जौनपुर में ऐसा भी विद्यालय है जहाँ महज आधा दर्जन बच्चों को पढ़ाते है तीन शिक्षक


 शासना देश की धज्जियां उड़ाते हुए नहीं बनता है एमडीएम के तहत भोजन  

     जौनपुर । प्रदेश की  योगी सरकार परिषदीय विद्यालयों में शिक्षण कार्यो को सुधारने का दावा तो बहुत कर रही है  लेकिन  परिषद के विद्यालय सायद  न सुधरने की कसम खा रखे है । आज भी बड़ी संख्या में परिषदीय विद्यालय ऐसे है  जहाँ पर शासना देश की खुले आम अवहेलना किया  जा रहा है । विभाग के शीर्ष अधिकारी से लगायत प्रशासन के अधिकारी भी कुछ नहीं कर पा रहे है । ऐसे विद्यालय बड़े धड़ल्ले के साथ  सरकार की मंशा पर  पानी फेरने का काम कर रहे है ।
यही नहीं सरकार सर्व शिक्षा अभियान के नाम पर  करोड़ों रुपये प्रति वर्ष पानी की तरह बहा रही है लेकिन  उसका कोई लाभ  शिक्षा के क्षेत्र में समाज को नहीं मिल रहा है क्योंकि  परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक इसके प्रति गंभीर नहीं है 
। और अधिकारी कागजी बाजीगरी का खेल करके अपनी पीठ थपथपा ले रहे है ।
ऐसे विद्यालयों की संख्या तो जनपद जौनपुर में अधिक हो सकती है " लेकिन यहाँ पर हांड़ी के चावल का एक दाना चेक कर पूरी हांड़ी के चावल का अनुमान लगाने का मुहावरा चरितार्थ है " जी हां जनपद जौनपुर के विकास खण्ड जलालपुर क्षेत्र स्थित ग्राम प्रधानपुर  में चल रहे पूर्व माध्यमिक विद्यालय  का मामला प्रकाश में आया है  यहाँ पर विद्यालय में कुल 35 बच्चों का पंजीयन है और इस विद्यालय में 3 शिक्षकों की तैनाती है । मजेदार बात यह है कि इस विद्यालयकी कक्षाओं में महज  4 से 8 बच्चों की उपस्थिति रहती है । इसकी जानकारी जिला प्रशासन के शीर्ष अधिकारी से लगायत विभाग के शीर्ष अधिकारी को बखूबी है लेकिन  उनके स्तर से अब तक कम से कम पंजीकृत छात्रों की उपस्थिति पूरी रखने के लिए कोई प्रयास नहीं किया जा सका है ।
बतादे  शासना देश है कि परिषदीय विद्यालयों में कम से कम 30 बच्चों की संख्या पर एक शिक्षक रखा जाना चाहिए । तो यहाँ पर महज 35 छात्र संख्या पर तीन शिक्षक क्यों और कैसे नियुक्त किये गये है । इसका जबाब विभाग के जिम्मेदार लोग नहीं दे पा रहे है । यहां पर भ्रष्टाचार की बू आ रही है ।
विद्यालय में उपस्थित बच्चों से चर्चा करने पर यह भी जानकारी मिली है कि इस विद्यालय में  एमडीएम योजना के तहत बच्चों को दोपहर में भोजन आदि नहीं दिया जाता है । हलांकि विद्यालय की प्रधानाध्यापिका  प्रतिमा सिंह  की  माने तो ग्राम प्रधान की दबंगयी के चलते विद्यालय में कभी भी एमडीएम योजना के तहत न तो भोजन बन सका है न ही बच्चों को दूध या फल आदि दिया जा सका है । प्रधानाध्यापिका कहती हैं प्रधान न तो  सामन देते हैं  न ही पैसा ही देते तो  योजना कैसे चलायी जा सकती है ।
 इसी क्रम में बच्चों की  उपस्थिति के बिषय में अपने एक शिक्षिका पर आरोप जड़ती है कि  शिक्षिका मानसिक रूप से कमजोर होने के चलते बच्चों को अकारण मारती पीटती है इसी लिए बच्चे विद्यालय आने से परहेज करते है । सच क्या है यह तो जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा । जांच कब होगी  शासना देश का पालन कब हो सकेगा यह तो प्रशासन एवं विभाग के शीर्ष अधिकारी जाने  लेकिन वर्तमान में इस विद्यालय में सरकार की मंशा पर बड़े धड़ल्ले से पानी फिर रहा है ।
जिलाधिकारी दिनेश कुमार सिंह  का कथन है कि मामला संज्ञान में आया है कोशिश होगी कि सभी पंजीकृत बच्चे विद्यालय में उपस्थित रहे । विद्यालय की जो भी समस्या हो उसे दूर किया जा सके । 
यह तो शिक्षा विभाग का एक उदाहरण है जिले में न जाने और कितने विद्यालय है जहाँ बच्चों की संख्या कम और शिक्षकों को संख्या अधिक है । जिला प्रशासन से लगायत विभाग के अधिकारी शिक्षण संस्थानों का निरीक्षण करने की विज्ञप्तियां जारी कर अपनी पीठ थपथपा रहे है  लेकिन ऐसी अव्यवथाओ पर नजर नहीं पहुंचती है ।

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