टिकट न मिलने से नाराज नेताओ ने बढ़ाई राजनैतिक दलो की समस्या,जानें क्या होगा असर

 

पूर्वांचल के बनारस, आजमगढ़ और मीरजापुर मंंडल के जिलों में छठे और सातवें चरण में मतदान होना है। पार्टियों ने धीरे-धीरे अपने पत्ते खोलने शुरू कर दिए हैं। जैसे-जैसे प्रत्याशियों का एलान हो रहा है, चुनावी सरगर्मियां भी बढ़ रही हैं। साथ ही असन्तोष भी बढ़ रहा है और बगावती सुर भी उठने लगे है। जिन दावेदारों और निवर्तमान विधायकों का टिकट कटा है, उनमें और उनके समर्थकों में नाराजगी है। नजर अंदाज किए गए इन नेताओं में ज्यादातर की निष्ठा पार्टी के प्रति अटूट बनी रही लेकिन कुछ नेता ऐसे भी हैं जो बगावत पर उतर आए हैं। बलिया, मऊ और जौनपुर के ऐसे ही बागी हो चुके दावेदारों पर एक रिपोर्ट।
बलिया : विधानसभा चुनाव में बैरिया की राजनीति में विधायक सुरेंद्र सिंह ने मंगलवार को अलग टीम खड़ी कर दी। भाजपा से विधानसभा चुनाव का टिकट नहीं मिलने के बाद मंगलवार को बड़े जनसैलाब के साथ देवराजब्रह्म मोड़ से बैरिया त्रिमुहानी तक जुलूस निकालकर पूर्व विधायक स्व. बाबू मैनेजर सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इसके बाद रामनारायण सिंह सरस्वती विद्या मंदिर में बैठक थी। लेकिन लोगों की संख्या ज्यादा होने के कारण बैरिया-लालगंज मार्ग पर मीटिंग करनी पड़ी। हजारों समर्थकों के बीच विधायक ने भाजपा के शीर्ष नेताओं को चुनौती देते हुए कहा कि टिकट भले ही पार्टियां देतीं हैं, लेकिन विधायक जनता बनाती है। टिकट तय करने वाले आकर देख लें, बैरिया की जनता किसके साथ है। उन्होंने बलिया से भाजपा सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त पर कई आरोप भी लगाए। सांसद पर सपा के साथ मिलीभगत का आरोप लगो हुए कहा कि मैं 10 मार्च के बाद ऐसे लोगों को जवाब दूंगा। मैंने किसी की स्कूल, कालेज की जमीन नहीं कब्जा की है। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी और योगी सरकार में मंत्री रहे आनंद स्वरूप शुक्ल पर भी गंभीर आरोप लगाए।
भाजपा प्रत्याशियों की घोषणा के बाद मधुबन व मुहम्मदाबाद गोहना में बगावत के स्वर उठने लगे हैं। मुहम्मदाबाद गोहना में विधायक श्रीराम सोनकर को पुन: टिकट मिलने से लोग नाराज हैं, तो मधुबन में बाहरी प्रत्याशी हटाओ के नारे के साथ मंगलवार को संगठन के जिला पदाधिकारी सहित लगभग 500 पदाधिकारियों ने इस्तीफा सौंप दिया। मधुबन में बीते 15 वर्षों से पार्टी की कमान संभाल रहे भरत सिंह पर 2017 में दारासिंह चौहान को तरजीह दी गई थी। पांच वर्षों तक योगी सरकार में वनमंत्री रहे दारा सिंह ने चुनाव से ठीक पहले भाजपा पर गंभीर आरोप लगाकर सपा का दामन थाम लिया। कार्यकर्ताओं को उम्मीद थी कि भरत सिंह को टिकट मिलेगा, लेकिन पार्टी ने बिहार के राज्यपाल फागू चौहान के पुत्र रामविलास चौहान को प्रत्याशी बना दिया। इससे मधुबन के कार्यकर्ता बेहद नाराज हैं। मंगलवार को जिला महामंत्री राधेश्याम सिंह के नेतृत्व में जिलामंत्री बबलू गुप्ता, मंडल अध्यक्ष मधुबन आलोक मल्ल, मंडल अध्यक्ष फतहपुर मंडाव मनोज कुमार गुप्ता, मंडल अध्यक्ष दरगाह संजय कुमार सिंह, मंडल अध्यक्ष बडरांव उमेश मौर्या के साथ मंडल मंत्री, महामंत्री, बूथ अध्यक्ष सहित कई मोर्चा के लगभग 500 पदाधिकारियों ने जिला मुख्यालय पहुंच जिलाध्यक्ष प्रवीण कुमार गुप्ता को इस्तीफा सौंपकर 24 घंटे में निर्णय बदलने की चेतावनी दी। भाजपा के जिलाध्यक्ष प्रवीण कुमार गुप्ता ने हालांकि कहा है कि प्रत्याशी चयन से कार्यकर्ताओं में थोड़ी नाराजगी है। यह भाजपा परिवार का मामला है। पार्टी के साथ आमजन व कार्यकर्ताओं की भावनाएं जुड़ी हुई हैं। शीर्ष नेतृत्व को अवगत कराकर नाराजगी दूर कर ली जाएगी।
मडिय़ाहूं से सपा की पूर्व विधायक श्रद्धा यादव का टिकट कटा तो उन्होंने एक बार फिर बगावती रुख अख्तियार कर लिया। जनता और समर्थकों की आवाज पर चुनाव लडऩे का संकेत देकर उन्होंने समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी की मुश्किलें तो बढ़ा ही दी हैैं। पार्टी ने 2007 में भी श्रद्धा यादव को टिकट नहीं दिया था। उस समय भी नाराज होकर उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा था। मंगलवार को उनके आवास पर समर्थकों की भारी भीड़ जुटी। पूर्व विधायक श्रद्धा यादव ने कहा कि समर्थक तथा मडिय़ाहूं विधानसभा क्षेत्र की जनता कहेगी तो वह किसी भी पार्टी या निर्दल प्रत्याशी के तौर पर चुनावी मैदान में उतरने को तैयार हैं। 2012 में मडिय़ाहूं विधानसभा क्षेत्र से जीतकर मैंने समाजवादी पार्टी की सरकार बनाने में सहयोग किया था। 2017 में मैैं चुनाव हार जरूर गई लेकिन पांच साल तक क्षेत्र की जनता के सभी सुख-दुख में उनके साथ खड़ी रही।


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