निरंकारी सामूहिक विवाह: 126 जोड़ों ने सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के आशीर्वाद से रचाई शादी


जौनपुर, 7 नवम्बर 2025। 78वें निरंकारी संत समागम के समापन उपरांत समालखा के पावन मैदानों में सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता रमित जी की पावन उपस्थिति में सादगीपूर्ण निरंकारी सामूहिक विवाह समारोह का आयोजन हुआ। इस अवसर पर भारत सहित विदेशों से आए 126 नवयुगल पवित्र परिणय सूत्र में बंधे और सतगुरु से अपने नवजीवन की मंगलकामनाओं का आशीर्वाद प्राप्त किया।

कार्यक्रम में भारत के विभिन्न राज्यों — बिहार, चंडीगढ़, दिल्ली, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड — के साथ-साथ ऑस्ट्रेलिया और कनाडा से भी युगल सम्मिलित हुए।
जनपद जौनपुर के कुडरियां और जासोपुर शाखा से भी दो नवयुगल इस पावन आयोजन का हिस्सा बने।

स्थानीय मीडिया सहायक उदय नारायण जायसवाल ने बताया कि समारोह का शुभारंभ पारंपरिक जयमाला और निरंकारी सांझा-हार से हुआ। तत्पश्चात निरंकारी लावों का हिंदी में भक्तिमय गायन किया गया, जिनकी प्रत्येक पंक्ति नवविवाहितों के लिए जीवन की आध्यात्मिक शिक्षाओं और गृहस्थ जीवन की कल्याणकारी दिशा का संदेश दे रही थी।
सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता रमित जी ने सभी नवयुगलों पर पुष्पवृष्टि कर उन्हें सुख, समर्पण और प्रेम से परिपूर्ण जीवन का आशीर्वाद दिया।

इस अवसर पर संत निरंकारी मंडल के सचिव श्री जोगिन्दर सुखीजा जी ने बताया कि समाज कल्याण विभाग के सहयोग से यह आयोजन प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी सादगी, समरसता और “अनेकता में एकता” के संदेश को प्रसारित करता रहा।

सतगुरु माता जी ने नवविवाहितों को आशीर्वचन देते हुए कहा —
“विवाह केवल दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि दो परिवारों का पवित्र संगम है। यह मिलन बराबरी, सहयोग और प्रेम का प्रतीक है। विवाहित जीवन में जब दोनों एक-दूसरे को प्रोत्साहित करते हैं, तभी जीवन की यात्रा संतुलन और सामंजस्य के साथ आगे बढ़ती है।”

अंत में सतगुरु माता जी ने सभी नवविवाहितों के उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना करते हुए कहा कि “यह पवित्र मिलन प्रेम, सौहार्द और खुशियों का प्रतीक बनकर ताउम्र स्थायी रहे।”

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