राजनीति में अब धर्म का प्रवेशःअयोध्या के बाद लोकसभा चुनाव से पहले मथुरा और काशी बन सकता है मुद्दा,जानें क्या होगा असर


काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर और अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर के निर्माण के बाद अब मथुरा सियासत का नया केंद्र होगी। राजस्थान विधानसभा चुनाव का प्रचार समाप्त होने के तुरंत बाद पीएम मोदी ब्रज भूमि पहुंचे। मीराबाई जन्मोत्सव समारोह में मोदी ने जिस तरह अपने पंच प्रण का उल्लेख कर प्रतिबद्धता जताई और श्रीकृष्ण जन्मभूमि के दर्शन किए, उसे लोकसभा चुनाव की तैयारी के आगाज के रूप में देखा जा रहा है।
मथुरा में मीराबाई की 525वीं जयंती पर हुए कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने लालकिले की प्राचीर से घोषित अपने पंचप्रण की याद दिलाई। इसमें विरासत पर गर्व के साथ आगे बढ़ने की बात कही गई थी। प्रधानमंत्री ने धार्मिक आस्था से जुड़ी विरासतों का उल्लेख कर कहा कि काशी में विश्वनाथधाम का भव्य स्वरूप हमारे सामने है। उज्जैन महालोक में दिव्यता और भव्यता के साथ महाकाल के दर्शन हो रहे हैं। केदारघाटी में केदारनाथ के दर्शन कर लाखों लोग धन्य हो रहे हैं। अयोध्या में भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा की तारीख भी घोषित हो गई है। उन्होंने संकेत दिया कि मथुरा और ब्रज भी विकास की दौड़ में पीछे नहीं रहेंगे। वह दिन दूर नहीं जब ब्रज क्षेत्र में भी भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन दिव्यता के साथ होंगे। कहा कि हम विरासत पर गर्व के साथ आगे बढ़ रहे हैं।
हिंदू संगठन लगातार अयोध्या के साथ काशी विश्वनाथ और मथुरा के पुनरुद्धार की आवाज उठाते रहे हैं। राम मंदिर का पुनरुद्धार हिंदू संगठनों की अपेक्षाओं की अनुरूप हो रहा है। काशी विश्वनाथ और मथुरा की कानूनी लड़ाई तेज है। यह बात आम लोगों को बताई जा रही है कि यदि भाजपा सत्ता में न होती तो इन धार्मिक स्थलों का पुनरुद्धार संभव नहीं था। मोदी का श्रीकृष्ण जन्मस्थान का दर्शन करने जाना, अयोध्या और काशी की तरह मथुरा में कृष्ण जन्मस्थान को लेकर उनकी प्रतिबद्धता का संकेत देना है। मोदी पहले प्रधानमंत्री हैं जो श्रीकृष्ण जन्मभूमि गए हैं। राजनीतिक विश्लेषक जेपी शुक्ला का मानना है कि प्रधानमंत्री ने बहुसंख्यक समाज को साफ संदेश दिया कि मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि के मुद्दे पर वह पीछे नहीं हटेंगे। लोग कुछ भी करें, इससे भाजपा को सियासी लाभ तो होगा ही।
राजनीतिक विश्लेषक वशिष्ठ नारायण सिंह का मानना है कि प्रधानमंत्री ने पंचप्रण में काशी विश्वनाथ धाम, केदारनाथ धाम, महालोक धाम और अयोध्या में राम मंदिर के बाद मथुरा के विकास की बात कर हिन्दुत्व को धार देने का काम किया है। मोदी ने संदेश दिया कि राष्ट्रवाद से जुड़े मुद्दों को उन्हीं ने पूरा किया है, जो बचे हैं उन्हें भी भगवान के आशीर्वाद और जनता के समर्थन से पूरा करेंगे।
प्रधानमंत्री ने भाषण की शुरुआत और समापन राधे-राधे और जय श्रीकृष्ण बोलते है। अपने भाषण में  मोदी ने बृज क्षेत्र में हो रहे विकास को राष्ट्र के बदलते स्वरूप और पुनः जागरूक होती चेतना का प्रतीक बताया। मोदी ने कहा कि महाभारत इसका प्रमाण है कि जहां भारत का पुनरुत्थान होता है उसके पीछे भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद होता है। भगवान कृष्ण के आशीर्वाद से विकसित भारत के निर्माण का संकल्प पूरा करेंगे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि बृज क्षेत्र ने मुश्किल से मुश्किल समय में देश को संभाले रखा। उन्होंने कहा कि जब देश आजाद हुआ तो बृज क्षेत्र को जो महत्व मिलना चाहिए था दुर्भाग्य से वह नहीं मिला। कहा कि, जो लोग भारत को उसके अतीत से काटना चाहते थे, भारत की आध्यात्मिक पहचान से विरक्त थे वह आजादी के बाद भी गुलामी की मानसिकता से ग्रसित थे। उन्होंने बृज भूमि को विकास से वंचित रखा।
प्रधानमंत्री ने राजस्थान विधानसभा चुनाव प्रचार के अंतिम दिन मथुरा से राजस्थान के मारवाड़ी वोट बैंक को साधा। जानकारों का मानना है कि बड़ी रणनीतिक सोच के साथ कार्यक्रम के लिए दिन और समय तय किया गया। मोदी ने मथुरा में मीरा बाई के 525वीं जयंती समारोह को संबोधित किया, लेकिन उनके एजेंडे पर राजस्थान का मारवाड़ी समाज रहा। इस तरह वर्तमान राजनीति में जो परिदृश्य नजर आ रहा है वह स्पष्ट रूप से संकेत कर रहा है कि सियासत से विकास का मुद्दा अब गौड़ हो चला है धार्मिक मुद्दे पर देश की आवाम को ले जाने का खेल बड़ी बारीकी के साथ करते हुए सत्ता पर काबिज रहने की जुगत लगाई जा रही है। हलांकि राजनैतिक समीक्षक मानते है कि ऐसी सियासत से देश कमजोर हो सकता है और अर्थ व्यवस्था खासा प्रभावित हो सकती है।

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