वाराणसी लखनऊ रेल मार्ग पर अब नहीं दौड़ेगी वरूणा सहित अधिक आय देने वाली ट्रेने, प्राइवेटाईजेशन की तैयारी - सूत्र


जौनपुर। कोरोना संक्रमण के बहाने पहले चरण के समय 23 मार्च 2020 से बन्द पड़ी वाराणसी से चलकर जौनपुर सुल्तानपुर होते लखनऊ को जानें वाली वरूणा एक्सप्रेस ट्रेन को रेलवे बोर्ड द्वारा आज तक नहीं चलाये जाने से पूर्वांचल के यात्रियों को भारी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। जन प्रतिनिधियों (सांसदो) सहित समाज सेवियों एवं यात्रियों द्वारा किये गये बड़ी संख्या में पत्रचार को रेलवे बोर्ड द्वारा अनसुना कर दिया गया है। अब बोर्ड और केन्द्र सरकार दोनो इस मुद्दे को लेकर सवालो के कटघरे में आते जा रहे है। सूत्र की माने तो केन्द्र की सरकार (रेलवेमंत्रालय) वरूणा ट्रेन को चलाने के पक्ष में अब नहीं है। 
यहां बता दें कि वाराणसी से चल कर लखनऊ कानपुर तक चलने वाली वरूणा एक्सप्रेस ट्रेन जहां पूर्वांचल के व्यापारियों और आम यात्रियों के लिए बेहद सुविधाजनक ट्रेन थी वहीं पर रेलवे बोर्ड की सबसे अधिक कमाऊं ट्रेन बन चुकी थी। प्रतिदिन पूर्वांचल से हगारों की संख्या में यात्री लखनऊ कानपुर जा कर अपने काम को अंजाम देकर रात तक अपने कुनबे में वपसी कर लेते रहे। लेकिन कोरोना के बहाने इसे बन्द कर रेल मंत्रालय भारत सरकार ने पूर्वांचल की आवाम के साथ बड़ा ही घनघोर अन्याय किया है। 
सूत्र बतातें है कि वाराणसी जौनपुर सुल्तानपुर जनपदो के सांसदो ने लगभग दो दर्जन से अधिक पत्र रेलवे बोर्ड एवं रेल मंत्रालय भारत सरकार एवं पीएमओ कार्यालय वाराणसी को दिया है कि वरूणा एक्सप्रेस का संचालन जन हित में किया जाये लेकिन सरकार अथवा रेलवे बोर्ड के कान में जूं तक नहीं रेंग सका है। आम जनता की जबरदस्त मांग पर वाराणसी जौनपुर सुल्तानपुर के वरिष्ठ रेलवे अधिकारी गण भी अपने उच्चाधिकारियों को आम जनता की मांग से अवगत कराया लेकिन रेलवे बोर्ड और रेल मंत्रालय पर इसका कोई असर नहीं पड़ सका है। 
रेलवे विभाग के सूत्र अब बताते है कि सरकार के निर्देश पर रेल मंत्रालय के अन्दर खाने में वाराणसी लखनऊ रेल मार्ग पर वरूणा एक्सप्रेस सहित रेलवे बोर्ड की कई अधिक लाभप्रद ट्रेनों जैसे श्रमजीवी एक्सप्रेस, ताप्ती गंगा एक्सप्रेस सहित अन्य कई ऐसी ट्रनो को बन्द कर सरकार 2023 तक प्राइवेट हाथों में सौंप कर प्राइवेट ट्रनो के संचालन की योजना पर काम कर रही है। प्राइवेट ट्रेनो के चलने से यात्रियों की जेब पर बड़ा जबरदस्त असर होगा क्योंकि किराया लगभग तीन गुना बढ़ाये जाने की योजना चल रही है। रेलवे विभाग के एक अधिकारी ने नाम गोपनीय रखने की शर्त पर बताया कि सरकार और प्राइवेट ट्रेन चलाने वालों से मामला तय हो चुका है। 2022 में यूपी के विधानसभा चुनाव के पश्चात सरकार अपनी इस योजना को मूर्तरूप देने की तैयारी में है।
इसके अलांवा रेलवे बोर्ड ने मार्च 2020 से ही चुपके चुपके सीनियर सिटीजन को रेल विभाग द्वारा यात्रा के समय किराये में दी जाने वाली छूट को खत्म कर दिया है ऐसा रेल मंत्रालय के निर्देश पर किये जाने की बात रेलवे के अधिकारी बताते है। कोविड संक्रमण काल से ही दिव्यांग जनों को  सभी ट्रेनों में यात्रा किराया में दी जाने वाली छूट को खत्म कर अब कुछ ट्रेनो में ही दिव्यांग जनो के साथ कैंसर पीड़ित मरीजों को यह सुविधा मिल सकेगी।
खबर यह है कि रेलवे को अधिक फायदा देने वाली ट्रेनो का प्राइवेटाईजेशन करने के अलांवा कम आमदनी वाली ट्रेनो को सरकार रेल मंत्रालय के माध्यम से संचालित करने की योजना में है। केन्द्र सरकार की इस नीति से पूर्वांचल के वाराणसी जौनपुर सुल्तानपुर डिवीजन के यात्रियों की यात्रा जहां बुरी तरह से प्रभावित होगी वहीं पर आर्थिक रूप क्षति पहुंचने की प्रबल संभावना जताई जा रही है। 

टिप्पणियाँ

  1. रेलवे के नीजिकरण से ट्रेनों की लेटलतीफी बन्द हो सकती है, जिससे समय की बर्बादी से बचा जा सकता है। जो कि बहुत ही अच्छा और कल्याणकारी निर्णय होगा । लेकिन यदि किराए में वृद्धि हुई तो यह जनता के लिए बहुत ही भारी पड़ेगा। मोदी जी से अपेक्षाएं बहुत हैं सामान्य जनमानस को यह अहसास है कि एक गरीब का बेटा प्रधानमंत्री की कुर्सी को सँभाल रहा है जो गरीबों का अहित कभी नहीं होने देगा।

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