कुरआन अहलेबैत का कसीदा पढ़ते हुए नजर आता है : मौलाना इमाम हैदर


कुरआन को समझने वाला इस्लाम के बताये हुए रास्ते पर चलेगा

जौनपुर। नगर स्थित शाही किला के पास बलुआघाट में मकबूल मंजिल में कनाडा से आये मौलाना सैयद इमाम हैदर ने कहा कि दीने इस्लाम की किताब कुरआन शरीफ हमें दुनिया में न सिर्फ जिंदगी कैसे बसर करनी है उसका तरीका व सलीका सिखाती है बल्कि साथ ही नबी व अहलेबैत का क्या मरतबा है वह भी बताने का काम करती है। जिसने कुरआन को समझा वोह इस्लाम को समझ गया और जो इस्लाम को समझ गया वोह रसूले खुदा व अहलेबैत के बताये हुए रास्ते पर जरूर चलेगा। समाजसेवी सैयद सादिक मेंहदी की पहली मजलिसे बरसी को खेताब करते हुए मौलाना ने कहा कि इंसान को ऐसी जिंदगी जीना चाहिए कि उसके मरने के बाद लोग उसके किये गये कार्यों  से याद करें। कुछ ऐसा ही किरदार मरहूम सादिक मेंहदी का था। आज यहां लोग इकट्ठा हुए लोग मजलिस करके ये पैगाम दे रहे हैं कि हमारे लिए कर्बला में हजरत इमाम हुसैन व उनके साथियों की शहादत से बढ़कर कुछ भी नहीं है। हम अपने लोगों को खो देने के बाद भी सिर्फ इसलिए सब्रा कर लेते हैं क्योंकि हमारे सामने वाकये कर्बला हमेशा दिखाई पड़ता है। मौलाना इमाम हैदर ने कहा कि इंसान के नेक अमल व लोगों की खिदमत करने का सिला खुदा उसे आखेरत में जरूर देता है। जो इंसान सिर्फ अपनी रोजमर्रा की जिंदगी जी कर सुकून से सोने का दावा करता है वोह अल्लाह की रहमत से महरूम रह जाता है क्योंकि कुरआन शरीफ ने कहा है कि जिंदगी में दूसरों की मदद जिसने नहीं की उसने दुनिया में कुछ भी नहीं किया। इससे पूर्व मजलिस का आगाज तिलावते कलाम पाक से हुआ।

सोजखानी मुजफ्फरनगर से आये असगर मेंहदी बबलू व उनके हमनवां ने किया। पेशखानी हसन फतेहपुरी, शोहरत जौनपुरी ने किया। बाद खत्म मजलिस अंजुमन शमशीरे हैदरी के नौहे खां शहजादे ने अपने दर्द भरे नौहे पढ़कर माहौल को गमगीन कर दिया। संचालन डॉ.इंतेजार मेंहदी ने किया। इस मौके पर शिया जामा मस्जिद के पेश इमाम मौलाना महफूजुल हसन खां, मौलाना तनवीर हसन खां, मौलाना मनाजिर हसनैन खां, मौलाना शेख हसन जाफर, खुर्शीद मेंहदी, नेहाल हैदर, कैफी रिजवी, कैफ, तनवीर हसन, इरफान सहित अन्य लोग मौजूद रहे। आभार कुमैल मेंहदी व पूर्व सभासद शाहिद मेंहदी ने प्रकट किया।

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