जौनपुर के दोनो संसदीय सीट पर राजनैतिक दलो के प्रत्याशीयों की कितनी है समाज में ग्राह्यता, क्या है सभी की पृष्ठभूमि

जौनपुर। लोकसभा चुनाव के छठे चरण के मतदान के लिए नामांकन प्रक्रिया अब शुरू होने के साथ ही जौनपुर जनपद के दोनो संसदीय क्षेत्र 73 जौनपुर लोकसभा और 74 मछलीशहर (सु) लोकसभा से सपा भाजपा और बसपा सहित अन्य छोटे मोटे दलो सहित निर्दल प्रत्याशी ताल ठोकते हुए जनता के बीच वोट की भीख मांगने पहुंच रहे है और मतदाताओ की चरण वंदना करते हुए विकास के झूठे वादो की घुट्टी पिलाना शुरू कर दिये है। लेकिन आजादी के बाद से झूठी घुट्टियों को सुनते हुए अब मतदाता नेताओ के किसी भी बहकावे से अलग हटकर अपनी  पसंद के नेता को मतदान करने की बात करने लगा है। मतदाता कहता है ये नेता जनता को कितना मूर्ख समझते है यह चुनाव के दौरान ही झलकता है। इनके वादो और दावों में आने पर जनता पांच साल तक ठगा महसूस करती है।
73 जौनपुर संसदीय क्षेत्र के प्रत्याशियों की बात की जाए तो यहां से सबसे पहले भाजपा ने महाराष्ट्र की राजनीति करने वाले नेता कृपाशंकर सिंह को चुनाव मैदान में उतारते हुए जौनपुर की सरजमी पर भाजपा का झण्डा उठा कर सड़क परे एड़ियां घिसने वाले और पार्टी के रीतियों नीतियों को जनता तक पहुंचाने कार्यकर्त्ताओ की घोर उपेक्षा कर दिया है। इसका असर भाजपा के कार्यकर्त्ताओ में दिखाई भी दे रहा है नेता चाहे जो बोले लेकिन कार्यकर्त्ताओ में वह जोश नहीं है जिसकी जरूरत है। इसी तरह मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी भी लम्बे समय तक इंतजार के बाद सपा के जिला स्तरीय दावेदार की आपसी द्वन्दता को देखते हुए सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने एक बड़ा ट्रम्प कार्ड खेलते हुए जन अधिकार पार्टी से गठबंधन करने के बाद जन अधिकार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश में मौर्य समाज के बड़े नेताओ में शुमार बाबूसिंह कुशवाहा को जौनपुर संसदीय सीट पर सपा के सिम्बल पर पीडीए का प्रत्याशी घोषित कर दिया है। यहां भी शुरूआती दौर में सपाई नेताओ के बीच कुछ खलबली थी लेकिन कार्यकर्ता पहले दिन से पूरे जोश में लग गये थे। राष्ट्रीय नेतृत्व का एक आदेश आते ही नेता भी लाइन पकड़ लिए लेकिन कुछ एक नेता जो आस्तीन के सांफ की तरह है उनसे खतरे की बू आ रही है। बाबूसिंह ऐसे नेताओ में शुमार है जो बसपा शासन काल में पूरी सरकार चलाने की क्षमता रखते रहे है।
बसपा भी बाहुबली नेता धनंजय सिंह की पत्नी श्रीकला धनंजय सिंह रेड्डी पर दांव खेलते हुए बड़ा ट्रम्प कार्ड खेला है। यहां बता दे कि जौनपुर संसदीय सीट से बाहुबली नेता धनंजय सिंह खुद चुनावी जंग में ताल ठोंक रहे थे लेकिन जिस दिन भाजपा से कृपाशंकर सिंह प्रत्याशी घोषित हुए उसके तीसरे दिन धनंजय सिंह कानून दांव पेंच के तहत जेल की सीखचों में कैद कर दिए गये और फिर सात साल की सजा देकर उन्हे चुनाव लड़ने से रोकने का खेल हो गया फिर धनंजय सिंह ने अपनी पत्नी श्रीकला रेड्डी को आगे किया और बसपा से टिकट हथियाने में कामयाब हो गये। अब धनंजय को जमानत भी मिल चुकी है। 
इस तरह जौनपुर संसदीय सीट इन तीनो प्रत्याशियों के कारण हाट सीट घोषित हो चुकी है। तीनो प्रत्याशी अपने अपने क्षेत्र के जबरदस्त खिलाड़ी है। तीनो में कोई किसी से कम नहीं है। अब नामांकन के बाद एक दूसरे के वोट बैंक में सेंधमारी का खेल तीनो राजनैतिक दलो के लोगो द्वारा शुरू हो गया है और जबानी जंग भी चालू हो चुकी है। कौन करेगा इस संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व यह तो चार जून के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
अब अगर मछलीशहर (सु)संसदीय क्षेत्र की बात करे तो यहा पर सपा भाजपा और बसपा तीनो दलो ने पासवान समाज पर दांव खेला है। भाजपा ने मछलीशहर सुरक्षित से सांसद वीपी सरोज जो अपने पिछले पांच साल के कार्यकाल में भाजपा के मूल मतदाता सवर्ण विरोधी गतिविधियों में शामिल रहे।आंकड़े बता रहे है कि लगभग एक हजार के आसपास सवर्ण क्षत्रिय और ब्राह्मण परिवार के लोगो को हरिजन बनाम सवर्ण के मुकदमे में फंसाने का काम किया है। ऐसे में सवर्ण इनके साथ क्या करेगा सहज अनुमान लगाया जा सकता है।
इसी तरह सवर्ण विरोधी केराकत के विधायक तुफानी सरोज की बेटी प्रिया सरोज पर सपा ने दांव लगाया है। पिता के कृत्य का असर बेटी के चुनाव पर पड़ना तय माना जा रहा है। सफलता कितनी मिलेगी यह तो भविष्य के गर्भ में है लेकिन इनसे भी क्षेत्र का सवर्ण खासा नाराज नजर आ रहा है। तीसरे कृपाशंकर सरोज है जो पंजाब काडर के आईएएस अधिकारी रहे है पहली बार बसपा के टिकट पर चुनाव के मैदान में है इनका पहला चुनाव होने के कारण इनसे अभी किसी भी समाज की नाराजगी नहीं है। इस तरह यहां से तीनो दलो के प्रत्याशी एक ही समाज के है। अब पार्टी गत मतदाताओ की संख्या बल इन तीनो का बल है। परिणाम तो चार जून को ही स्पष्ट होगा की जनता किसको अपना नेता मानती है।

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