निधि का पैसा वापस लेने वाले जनप्रतिनिधियों की सर्वत्र हो रही है आलोचना



जौनपुर।  आज देश ही नहीं बल्कि पूरा विश्व कोविड 19 वैश्विक महामारी से जूझ रहा है इसके चलते समूचा भारत लाक डाऊन में है। हर स्तर पर कोरोना  से बचाने के उपाय किए जा रहे है। इसी क्रम में जनपद जौनपुर के माननीय सांसद एवं विधायक गणों ने जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को  कोरोना से लड़ने योग्य बनाने के लिए जिले के विकास हेतु मिली सरकारी धनराशि सांसद एवं विधायक निधि से अपने क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग को धनराशि देने की घोषणा कर खूब वाहवाही लूटा लेकिन जब धनराशि रिलीज करने की बात आयी तो जनपद के पांच जनप्रतिनिधियों  (जिसमें चार भाजपा के एवं एक बसपा के है ) ने चुपके से जिले के मुख्य विकास अधिकारी को पत्र भेज कर अपनी-अपनी निधि की धनराशि रिलीज करने से रोक दिया । इसमें भाजपा के मछली शहर सांसद वीपी सरोज,  केराकत विधायक दिनेश चौधरी, जफराबाद विधायक हरेन्द्र प्रताप सिंह, बदलापुर विधायक रमेश मिश्रा, तथा मुगराबादशापुर से बसपा  विधायक सुषमा पटेल का नाम है।
  इस खबर को सबसे पहले प्रमुखता से *सच खबरें * ने 20 अप्रैल को प्रकाशित किया इसके बाद अन्य तमाम पोर्टल एवं समाचार पत्रों ने  खबर को प्रकाशित किया। तो जिले के दो जनप्रतिनिधि ( विधायक ) पत्रकारों के खिलाफ मोर्चा खोल दिये यहाँ तक कि पत्रकार को तथा कथित कहते हुए सम्बोधित किया। 
अब इसकी चर्चा आम जन मानस के बीच में शुरू हो गयी है। हर स्तर पर माननीय जनप्रतिनिधियो की आलोचना की जा रही है । हर जुबान से लगभग एक ही बात आ रही है कि जनप्रतिनिधियों ने सस्ती लोकप्रियता के लिए धन देने का स्वांग रचा था सही मायने में उनकों जनता की समस्याओं से कोई लेना-देना नहीं है। ऐ जनता के शुभेच्छु नहीं हो सकते है।  इस क्रम में वरिष्ठ पत्रकार पं.चन्द्रेश मिश्रा  से बात करने पर उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों को मिलने वाली निधियो पर तो आम जनता का हक होता है।  सरकार उन्ही के विकास हेतु धनराशि देती है यह अलग बात है कि इसे जनप्रतिनिधियों के माध्यम से खर्च कराती है। जनप्रतिनिधियों ने कोरोना संक्रमण से लड़ने के लिए दिया हुआ धन वापस लेकर  जनता के साथ छल किया है ।
कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष  इन्द्रभुवन सिंह  का कहना है कि जनप्रतिनिधियों ने सस्ती लोकप्रियता के लिए ही धन देने की बात किया था।  सच में वह आम जनता के प्रति जरा भी संवेदनशील नहीं है। जनप्रतिनिधि गण अपने चहेतों को लाभ पहुंचाते  जिससे उनको भी आर्थिक लाभ होता है। 
जनहित डिग्री कालेज के प्राचार्य  डा. यूपी सिंह  कहते हैं कि आज पूरा विश्व कोरोना महामारी से लड़ रहा है । लाक डाऊन के चलते गरीब मजदूर भूख से बेहाल है।  ऐसे में जनप्रतिनिधियों ने जनता का ही पैसा उनके स्वास्थ्य में न खर्च करते हुए जनता के साथ धोखा किया है। निधियों पर जनता का ही अधिकार होता है। आज सबसे बड़ी जरूरत है कि निधि का उपयोग कोरोना से लड़ने के लिए किया जाना चाहिए। 
पूर्व सभासद एवं भाजपा की राजनीति करने वाले सुनील यादव कहते हैं कि जिन  जनप्रतिनिधियों ने निधि का पैसा वापस लिया है उनके द्वारा सीधे जनता के साथ धोखा किया गया है।  आज संकट की घड़ी में जनता की धनराशि उसके स्वास्थ्य हित के लिए खर्च करना चाहिए।  साथ ही सवाल भी किया कि जब पैसा वापस ही लेना था तो फिर देने का पत्र क्यों प्रचारित किया गया था । ऐसे दोहरे चरित्र वाले जनप्रतिनिधि कभी भी जनता के हितैषी नहीं हो सकते है। 
सपा के युवा नेता मुकेश यादव का कहना है कि यह निधि वर्ष 2019-20 की थी  इसे हर हाल में वित्तीय वर्ष की अन्तिम तिथि 31 मार्च  2020 तक खर्च कर लिया जाना चाहिए। जनप्रतिनिधियों ने पैसा वापस लेकर जहां जनता के साथ छल किया है वहीं पर सरकारी गाइड लाइन का उल्लंघन किया है। इनके खिलाफ तो सरकार को विधिक कार्यवाही करना चाहिए। सच तो यह है कि इनसे जनता का कोई लेना-देना नहीं है यह जनता के पैसों से कमीशन खोरी करके राजशाही ठाठ बनाये हुए है।
इस तरह जिससे भी निधियों के वापसी पर प्रतिक्रिया जानने का प्रयास किया गया सभी ने जनप्रतिनिधियों को दोषी माना है और साफ शब्दों में कहा कि जनता का पैसा इस संकट की घड़ी में उसके काम नहीं आ सका उसके लिए जनप्रतिनिधि गण ही जिम्मेदार है।

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