पिता ने दौड़ में हासिल किया पदक तो पुत्र भाला फेंक में बनायी अपनी पहचान


जौनपुर। गांव से निकली प्रतिभा को हौसले की उड़ान मिल गई है। भाला फेंक में मीरगंज क्षेत्र के डभिया-अदारी गांव निवासी 15 वर्षीय रोहन यादव की मेधा को पहचान कर पेरू के कोच माइकल मुसेलनमैन उसे तराशने में जुटे हैं। माइकल ने हाल ही में भाला फेंकते रोहन का वीडियो ट्विटर पोस्ट किया जो देखते ही देखते देशभर में चर्चा का विषय बन गया। खेल प्रेमी न सिर्फ रोहन की मेधा की सराहना कर रहे हैैं, उसमें ओलिंपिक गोल्ड मेडलिस्ट नीरज चोपड़ा की छवि देख रहे हैं।
जनता इंटर कालेज, चितांव के 11वीं के छात्र रोहन ने बताया कि वह दो साल से भाला फेंक का अभ्यास कर रहा हूं। पेरू के कोच माइकल मुसेलमैन से उसकी मुलाकात इंटरनेट मीडिया पर हुई और वह उसे निश्‍शुल्क प्रशिक्षण देने के लिए तैयार हो गए। बीते एक साल से उनकी अगुआई में अभ्यास कर रहा है। माइकल ने ट्विटर पर रोहन का वीडियो साझा करते हुए लिखा-रोहन यादव। वह केवल 15 साल का है और भारत की सबसे बड़ी भाला फेंक प्रतिभाओं में एक है। यह अकेली थ्रो ही उसे अंडर 18 में दुनिया के शीर्ष दस में पहुंचा देगी। उसके पास बहुत क्षमता है। मैं 2021 से उसको कोचिंग दे रहा हूं।

रोहन के पिता सभाजीत यादव 66 साल की उम्र में भी दौड़ लगाते हैं। उन्होंने दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु समेत कई महानगरों में हाफ व फुल मैराथन में करीब 60 पदक जीते हैैं। रोहन के अलावा उनके दो अन्य बेटे भी अंतरराष्ट्रीय स्तर के भाला फेंक खिलाड़ी हैैं। रोहन के बड़े भाई रोहित ने 2016 में वल्र्ड स्कूल चैंपियन में भाला फेंक में गोल्ड जीता था। अभी वह पंजाब के पटियाला स्थित साई स्टेडियम में प्रशिक्षण ले रहा है।

दूसरा भाई राहुल भी भाला फेंक इंटरनेशनल प्रतियोगिता की तैयारी कर रहा है। रोहन ने बताया कि ओलिंपिक चैैंपियन नीरज चोपड़ा से प्रेरित है और भारत के लिए गोल्ड जीतना चाहता है। रोहन की प्रतिभा की चर्चा से मां पुष्पा देवी बेहद खुश हैैं। उन्हें उम्मीद है कि उनके बेटे एक दिन पिता के सपनों को साकार कर जनपद व देश का नाम रोशन करेंगे। मेधावियों की उपलब्धि से गांव गदगद के प्रधान चंद्रसेन गिरी, राम आसरे यादव, धर्मेद्र गिरी ने कहा, हमारे गांव में सुविधाएं सीमित हैैं, लेकिन सभाजीत ने अपने तीन बेटों को सबसे अच्छा प्रशिक्षण और प्रोत्साहन दिया है।


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