वाह रे प्रशासन दोहरा मानक क्यों? एक ओर भीषण तपिश से बचाव की सलाह,दूसरी ओर बच्चो को तपती दोपहरी में जलने का आदेश


जौनपुर। आधा अप्रैल बीतने के साथ ही गर्मी के मौसम ने जबरदस्त करवट लेते हुए तापमान को तेजी से उपर बढ़ाने लगा है। आज 19 अप्रैल को दोपहर का तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहा। तपते मौसम में सरकारी तंत्र के हुक्म और एडवाइजरी आम जनमानस के लिए कुछ है तो कक्षा से आठ तक के छोटे बच्चो को शिक्षा देने लिए कुछ और ही आदेश जारी है जिसके कारण बच्चे इस भीषण तपिश में जलने को मजबूर हो गए है। सरकारी तंत्र के दो मुहे हुक्म सवालो के कटघरे में खड़ा नजर आ रहा है।
शासन के निर्देश पर स्वस्थ्य विभाग के शीर्ष अधिकारी सीएमओ लगातार लू और धूप से बचाव के लिए एडवाइजरी जारी करते है कि आम जनमानस दोपहर में घरो के बाहर अधिक न निकले यहा तक कि दिन में 12 बजे से सायं चार बजे तक घर के अन्दर रहने की सलाह दे रहे है। बहुत जरूरी हो तभी दिन में मुंह और सिर ढककर खूब पानी का सेवन करते हुए बाहर निकला जाये ताकि लू और धूप तपिश से बचा जाए। 
ठीक इसके विपरीत बेसिक शिक्षा विभाग के निदेशक ने एक आदेश जारी करते हुए कक्षा एक से आठ तक के बच्चो की पढ़ाई का समय सुबह साढ़े सात बजे से दिन में दो बजे तक कर दिया है। निदेशक के इस आदेश से छोटे बच्चे दिन में दो बजे जब तापमान का पारा 45 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहता है उसी कड़कती धूप में नौनिहाल जलते हुए अपने घरो को जाने के लिए मजबूर है। 
आम जनमानस की चिन्ता तो सरकारी तंत्र को है लेकिन नौनिहालो की कोई चिन्ता सत्ता के गलियारो में एसी के अन्दर बैठकर हुक्म जारी करने वालो को आखिर क्यों नहीं है यह एक बड़ा सवाल शिक्षा विभाग के बड़े लम्बरदारो से है। क्या वह एसी से बाहर निकल कर छोटे बच्चो की पीड़ा का अहसास करेंगे। हलांकि बच्चो गार्जियन की अपील है कि सरकारी तंत्र इस पर गम्भीरतापूर्वक विचार करे अन्यथा की दशा में अब बच्चो के परिजन बच्चो को विद्यालय भेजने से परहेज करने को मजबूर होगे।क्योंकि बच्चे के जीवन के साथ खिलवाड़ कर शिक्षा दिलाने के पक्ष में नहीं है।

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