दोनों हाथ से विकलांग पुलिस की नजर में जानें कैसे बन गया डाकू,अब पुलिस अपने कृत्य पर पछता रही है


कभी कभी पुलिस ऐसा कृत्य करती है कि उसका असली अमानवीय चेहरा साफ दिखायी देने लगता है। अब एक ऐसा मामला प्रकाश में आया है कि दोनों हाथ से विकलांग पुलिस के अनुसार डाकू है। सवाल यह है कि जिस बुजुर्ग के दोनों हाथ ही न हो वह ताबड़तोड़ फायरिंग कैसे कर सकता है। पुलिस इससे इत्तेफाक नहीं रखती है। पुलिस की नजर में दिव्यांग बुजुर्ग फायरिंग भी कर सकता है और घर में जमकर लूटपाट मचाकर सोने चांदी के जेवर और कीमती सामान लूटकर ले जा सकता है। पुलिस एफआईआर और केस डायरी यही कह रही है। अब पुलिस ने जब जांच पड़ताल शुरू की तो बुजुर्ग के दोनों हाथ न देखकर दंग रह गई। आरोपी बनाए गए दिव्यांग के परिवार के लोग बारादरी थाने से लेकर एसएसपी से गुहार लगा रहे हैं। इसके बाद भूल सुधार करते हुए पुलिस डकैती के मुकदमे से बुजुर्ग का नाम बाहर करने जा रही है। 
यहां बता दे कि जनपद रायबरेली के जोगी नवादा चक महमूद की रहने वाली गुलफ्शा और उसके पति बिलाल के बीच मारपीट हो गई थी। इसके बाद गुलफ्शा अपने मायके में आ गईं। इसी कहासुनी के बाद 25 जून को जोगी नवादा के रहने वाले गुलफ्शा के परिवार के छात्र मुश्ताक की बिलाल पक्ष के लोगों ने बड़ा बाईपास पर गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसके बाद गुलफ्शा पक्ष के शकील ने जोगी नवादा के रहने वाले गुड्डू, अकरम, गटे, नाजिम, अफसर हाजी, अफजाल, दिव्यांग वकीलउद्दीन के खिलाफ डकैती का मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि वकीलउद्दीन जोगी नवादा में तमंचा राइफल से फायरिंग करते हुये शकील के घर में घुस गये। उन्होंने सोने की झुमकी, सोने की चेन, चांदी की पायल, 70 हजार रुपये लूट ले गये। शकील ने दीवार कूदकर अपनी जान बचाई। उस वक्त शकील के बच्चे घर पर नहीं थे। काफी देर तक हमलावर वहां बवाल करते रहे। इसके बाद फरार हो गये। शकील की तहरीर पर सातों आरोपियों के खिलाफ बलवा, डकैती समेत कई धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया। अब पुलिस की विवेचना में सामने आया कि वकीलउदीन के दोनों हाथ ही नहीं है। ऐसे में उन्होंने फायरिंग लूटपाट कैसे की।

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