसर में धरना प्रदर्शन किया। उन्होंने विद्यालय प्रबंधन पर बच्चों के देखरेख की व्यवस्था सवाल खड़ा किया। इस दौरान मौके पर पुलिस बल भी पहुंच गई थी। अधिवक्ताओं का कहना है इस मामले में स्कूल के प्रबंधक पर मुकदमा दर्ज होना चाहिए। इससे पहले रेप के आरोपी की पेशी के दौरान भी अधिवक्ताओं का गुस्सा दिखाई दिया था। आरोपी को अधिवक्ताओं ने पेशी के दौरान पिटाई की थी।
लहरतारा स्थित स्कूल की शाखा पर शुक्रवार को कक्षा तीन की छात्रा के साथ वॉशरूम में रेप की वारदात को अंजाम दिया गया। स्कूल के ही स्वीपर ने शर्मनाक हरकत की। इस दौरान स्कूल बेखबर रहा। डरी सहमी छात्रा घर पहुंची मां को रोते हुए आपबीती सुनाई। इसके बाद परिजन स्कूल पहुंचे। घंटों वारदात को दबाने की कोशिश होती रही। परिजन नहीं मानें और पुलिस को सूचना दी गई। इसके बाद स्वीपर को गिरफ्तार किया गया। मामले की जांच के लिए एसआईटी भी बनाई गई है। 

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