ओबीसी आरक्षण बिल लोकसभा में ध्वनिमत से पास, जाने किसने क्या दिया अपनी प्रतिक्रिया



राज्यों को ओबीसी आरक्षण की सूची तैयार करने का अधिकार देने वाला बिल लोकसभा में  मंगलवार को ध्‍वनिमत से पारित हो गया। ओबीसी आरक्षण से जुड़े संशोधन बिल को लोकसभा में चर्चा के बाद हरी झंडी दी गई। इस दौरान एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्‍होंने आरोप लगाया कि ओबीसी आरक्षण बिल को मोदी सरकार शाहबानो की तर्ज पर लाई है। मुसलमानों को आरक्षण नहीं सिर्फ खजूर मिलेगा। चर्चा के दौरान उन्‍होंने पूछा कि ओबीसी का उप वर्गीकरण किस प्रकार से किया जाएगा? ओवैसी ने आरक्षण की 50 फीसदी की सीमा को हटाने की सरकार से मांग की। विपक्ष के तमाम नेताओं ने इस दौरान चर्चा में हिस्‍सा लिया। सभी ने बिल को समर्थन देने के साथ सरकार पर निशाना साधा।
ओवैसी ने कहा कि भाजपा सरकार OBC समाज के हित में नहीं है, बल्कि सिर्फ उनके वोट के लिए है। आज ही के दिन 1950 में मुसलमान और ईसाई दलितों को SC की लिस्ट से महरूम कर दिया गया था। सरकार जल्द से जल्द मजहब के बुनियाद पर आरक्षण को खत्‍म करे।
कांग्रेस नेता और सदन में पार्टी के नेता अधीर रंजन चौधरी ने 'संविधान (127वां संशोधन) विधेयक, 2021' पर चर्चा की शुरुआत करते हुए आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की गलती के कारण ही यह विधेयक लाना पड़ा है। वह उत्तर प्रदेश और कुछ राज्यों के चुनाव को ध्यान में रखकर ही इसे लाई है। पार्टी ने ओबीसी से संबंधित संशोधन विधेयक का समर्थन किया। कहा कि केंद्र सरकार आरक्षण की 50 फीसदी की सीमा को हटाने पर विचार करे ताकि महाराष्ट्र में मराठा समुदाय और दूसरे कई राज्यों में लोगों को इसका लाभ मिल सके। चौधरी ने कहा, 'हम इस विधेयक पर चर्चा में भाग ले रहे हैं क्योंकि यह संविधान संशोधन विधेयक है। इसमें दो तिहाई बहुमत के समर्थन की जरूरत है। हम एक जिम्मेदार दल हैं, इसलिए हम इसमें भाग ले रहे हैं।'
अखिलेश ने लगाया गुमराह करने का आरोप
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा पर ओबीसी वर्गों को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि आरक्षण की 50 फीसदी की सीमा को बढ़ाया जाए व जातिगत जनगणना के आंकड़ों को जारी किया जाए। उन्होंने कहा कि अगर उत्तर प्रदेश में उनकी सरकार बनती है तो वह जातिगत जनगणना कराएंगे। अखिलेश बोले, 'अगर इतना महत्वपूर्ण विधेयक पारित हो रहा है तो उसी के साथ आरक्षण की सीमा को बढ़ाया जाए। जातिगत जनगणना के आंकड़े जारी किए जाएं।'
बसपा ने कांग्रेस पर भी किया हमला
चर्चा में हिस्सा लेते हुए तेलुगु देशम पार्टी के राम मोहन नायडू ने जाति आधारित जनगणना कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि जब 2021 में जनगणना हो रही है तब जाति आधारित गणना कराई जानी चाहिए। ऐसा होने पर ही कल्याण योजनाओं से संबंधित बेहतर नीति और योजनाएं बनाई जा सकेंगी।

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