मामूली विवाद में बार बेंच आमने सामने,सफर कर रहा वादकारी, अधिवक्ता संघ के महामंत्री पर फर्जी मुकदमा

जौनपुर। कानून मानता है कि वादकारियों को न्याय दिये जानें के लिए बार और बेंच के बीच आपसी सौहार्द एवं सम्मान तथा विश्वास जरूरी है लेकिन जब बार और बेंच के बीच विवाद और खांयी बन जाये तो न्याय कैसे मिल सकेगा यह एक बड़ा एवं अनुत्तरित सवाल जनपद जौनपुर के कलेक्ट्रेट में बार और बेंच के बीच उत्पन्न विवाद ने खड़ा कर दिया है। अधिवक्ता समाज न्यायिक कार्य से विरत रह कर हड़ताल पर जानें को मजबूर हो गया है। 
घटना यह है कि विगत 05 अप्रैल 22 को चकबन्दी विभाग के चकबन्दी अधिकारी (सीओ) बदलापुर के न्यायालय में अधिवक्ता न्यायिक कार्य से गये थे न्यायालय के पेशकार विद्यासागर सोनकर से कुछ बतकही हो गयी तो सोनकर द्वारा अधिवक्ता समाज के प्रति अपशब्दो का प्रयोग कर दिया गया। इसकी खबर बार के महामंत्री आन्नद मिश्रा को हुई तो वह पूछताछ के लिए सीओ बदलापुर के न्यायालय में पहुंच गये तो पेशकार उनसे भी उलझ गये इसके बाद आपस में हाथापाई की नौबत आ गयी। 
इस घटना के बाद अधिवक्ता और कर्मचारी आपस में बैठकर वार्ता किये और समझौता कर लिये लेकिन बाद में इस प्रकरण में अधिकारियों का हस्तक्षेप शुरू हो गया और एक वरिष्ठ अधिकारी के दबाव में बार के महामंत्री आन्नद मिश्रा के खिलाफ पेशकार की तहरीर पर थाना लाइन बाजार में अपराधिक धाराओ 323, 504, 506, 332, 353 भादवि एवं एचसी एचटी एक्ट का मुकदमा दर्ज कर बिवेचना सीओ सिटी जितेन्द्र दूबे को सौंप दी गयी। 
मुकदमा पंजीकृत होने के बाद अधिवक्ता जिले के शीर्ष अधिकारियों से संपर्क कर बार के महामंत्री पर दर्ज फर्जी मुकदमें को खत्म कराने की मांग किया लेकिन कोई हल न निकलने पर अधिवक्ता भी लाम बन्द होकर 06 मार्च 22 से न्यायिक कार्यो का बहिष्कार करते हुए हड़ताल पर चले गये है।अधिवक्ता अंड़ गया है कि जब तक उनके संगठन के महामंत्री के उपर दर्ज मुकदमा खत्म नहीं होगा तब तक कोई काम नहीं किया जायेगा। इस तरह घटना उपरोक्त को लेकर बार और बेंच आमने सामने हो गये है और इन दोनो की लड़ाई में वादकारी सफर करने को मजबूर हो गया है। 
यहां एक बात यह भी है कि बार का महामंत्री होने की सजा में अधिकारी आन्नद मिश्रा को मुजरिम बना दिया है। अधिकारियों के इस कृत्य से अधिवक्ता समाज खासा नाराज भी नजर आ रहा है। खबर यह भी है कि अब इस अपराधिक मुकदमे के क्रास का भी मुकदमा अधिवक्ता समाज भी दर्ज कराने की योजना बना रहा है।अधिवक्ताओ की ओर से मुकदमा दर्ज कराये जानें बाद लड़ाई लम्बी और आर पार की संभावित है ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि वादकारियों वादों का क्या होगा। और कब तक न्याय के लिए कोर्ट की चौखट पर एड़िया रगड़ने को मजबूर रहेंगे। 

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