प्रबंधक ने अपने कालेज के प्रोफेसर की जूते से की पिटाई, शिकायत के बाद कानून मौन क्यों?


जौनपुर। जनपद के एक महाविद्यालय में प्रबंधक द्वारा अपने कालेज के प्रोफेसर की पिटाई की खबर तेजी से वायरल हो रही है लेकिन इलाकाइ पुलिस द्वारा सूचना के बाद भी कोई कार्रवाई का न किया जाना भी चर्चा का बिषय बना हुआ है। आरोप है कि विश्वविद्यालय की परीक्षा के दौरान प्रैक्टिकल परीक्षा में अतिरिक्त शुल्क वसूली के लिए मना करने पर असिस्टेंट प्रोफेसर की पिटाई प्रबंधक ने की थी। यह भी आरोप लगाया गया कि प्रबंधक ने प्रोफेसर को अपने जूते से इतने मरा कि उन्हें शरीर पर कई जगह चोटें आई साथ ही उनके कपड़े भी फाड़ दियें गये। असिस्टेंट प्रोफेसर ने आरोपी के खिलाफ सिकरारा थानाध्यक्ष को तहरीर दी है।

बता दें कि सुभाष वर्मा नामक प्रोफेसर गोविंद बल्लभ पंत पीजी कॉलेज प्रतापगंज में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में नियुक्त हैं। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय की मुख्य परीक्षा चल रही है  जिसमें उन्हे सहायक केंद्र अध्यक्ष के रूप में       जिम्मेदारी मिली है। विगत गुरुवार को विद्यालय में परीक्षा समाप्त होने के बाद वह घर जाने की तैयारी कर रहे थे।

इस दौरान महाविद्यालय के प्रबंधक सुधीर कुमार उपाध्याय पहुंचे और उन पर प्रयोगात्मक परीक्षा में अतिरिक्त शुल्क वसूली के लिए दबाव बनाने लगे।असिस्टेंट प्रोफेसर सुभाष वर्मा ने बताया कि प्राचार्य ने कहा कि प्राचार्य जी ने प्रैक्टिकल परीक्षा में अवैध वसूली नहीं करने का आदेश दिया है और प्रबंधक द्वारा अतिरिक्त शुल्क वसूली के लिए दबाव बनाने पर उहोंने मना कर दिया। असिस्टेंट प्रोफेसर द्वारा इस तरह जवाब देना महा विद्यालय प्रबंधक को सही नहीं लगा वह खासे आवेस में आ गये और इस बात से नाराज होकर प्रबंधक ने जूते से प्रोफेसर पर हमलावर हो गये और उनकी पिटाई कर दी। प्रोफेसर ने ऐसा आरोप लगाया है कि मना करने के बावजूद प्रबंधक ने उन्हें चेहरे, हाथ, पीठ और सिर पर मारा। वहीं घटना के बाद असिस्टेंट प्रोफेसर ने सिकरारा थानाध्यक्ष से न्याय की गुहार लगाई है। सुभाष वर्मा जनपद जौनपुर में बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर तैनात हैं। प्रबंधक द्वारा दबंगई करने के बाद से वह असहज महसूस कर रहे हैं। असिस्टेंट प्रोफेसर सुभाष वर्मा का आरोप है कि प्रबंधक द्वारा उन्हें मारने के बाद हटा देने की भी धमकी दी गई है। हलांकि पुलिस द्वारा प्रोफेसर की तहरीर पर अभी तक कोई विधिक कार्यवाई का न किया जाना थाना पुलिस की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।यहां एक सवाल और है कि आखिर प्रबंधक अपने ही छात्रो से अधिक शुल्क लेकर शोषण क्यों कर रहे थे। जिम्मेदार अधिकारी इसे संज्ञान कब लेगे?


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